बॉलीवुड में यह आम धारणा है कि किसी गाने का फिल्म की कहानी से तालमेल होना जरूरी है, तभी दर्शक उसे दिल से अपनाते हैं। लेकिन 1997 में एक ऐसी फिल्म आई जिसने इस सोच को सिरे से पलट दिया। उस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गाना कहानी के साथ कतई फिट नहीं था, उसमें एक ऐसा किरदार भी था जो फिल्म में कहीं दिखता ही नहीं था, और फिर भी वह गाना उस फिल्म की असल पहचान बन गया। यह किस्सा है 'हीरो नंबर 1' के उस ब्लॉकबस्टर गाने का और डेविड धवन की उस जिद का, जिसने बॉलीवुड को एक अमर गीत दिया।
डेविड धवन का फिल्ममेकिंग का अनोखा फंडा
गीतकार समीर अंजान ने डेविड धवन के साथ कई फिल्मों में काम किया था। उनके अनुभव के मुताबिक, डेविड की फिल्मों में पारंपरिक रोमांटिक गीतों की बजाय ऐसे गाने होते थे जो दर्शकों का तुरंत मनोरंजन करें और चार्टबस्टर बन जाएं। डेविड को फिल्म की सिचुएशन से ज्यादा गाने की पकड़ और उसके असर पर भरोसा था। यही सोच एक दिन बॉलीवुड की सबसे यादगार रचनात्मक बहसों में से एक की वजह बनी।
जब समीर ने रोका और डेविड ने नहीं माना
'हीरो नंबर 1' बनने के दौरान डेविड धवन, समीर अंजान के पास गए और बोले, 'यार, एक रोमांटिक गाना लिख दे।' समीर ने पेशेवर अंदाज में जवाब दिया कि पहले फिल्म की सिचुएशन बताओ, किरदार का मूड बताओ, बिना उसके गाने की रचना मुमकिन नहीं। लेकिन डेविड धवन का जवाब बिल्कुल अलग था। उन्होंने सीधे कहा, 'सिचुएशन गई तेल लगाने, तू मुझे हिट गाना दे, सिचुएशन मैं निकाल लूंगा।'
'बाप' था ही नहीं फिल्म में
समीर अंजान ने एक मुखड़ा तैयार किया और उन्हें पूरा यकीन था कि डेविड को यह लाइन बेहद पसंद आएगी। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि यह गाना उनकी फिल्म में इस्तेमाल नहीं हो सकता। जब डेविड ने वजह पूछी, तो समीर ने बात रखी, 'गाना सुपरहिट है, लेकिन तेरी फिल्म में नहीं जाएगा। फिल्म में लड़की का बाप नहीं, दादा हैं। ऐसे में तेरे बाप के डर से कैसे फिट होगा?' यह आपत्ति बिल्कुल ठोस थी। 'हीरो नंबर 1' में करिश्मा कपूर के किरदार मीना के जीवन में पिता की कोई प्रमुख उपस्थिति नहीं थी। घर के सख्त और अनुशासनप्रिय मुखिया की भूमिका में कादर खान थे, जो मीना के दादा के किरदार में थे। गाने में 'बाप' था, फिल्म में 'दादा' था, और यही विरोधाभास समीर की आपत्ति की जड़ था।
गाना सुनते ही पलट गए डेविड धवन
लेकिन डेविड धवन टस से मस नहीं हुए। उन्होंने एक बार फिर समीर से कहा, 'मैंने तुझसे कितनी बार कहा है, सिचुएशन गई तेल लेने। तू बस गाना सुना।' समीर ने पूरा गाना सुनाया। गाना खत्म होते ही डेविड ने तुरंत फैसला सुना दिया कि यही गाना फिल्म में जाएगा, इस पर कोई और बहस नहीं होगी। फिर उन्होंने समीर से एक ऐसी बात कही जो आज भी याद की जाती है। उन्होंने कहा, 'आज का दिन याद रखना। कई साल बाद जब कोई पूछे कि ऐसा गाना कैसे लिख दिया, तब बताना कि जब गाना हिट हो जाता है तो लोग उसकी सिचुएशन नहीं देखते, सिर्फ गाना याद रखते हैं।'
भविष्यवाणी सौ फीसदी सच निकली
फिल्म के रिलीज होते ही डेविड की यह बात एकदम सच साबित हो गई। 'मैं तुझको भगा लाया हूं तेरे घर से तेरे बाप के डर से' उस जमाने का सबसे बड़ा हिट गाना बन गया। किसी ने नहीं पूछा कि फिल्म में बाप है या दादा। गाने की धुन और बोल इतने दिलकश थे कि यह सवाल किसी के जेहन में आया ही नहीं। आज भी दशकों बाद यह गाना शादियों, पार्टियों और स्टेज शो में उसी जोश के साथ बजाया जाता है।
'हीरो नंबर 1' की कहानी क्या थी
राजेश खन्ना की मशहूर फिल्म 'बावर्ची' से प्रेरित 'हीरो नंबर 1' में गोविंदा एक अमीर घराने के युवक राजेश की भूमिका में थे, जिन्हें करिश्मा कपूर यानी मीना से मोहब्बत हो जाती है। मीना के दादा, जिन्हें कादर खान ने निभाया था, बेहद सख्त और अनुशासन के पक्के इंसान थे। गोविंदा का किरदार परिवार के दिल तक पहुंचने के लिए अपनी अमीरी छुपाकर उनके घर में बावर्ची यानी रसोइए का काम करने लगता है। पूरी फिल्म इसी के इर्द-गिर्द बुनी गई है कि कैसे वह अपनी सूझबूझ और प्यार से पूरे परिवार की उलझनें सुलझाता है और आखिरकार दादा जी का भी दिल जीत लेता है।
दूसरे गाने भी बने लोगों की जुबान पर
यह फिल्म केवल एक गाने के दम पर नहीं, बल्कि अपने पूरे संगीत के जादू से लोगों के दिलों में उतरी। 'सोना कितना सोना है', 'सातों जनम तुझको पाते', 'मोहब्बत की नहीं जाती' और 'ऊपरी वाला' जैसे गीत उस दौर में संगीत प्रेमियों की पहली पसंद थे। फिल्म का संगीत आनंद-मिलिंद ने दिया था और अधिकतर गीत समीर अंजान की कलम से निकले थे। पूरा एल्बम ही उस समय एक बड़ी कामयाबी साबित हुआ।
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक सफलता
21 फरवरी 1997 को रिलीज हुई 'हीरो नंबर 1' डेविड धवन के निर्देशन और वाशु भगनानी के निर्माण में बनी थी। लगभग 6.5 करोड़ रुपये के बजट में तैयार इस फिल्म ने भारत में 30 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का कारोबार किया और 1997 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में अपनी जगह पक्की की। गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी ने एक बार फिर साबित किया कि जब ये दोनों साथ काम करते हैं तो बॉक्स ऑफिस पर जश्न तय है। इस फिल्म के साथ गोविंदा और करिश्मा कपूर की जोड़ी भी उस दौर की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में शुमार हो गई।













