भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ही नाम से कई फिल्में बनना कोई अनोखी बात नहीं है, लेकिन जब एक ही शीर्षक के तले तीन बिल्कुल अलग-अलग शैलियों की फिल्में तैयार हों और दर्शकों के सामने पेश की जाएं, तो यह एक दुर्लभ रिकॉर्ड बन जाता है। फिल्म 'आंखें' के साथ बॉलीवुड में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। 1968, 1993 और 2002 में इसी एक नाम से तीन फिल्में बड़े पर्दे पर आईं। खास बात यह रही कि तीनों ही फिल्मों का प्लॉट, माहौल और स्टार कास्ट एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न थे।
1968 की 'आंखें': जब धर्मेंद्र की जासूसी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास
इस नाम की पहली शुरुआत साल 1968 में हुई थी, जब जाने-माने निर्देशक रामानंद सागर 'आंखें' नाम से एक थ्रिलर लेकर आए। यह उस दौर की परंपरागत पारिवारिक या रोमांटिक फिल्मों से बिल्कुल अलग एक स्पाई-थ्रिलर थी। फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट में धर्मेंद्र, माला सिन्हा, महमूद और कुमकुम शामिल थे। इसमें धर्मेंद्र ने सुनील नाम के एक भारतीय सीक्रेट एजेंट का किरदार निभाया था। कहानी का मुख्य प्लॉट देश के भीतर आतंकवादी नेटवर्क फैलाने वाले विदेशी गद्दारों और साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने के एक खतरनाक मिशन पर केंद्रित था।
विदेश की खूबसूरत लोकेशंस पर शूट की गई इस फिल्म में जबरदस्त सस्पेंस, एक्शन और देशभक्ति का मिश्रण देखने को मिला था। दर्शकों ने इस जासूसी ड्रामे को हाथों-हाथ लिया और 1968 की यह 'आंखें' उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई। बॉक्स ऑफिस इंडिया के रिकॉर्ड के अनुसार, यह फिल्म 'ब्लॉकबस्टर' रही और इसने देश भर के कई सिनेमाघरों में सिल्वर और गोल्डन जुबली मनाई थी।
1993 की 'आंखें': गोविंदा और चंकी पांडे की स्लैपस्टिक कॉमेडी का धमाल
पहली फिल्म के ठीक 25 साल बाद या लगभग तीन दशक के अंतर पर यानी साल 1993 में दूसरी 'आंखें' रिलीज हुई। हालांकि, इस बार दर्शकों को किसी गुप्तचर की कहानी के बजाय एक विशुद्ध स्लैपस्टिक कॉमेडी देखने को मिली। डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गोविंदा और चंकी पांडे मुख्य भूमिकाओं में थे। दोनों ने बुन्नू और मुन्नू नाम के दो नटखट और बेफिक्र भाइयों का रोल निभाया था, जो अपने अमीर पिता कादर खान को अपनी हरकतों से परेशान करते रहते हैं।
कहानी में नया मोड़ तब आता है जब इसमें मर्डर मिस्ट्री और हमशक्ल का तड़का लगता है। फिल्म में गोविंदा का डबल रोल था। स्टार कास्ट में गोविंदा, चंकी पांडे और कादर खान के अलावा रागेश्वरी, ऋतु शिवपुरी, शिल्पा शिरोडकर और शक्ति कपूर जैसे कलाकार भी शामिल थे। डेविड धवन के कॉमेडी टाइमिंग और गोविंदा के दोहरे अवतार ने सिनेमाघरों में दर्शकों को लोटपोट कर दिया।
कमाई के मामले में 1993 की 'आंखें' ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। लगभग 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने भारत में 25 करोड़ रुपये से अधिक का नेट कलेक्शन किया और इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 35 करोड़ रुपये से ज्यादा रहा। यह साल 1993 की सबसे बड़ी हिट फिल्म बनी। ट्रेड विश्लेषक आज भी इसे ऑल-टाइम 'ब्लॉकबस्टर' का दर्जा देते हैं, जिसने लगातार 12 हफ्तों से अधिक समय तक सिनेमाघरों को हाउसफुल रखा।
2002 की 'आंखें': अमिताभ बच्चन और बैंक डकैती का अनोखा थ्रिलर
साल 2002 में तीसरी बार 'आंखें' नाम का इस्तेमाल हुआ और इस बार कहानी ने पूरी तरह यू-टर्न ले लिया। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक अनोखी बैंक डकैती पर आधारित थ्रिलर थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अर्जुन रामपाल, सुष्मिता सेन और परेश रावल ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। कहानी में अमिताभ बच्चन ने विजय सिंह राजपूत नाम के बैंक मैनेजर का रोल निभाया, जिसे नौकरी से निकाल दिया जाता है। इस अपमान का बदला लेने के लिए वह बैंक में डकैती की योजना बनाता है।
इस डकैती को अंजाम देने के लिए वह तीन ऐसे दृष्टिहीन व्यक्तियों को चुनता है, जिनकी स्थिति बैंक लूट के दौरान एक मजबूत सबूत और अलिबाई के रूप में काम आ सके। सुष्मिता सेन का किरदार इन तीनों दृष्टिहीन व्यक्तियों को डकैती की ट्रेनिंग देता है। अपने समय के हिसाब से इस फिल्म का विचार और ट्रीटमेंट बेहद नया और अनोखा था।
हालांकि, अनोखे कांसेप्ट के बावजूद यह फिल्म कमाई के मामले में 1968 और 1993 वाली सफलता नहीं दोहरा सकी। बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, इसे 'एवरेज' करार दिया गया। करीब 17 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 17.48 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया, जबकि भारत में इसका ग्रॉस कलेक्शन 28.64 करोड़ रुपये और दुनिया भर में कुल ग्रॉस कलेक्शन 33.81 करोड़ रुपये रहा।
एक नाम और तीन अलग-अलग दौर का मनोरंजन
भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ही टाइटल से बनी इन तीनों फिल्मों का सफर इस बात का प्रमाण है कि कहानी और मेकिंग का तरीका दर्शकों के अनुभव को कैसे बदल देता है। जहां पहली दो फिल्मों ने अपने-अपने दशकों में कमाई के नए रिकॉर्ड कायम किए और ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बनीं, वहीं तीसरी फिल्म एक बेहतरीन स्टार कास्ट और अनूठे विषय के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर नया रिकॉर्ड बनाने से चूक गई।



















