भारतीय सिनेमा के 90 के दशक के दौर में कुछ ऐसे नग्मे बने जिन्होंने समय की सीमाओं को पार कर श्रोताओं के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। साल 1998 में पर्दे पर आई फिल्म 'गुलाम' का भावुक ट्रैक 'अब नाम मोहब्बत के' एक ऐसा ही गीत है, जिसकी धुन आज 28 साल का लंबा अरसा बीत जाने के बावजूद आंखों को नम कर देती है। इस भावनात्मक रचना को पर्दे पर अभिनेता आमिर खान और अभिनेत्री रानी मुखर्जी पर बेहद संजीदगी के साथ फिल्माया गया था।
उदित नारायण और अलका याग्निक की मखमली आवाज का जादू
इस गीत की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और पार्श्व गायकों की पुरअसर अदायगी है। मशहूर गायक उदित नारायण और पार्श्व गायिका अलका याग्निक ने अपनी मखमली आवाजों से इस गीत के हर एक लफ्ज में रूह फूंक दी। दोनों गायकों के सुरों के तालमेल ने इस रचना को हमेशा के लिए अमर बना दिया। संगीत प्रेमियों के बीच आज भी जब 90 के दशक के सबसे भावुक और यादगार रोमांटिक गीतों की चर्चा होती है, तो इस गीत का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है।
जतिन-ललित का संगीत और समीर के मार्मिक बोल
इस यादगार गीत को संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित ने अपने सुरीले संगीत से सजाया था। उनके रचे संगीत में सादगी के साथ गहरा दर्द और जज्बात महसूस होते हैं। वहीं मशहूर गीतकार समीर ने इसके बोल लिखे थे, जिन्होंने बेहद नफासत से दो दिलों के बीच पनपते अहसास को कागज़ पर उतारा। संगीत और बोल का यह मेल ऐसा साबित हुआ जिसने 90 के दशक के संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
पर्दे पर आमिर खान और रानी मुखर्जी की मासूम केमिस्ट्री
पर्दे पर इस गीत का फिल्मांकन बेहद खास था। आमिर खान और रानी मुखर्जी की जोड़ी ने अपनी सादगी भरी केमिस्ट्री और मासूमियत से दर्शकों के दिलों को गहराई से छू लिया था। यह गीत कहानी के उस नाज़ुक मोड़ को खूबसूरती से बयां करता है जहां किरदारों के बीच प्यार पनप रहा होता है और एक-दूसरे के प्रति गहरा भावनात्मक झुकाव आकार ले रहा होता है। दोनों कलाकारों के हाव-भाव और ठहराव ने इस गीत की कशिश को कई गुना बढ़ा दिया।



















