कलर विजन ने तोड़ा सेना में जाने का सपना, करौली के भल्लू सिंह गुर्जर ने एकेडमी खोल सैकड़ों को बनाया फौजीहस्तशिल्प और रचनात्मक उत्पादों से गोरखपुर की महिलाएं गढ़ रहीं स्वावलंबन का नया सफरकटरा में माता वैष्णो देवी हेलीपैड टर्मिनल पर तड़के लगी आग, टिकट काउंटर और कंप्यूटर खाकगुरुग्राम में युवराज मनचंदा मर्डर के आरोपियों पर वसूली और साइबर फ्रॉड के गंभीर आरोपमुंबई कोस्टल रोड पर बेकाबू बीएमडब्ल्यू की भीषण टक्कर में तीन लोगों की मौत, एक की हालत नाजुककैरेबियाई जलक्षेत्र में अमेरिकी सेना का भीषण हमला, नार्को बोट तबाह होने से चार की मौतघरेलू नुस्खे से मिनटों में चमकाएं गंदी प्लास्टिक बाल्टी, बेकिंग सोडा और सिरके का आसान उपायछोटे बच्चों में मल रोकने की आदत और कब्ज के खतरे, जानिए बाल रोग विशेषज्ञ की सलाहलखीमपुर में पौधों की नर्सरी से शुरू करें स्वरोजगार, कम लागत में होगी नियमित आमदनीवापसी से पहले सक्रिय हुआ मानसून, कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
हस्तशिल्प और रचनात्मक उत्पादों से गोरखपुर की महिलाएं गढ़ रहीं स्वावलंबन का नया सफरउत्तर प्रदेश
20 सित॰ 2026, 10:18 am (18 मिनट पहले)· 1

हस्तशिल्प और रचनात्मक उत्पादों से गोरखपुर की महिलाएं गढ़ रहीं स्वावलंबन का नया सफर

जूट के आभूषण, भगवान की पोशाकें और ऑर्गेनिक दीये बनाकर गोरखपुर की महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदल रही हैं। घरेलू स्तर पर शुरू हुए इन प्रयासों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में महिला कारीगर अपने पारंपरिक हुनर और नए विचारों के संगम से आत्मनिर्भरता की शानदार मिसाल पेश कर रही हैं। घर की चौखट के भीतर से शुरू हुए छोटे प्रयास अब संगठित कुटीर उद्यम का रूप ले चुके हैं। साधारण दिखने वाली स्थानीय सामग्रियों, जैसे जूट, चिकनी मिट्टी, गोबर और केले के तने तथा फल को रचनात्मक रूप देकर महिलाएं ऐसे उत्पाद तैयार कर रही हैं जिनकी बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है। अपनी लगन से वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति संवार रही हैं, बल्कि आसपास की अन्य महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़ा होने का हौसला दे रही हैं।

जूट की बोरियों से तैयार हो रहे डिजाइनर आभूषण

पर्यावरण के अनुकूल और हटकर दिखने वाले फैशन की चाह रखने वालों के बीच जूट से बनी ज्वेलरी तेजी से पसंद की जा रही है। गोरखपुर में महिलाएं अनाज रखने के काम आने वाली सामान्य जूट की पुरानी बोरियों को करीने से छांटकर आकर्षक आभूषणों में बदल रही हैं। इन बोरियों के धागों और बनावट को आधार बनाकर सुरुचिपूर्ण नेकलेस, झुमके, ब्रेसलेट तथा कई प्रकार की सजावटी एक्सेसरीज गढ़ी जा रही हैं। इनमें अलग-अलग प्राकृतिक रंगों, मोतियों और पारंपरिक डिजाइनों का समावेश किया जाता है, जिससे हर गहना अपने आप में अनूठा नजर आता है। कम लागत में तैयार होने वाले ये आभूषण कॉलेज की छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं।

ये भी पढ़ें

भगवान की पोशाकें और चिकनी मिट्टी की मूर्तियां

धार्मिक आयोजनों और मंदिर संस्कृति से जुड़े उत्पादों में भी इन महिलाओं ने अपनी खास पहचान बनाई है। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के लिए विशेष वस्त्र तैयार करने में दर्जनों कारीगर जुटी हुई हैं। रेशम, मखमल, गोटा-पट्टी और ब्रोकेड जैसे कपड़ों पर बारीक सिलाई, लेस और सजावटी काम करके ये पोशाकें बनाई जाती हैं। मौसम के अनुरूप, जैसे गर्मियों में हल्के सूती वस्त्र और सर्दियों में गर्म पोशाकें, तथा जन्माष्टमी, नवरात्रि व दीवाली जैसे त्योहारों के लिए विशेष डिजाइन तैयार किए जाते हैं। आस्था से जुड़ाव के कारण इस काम में सालों भर नियमित मांग बनी रहती है। इसके समानांतर, महिलाएं स्थानीय चिकनी मिट्टी से सुंदर मूर्तियां और हस्तशिल्प तैयार करती हैं। मिट्टी को गूंथकर सांचों और हाथों से रूप देने से लेकर उन पर जीवंत रंगों की नक्काशी तक का समूचा काम घर पर ही पूरा किया जाता है, जिसमें क्षेत्र की पारंपरिक लोक कला साफ झलकती है।

गोबर से बने ऑर्गेनिक दीये और हवन कप

पर्यावरण संरक्षण को लेकर बढ़ती जागरूकता ने पारंपरिक पूजा सामग्री के क्षेत्र में भी नए अवसर खोले हैं। गोरखपुर की महिला उद्यमी गाय के गोबर से ऑर्गेनिक दीये और हवन कप तैयार कर रही हैं। पूरी तरह जैविक तरीके से बने इन दीयों में धूप, जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक गोंद का मिश्रण किया जाता है। पूजा में उपयोग के बाद ये दीये पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते और बाद में आसानी से मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते हैं। प्रदूषण मुक्त होने के कारण शहरों में ऐसे प्राकृतिक उत्पादों को खूब सराहा जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस काम में कच्चा माल बहुत सस्ता पड़ता है और महिलाएं घर के दैनिक कामकाज निपटाने के बाद बचे समय में इसे आसानी से बना लेती हैं।

केले से वैल्यू-एडेड उत्पाद और घरेलू उद्योगों का विस्तार

स्थानीय स्तर पर बहुतायत में उगने वाले केले का इस्तेमाल अब सिर्फ फल के तौर पर खाने तक सीमित नहीं है। यहां की महिलाएं केले से कई तरह के प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार कर रही हैं। इसमें कच्चे केले का पौष्टिक आटा और स्वास्थ्यवर्धक पेय पदार्थ शामिल हैं। कृषि उपज को प्रसंस्कृत करके बेचने से किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं और महिलाओं को प्रसंस्करण के जरिए नियमित आमदनी का जरिया मिल रहा है। इसके साथ ही, समूह बनाकर अगरबत्ती निर्माण और घरेलू सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले फिनाइल बनाने का काम भी बड़े पैमाने पर चल रहा है। विभिन्न फूलों और प्राकृतिक अर्क से तैयार अगरबत्तियां तथा उच्च गुणवत्ता वाला फिनाइल स्थानीय दुकानों और पड़ोस के बाजारों में आसानी से खप जाता है।

संगीता पांडे का संघर्ष और हैंडमेड बैग्स की मांग

जिले में महिला सशक्तिकरण की बात करते हुए संगीता पांडे का सफर अन्य सभी के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत है। उन्होंने महज 1500 रुपये की बेहद मामूली पूंजी के साथ मिठाई और अन्य सामान रखने वाले गत्ते के डिब्बे बनाने का काम शुरू किया था। शुरुआत में सीमित साधनों और कठिन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने गुणवत्ता से समझौता नहीं किया। धीरे-धीरे ऑर्डर बढ़ते गए और उनका यह छोटा सा प्रयास आज डिब्बे निर्माण के एक बड़े और सफल कारोबार में बदल चुका है। इसी तरह कई अन्य महिलाएं विभिन्न रंगों, मजबूत कपड़ों और आकर्षक आकारों में हैंडमेड बैग्स डिजाइन कर रही हैं। शॉपिंग बैग से लेकर ऑफिस और रोजमर्रा के उपयोग में आने वाले इन थैलों में मजबूती और हाथ की कारीगरी का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है, जिसके चलते प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में इनकी बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

सवाल-जवाब

गोरखपुर में महिलाएं जूट से कौन से उत्पाद तैयार कर रही हैं?
महिलाएं पुरानी जूट की बोरियों के धागों और बनावट का उपयोग करके नेकलेस, झुमके, ब्रेसलेट और विभिन्न सजावटी आभूषण बना रही हैं।
गोबर से बने दीयों की बाजार में क्या खासियत है?
इन्हें पूरी तरह जैविक तरीके से बनाया जाता है, जिससे ये प्रदूषण रहित होते हैं और पूजा के बाद प्राकृतिक खाद में बदल जाते हैं।
संगीता पांडे ने अपने कारोबार की शुरुआत कितने रुपयों से की थी?
संगीता पांडे ने गत्ते के डिब्बे बनाने का काम करीब 1500 रुपये की शुरुआती पूंजी से शुरू किया था।
भगवान के वस्त्र बनाने में किन बातों का ध्यान रखा जाता है?
वस्त्रों को मौसम, प्रमुख त्योहारों और धार्मिक अवसरों के अनुसार अलग-अलग कपड़ों, रंगों और सजावटी डिजाइनों में हस्तनिर्मित तैयार किया जाता है।
केले से कौन से नए मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाए जा रहे हैं?
केले का उपयोग केवल फल के रूप में करने के बजाय उससे पौष्टिक आटा, जूस और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
महिलाएं घर बैठे कौन से घरेलू उत्पाद बना रही हैं?
वे समूहों में मिलकर विभिन्न सुगंधों वाली अगरबत्तियां, घरेलू सफाई का फिनाइल और मजबूत हैंडमेड कपड़े के बैग तैयार कर रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp