भारतीय सिनेमा के इतिहास में कैमरे के पीछे काम करने वाले तकनीशियनों और निर्देशकों का अचानक पर्दे के सामने आकर अभिनय करना कोई नई बात नहीं है, लेकिन फिल्म हनुमान अंश के निर्माण के दौरान जो घटनाक्रम देखने को मिला, वह सामान्य कास्टिंग बदलाव से काफी अलग था। इस फिल्म की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले जब मुख्य अभिनेता की तबीयत अचानक खराब हो गई, तो पूरी निर्माण टीम के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया था। ऐसे नाजुक समय में फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य को मुख्य किरदार निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। शोभिनव सत्य ने इस चुनौतीपूर्ण अवसर को स्वीकार करते हुए न सिर्फ कैमरे के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि अपनी अभिनय क्षमता से पूरी कहानी में प्राण फूंक दिए। पर्दे के पीछे की इस अनोखी कहानी ने फिल्म के माहौल और इसकी सफलता दोनों को बेहद खास बना दिया।
कास्टिंग संकट से मुख्य भूमिका तक का सफर
फिल्म हनुमान अंश की शूटिंग का शेड्यूल तय हो चुका था और पूरी तैयारी पूरी कर ली गई थी। हालांकि, पहले से साइन किए गए मुख्य अभिनेता के अचानक बीमार पड़ने के कारण अचानक काम रोकना पड़ा। मेकर्स के पास नया अभिनेता ढूंढने या शूटिंग स्थगित करने के सीमित विकल्प थे। इसी आपात्कालीन स्थिति में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी और निर्माण टीम ने असिस्टेंट डायरेक्टर शोभिनव सत्य पर भरोसा जताने का फैसला किया। शोभिनव सत्य को फिल्म में बाबा का मुख्य किरदार ऑफर किया गया। संयोग से शोभिनव सत्य खुद भी बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं, जिसके कारण उन्होंने इस भूमिका की गंभीरता और आध्यात्मिक महत्व को तुरंत समझ लिया। कैमरे के पीछे काम करने वाले एक तकनीशियन का अचानक मुख्य हीरो बन जाना पूरी टीम के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था।
सेट पर 43 दिनों का चालीसा पाठ और कड़े नियम
फिल्म हनुमान अंश के निर्माण का माहौल किसी सामान्य व्यावसायिक प्रोजेक्ट से पूरी तरह अलग रखा गया था। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में शूटिंग शुरू होने से पहले लगातार 43 दिनों तक नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ आयोजित किया गया था। यह परंपरा सिर्फ शूटिंग से पहले तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि फिल्मांकन के दौरान भी हर दिन की शुरुआत और काम की समाप्ति पर पूरी टीम एक साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करती थी। इसके अलावा, सेट पर अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त नियम लागू किए गए थे। सेट के भीतर किसी भी प्रकार के मांसाहारी भोजन जैसे चिकन, मटन और मछली के सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। साथ ही, शराब के सेवन को सख्त मनाही के दायरे में रखा गया था। पूरी टीम को निर्देश दिया गया था कि वे सेट पर किसी भी प्रकार के विवाद, लड़ाई-झगड़े और अभद्र भाषा के प्रयोग से पूरी तरह दूर रहें।
तकनीकी अड़चनों का समाधान और लंगूर का आगमन
फिल्मांकन के दौरान टीम को कई ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जिन्हें वे सामान्य इत्तेफाक नहीं मानते। कई बार जब कैमरा अचानक काम करना बंद कर देता था या प्रोडक्शन से जुड़ी कोई तकनीकी समस्या आ जाती थी, तो पूरी टीम तुरंत एक साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर देती थी। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, कई मौकों पर ऐसा हुआ कि चालीसा का पाठ पूरा होते-होते तकनीकी खराबी अपने आप ठीक हो जाती थी और अटका हुआ काम दोबारा चालू हो जाता था। इसके अलावा, शूटिंग के दौरान सेट पर अचानक एक लंगूर आ पहुंचा। यह लंगूर सिर्फ कुछ मिनटों के लिए नहीं आया, बल्कि लगभग दो दिनों तक शूटिंग स्थल पर टीम के आसपास ही घूमता रहा। टीम ने इस घटना को बेहद खास माना और बाद में उस लंगूर को फिल्म के दृश्यों में भी शामिल कर लिया गया।
चित्रकूट का पुराना कमरा और नीम करौली बाबा का जुड़ाव
फिल्म की शूटिंग के लिए पूरी टीम उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्र चित्रकूट पहुंची थी। वहां एक महत्वपूर्ण दृश्य की शूटिंग के लिए एक पुराने कमरे का चयन किया गया था। शूटिंग पूरी होने के बाद टीम को स्थानीय स्तर पर यह जानकारी मिली कि जिस कमरे में उन्होंने फिल्मांकन किया है, वहां अतीत में प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा भी विश्राम कर चुके थे। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक जानकारी के सामने आने के बाद पूरी टीम के लिए उस स्थान पर काम करने का अनुभव बेहद यादगार और खास बन गया। फिल्म के कलाकारों और तकनीशियनों के लिए ये तमाम घटनाएं महज एक इत्तेफाक न होकर एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव बन गईं।
बॉलीवुड में कैमरे के पीछे से अभिनय का नया उदाहरण
बॉलीवुड में निर्देशकों और पर्दे के पीछे काम करने वाले कलाकारों का अभिनय के क्षेत्र में उतरना एक समृद्ध परंपरा का हिस्सा रहा है। इससे पहले फरहान अख्तर ने निर्देशन से अभिनय की ओर कदम बढ़ाते हुए रॉक ऑन से लेकर भाग मिल्खा भाग जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इसी तरह जाने-माने निर्देशक अनुराग कश्यप ने अकीरा और एके वर्सेज एके जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को चौंकाया था। वहीं निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने सुपरहिट फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में रामाधीर सिंह का ऐतिहासिक और यादगार किरदार निभाकर अभिनय के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी थी। हालांकि, फिल्म हनुमान अंश में शोभिनव सत्य का असिस्टेंट डायरेक्टर से लीड हीरो बनना इसलिए विशिष्ट माना जा रहा है क्योंकि यह बदलाव किसी योजनाबद्ध रणनीति का हिस्सा नहीं था, बल्कि परिस्थितियों और टीम के अनुशासन के कारण संभव हुआ था।



















