मई 1977 खत्म होने में बस पांच दिन बाकी थे जब 27 मई को सिनेमाघरों में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने बॉलीवुड के इतिहास की दिशा ही बदल दी। एक्शन, ट्रेजडी, कॉमेडी और भगवान के चमत्कार, सबकुछ एक ही फिल्म में समेटा गया था। नाम था अमर अकबर एंथोनी, और इसी फिल्म का एक गाना आज भी प्रेमी जोड़े प्यार का इजहार करने के लिए गुनगुनाते हैं, हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें। खास बात यह रही कि इस एक गाने को हिंदी सिनेमा के चार दिग्गज गायकों लता मंगेशकर, मुकेश, किशोर कुमार और मोहम्मद रफी ने मिलकर गाया था, ऐसा संयोग बहुत कम फिल्मों में देखने को मिलता है।
एक अखबार की खबर से जन्मी कहानी
मनमोहन देसाई के दिमाग में इस फिल्म का बीज एक अखबार की खबर से पड़ा था। खबर में जिक्र था एक शराबी जैक्शन नाम के व्यक्ति का, जो अपनी जिंदगी से इतना तंग आ चुका था कि उसने अपने तीन बच्चों को एक पार्क में छोड़ दिया। मनमोहन देसाई ने यह किस्सा अपने दोस्त प्रयागराज को सुनाया और दोनों ने मिलकर एक ऐसी पटकथा गढ़ी जो आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे यादगार फिल्मों में शुमार हो गई।
सितारों की भरमार, पहली बार साथ आए देसाई-बच्चन
फिल्म में विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, अमिताभ बच्चन, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, शबाना आजमी, निरूपा रॉय और प्राण जैसे कलाकार लीड भूमिकाओं में नजर आए। संवाद कादर खान की कलम से निकले थे जबकि कहानी का श्रेय मनमोहन देसाई की पत्नी जीवनप्रभा देसाई और प्रभा शर्मा को दिया गया। यह मसाला फिल्म पूरी तरह खोया-पाया फॉर्मूले पर टिकी थी, जिसमें बिछड़े भाई बरसों बाद फिर मिलते हैं। दिलचस्प बात यह भी रही कि यह पहला मौका था जब अमिताभ बच्चन ने मनमोहन देसाई के साथ काम किया, और प्रोड्यूसर के तौर पर भी यह देसाई की पहली फिल्म थी।
सात गाने और हर एक सुपरहिट
फिल्म के संगीत की कमान लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के हाथों में थी और गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे। कुल सात गाने फिल्म में शामिल थे और हर गाने ने उस दौर में तहलका मचाया। आज भी हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें और शिर्डी वाले साईं बाबा, आया है तेरे दर पे सवाली जैसे गाने उतने ही मशहूर हैं जितने रिलीज के वक्त थे। हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें गाना राग बिलावल पर आधारित था। इसमें किशोर कुमार ने अमिताभ बच्चन, मुकेश ने विनोद खन्ना और मोहम्मद रफी ने ऋषि कपूर के लिए अपनी आवाज दी, जबकि लता मंगेशकर ने परवीन बॉबी, नीतू सिंह और शबाना आजमी के हिस्से का गाना गाया। इसके अलावा फिल्म की कव्वाली पर्दा है पर्दा भी उस दौर में जबरदस्त लोकप्रिय हुई थी।
तीन भाइयों का खून, एक बोतल और थिएटर में मचा शोर
मनमोहन देसाई की फिल्मों में लॉजिक से ज्यादा इमोशन को तरजीह दी जाती थी, और वो खुद भी कहानी को तर्क की कसौटी पर कसने के पक्षधर नहीं थे। अमर अकबर एंथोनी में भी कई दृश्य वैज्ञानिक तर्क पर खरे नहीं उतरते थे। सबसे चर्चित सीन वही था जिसमें विनोद खन्ना, अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर अपनी मां को खून देते नजर आए, तीनों का खून एक ही बोतल में जमा होकर मां तक पहुंचाया गया, जो मेडिकल साइंस के हिसाब से पूरी तरह गलत था। लेकिन जब यह सीन थिएटर की बड़ी स्क्रीन पर आया तो दर्शकों में जोश भर गया और सीटियों तथा तालियों से हॉल गूंज उठा।
महज सवा करोड़ की लागत, कमाई हुई पंद्रह गुना
अमर अकबर एंथोनी को बनाने में करीब 1.2 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि फिल्म ने दुनियाभर से 15 करोड़ रुपये की कमाई की। यह आंकड़ा फिल्म को 1977 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बना गया। उसी साल मनमोहन देसाई की चार फिल्में रिलीज हुई थीं, धरम-वीर, परवरिश, चाचा-भतीजा और अमर अकबर एंथोनी, और हैरानी की बात यह रही कि चारों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुईं। मनमोहन देसाई से पहले वक्त और यादों की बारात जैसी फिल्मों में भी खोया-पाया फॉर्मूला आजमाया जा चुका था, लेकिन देसाई ने अपनी फिल्मों में आम आदमी को ही हीरो बनाकर पेश किया, जिससे दर्शक कहानी से सीधे जुड़ जाते थे। अमर अकबर एंथोनी में भी यही जुड़ाव देखने को मिला, जिसने इसे उस दौर की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में शामिल करा दिया।













