घरेलू इक्विटी बाजारों में हालिया बिकवाली के बाद निवेशकों की नजरें अब कई अहम वैश्विक और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिक गई हैं। आगामी कारोबारी सत्रों में बाजार की चाल तय करने में अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्याज दर निर्णय, घरेलू महंगाई के ताजा आंकड़े, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और पश्चिम एशिया में चल रही भू-राजनीतिक उठापटक सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं। वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक मोर्चे पर जारी अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के बीच कारोबारी सतर्क रुख अपना सकते हैं। सप्ताह की शुरुआत में सोमवार को गणेश चतुर्थी के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में सामान्य ट्रेडिंग बंद रहेगी।
हालिया बिकवाली से बने दबाव का असर
बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। बीएसई सेंसेक्स में 1,733.67 अंक यानी 2.26 प्रतिशत की भारी कमजोरी देखी गई, जिसने प्रमुख स्तरों को नीचे धकेल दिया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों वाले निफ्टी में भी 499.6 अंक यानी 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इस तेज गिरावट ने निवेशकों को नए निवेश से पहले सतर्क कर दिया है, क्योंकि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भी जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बना रहे हैं।
पश्चिम एशिया संकट, ब्रेंट क्रूड और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति
बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भू-राजनीतिक समीकरण बाजार की धारणा को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजित मिश्रा के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम तथा ब्रेंट क्रूड की घटती-बढ़ती कीमतें बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा घोषित किए जाने वाले मौद्रिक नीति निर्णय और ब्याज दरों के भावी मार्ग पर उसका आधिकारिक बयान पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर असर डालेगा।
घरेलू मोर्चे पर महंगाई, बेरोजगारी और व्यापार संतुलन के आंकड़े
घरेलू स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़े बाजार के सामने आने वाले हैं। अजित मिश्रा ने रेखांकित किया कि अगस्त महीने के थोक मूल्य सूचकांक यानी WPI और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई के आंकड़े निवेशकों के रडार पर होंगे। साथ ही देश में बेरोजगारी की स्थिति और व्यापार संतुलन के नवीनतम आंकड़े भी कारोबारी धारणा को प्रभावित करेंगे। रिसर्च एनालिस्ट फर्म एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि तात्कालिक तौर पर सभी की नजरें अमेरिकी महंगाई दर और फेडरल रिजर्व के नीतिगत कदमों पर जमी हुई हैं।
बॉन्ड यील्ड में उछाल और भारत के लिए कच्चे तेल का जोखिम
हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने आगाह किया कि महंगाई के नए जोखिमों के कारण वैश्विक बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर पर दबाव गहरा सकता है। इस परिदृश्य में 15 और 16 सितंबर को आयोजित होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी FOMC की बैठक इस सप्ताह का सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक उत्प्रेरक साबित होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कच्चा तेल सबसे संवेदनशील बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया में गतिरोध के चलते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होती है और वैश्विक कीमतों में तेजी आती है, तो इससे देश के भीतर मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ जाएगा, आयात बिल में तेज उछाल आएगा, भारतीय रुपये की विनिमय दर पर भारी दबाव बनेगा और घरेलू कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन में संकुचन आ सकता है।

















