भारतीय संगीत जगत में जब भी नब्बे के दशक के जादुई और सुरीले दौर की चर्चा होती है, तब उदित नारायण और कुमार सानू जैसे दिग्गज गायकों के साथ एक और बेहद सौम्य और ऊर्जावान आवाज अनायास ही यादों में तैरने लगती है। अपने चेहरे पर हमेशा खिली रहने वाली स्वाभाविक मुस्कान, सादगी और दिल को छू लेने वाले गीतों से पहचान बनाने वाले लोकप्रिय पार्श्वगायक शान 30 सितंबर को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। दशकों तक अपनी आवाज से अनगिनत लोगों के दिलों पर राज करने वाले शान के इस खास दिन पर उनकी जिंदगी की सबसे मजबूत साथी और हमसफर राधिका मुखर्जी के दिलचस्प सफर पर रोशनी डालना जरूरी हो जाता है, जिन्होंने अपनी जिंदगी के हर मोड़ पर नई राहें तलाश की हैं।
शुरुआती दौर का संघर्ष और अटूट रिश्ता
शान और राधिका की शादी को करीब 25 साल पूरे हो चुके हैं। जब दोनों का रिश्ता शुरू हुआ था, उस वक्त शान बंगाली परिवार से आते थे और राधिका का संबंध पंजाबी व गुजराती पारिवारिक पृष्ठभूमि से था। यह वह समय था जब न तो शान के पास आर्थिक संपन्नता थी और न ही वे उस मुकाम पर पहुंचे थे जिसकी वे तलाश कर रहे थे। पैसों की तंगी के उस दौर में शान ने ट्यूशन पढ़ाकर और केबल कनेक्शन का काम करके अपना गुजारा चलाया था। उस शुरुआती संघर्ष में राधिका और शान के पास केवल एक दूसरे के प्रति निष्ठा, अटूट प्रेम और हर मुश्किल परिस्थिति में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने का मजबूत इरादा था।
कम उम्र में वैवाहिक जीवन का सपना और केबिन क्रू का करियर
सेलेब्रिटी शेफ अमृता रायचंद के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान राधिका मुखर्जी ने अपने जीवन से जुड़े कई अनछुए पहलुओं का खुलासा किया था। राधिका ने साझा किया था कि बचपन के दिनों में वे पारंपरिक करियर को लेकर बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी नहीं हुआ करती थीं। उनका एक स्पष्ट सपना था कि वे बेहद कम उम्र में यानी 18 साल की उम्र से ही शादी और पारिवारिक जीवन बसाना चाहती थीं। उन्होंने बचपन में ही यह मन बना लिया था कि किसी भी हाल में 22 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वे शादी करके पूरी तरह सेटल हो जाएंगी।
शान से शादी के समय राधिका की उम्र वास्तव में 22 साल ही थी। विवाह से पहले राधिका ने विमानन क्षेत्र में कदम रखा था और वे जेट एयरवेज के साथ-साथ स्विस एयर में बतौर एयर होस्टेस अपनी सेवाएं दे रही थीं। हालांकि शान के साथ परिणय सूत्र में बंधने के कुछ समय बाद ही उन्होंने एयर होस्टेस की व्यस्त नौकरी छोड़ने का फैसला किया ताकि वे अपने वैवाहिक जीवन और घरेलू जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
मातृत्व के प्रति समर्पण और फ्लाइंग स्कूल का सफर
राधिका ने अमृता रायचंद के सामने यह बात स्पष्ट की थी कि शादी के समय ही उन्होंने यह दृढ़ निश्चय कर लिया था कि जब भी वे मां बनेंगी, तो उनका पूरा समय और ध्यान सिर्फ और सिर्फ उनके बच्चों की परवरिश पर होगा। उन्होंने मातृत्व को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी माना और बच्चों की देखरेख के लिए अपने पेशेवर काम से दूरी बनाए रखी।
लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच शान ने उन्हें अपने व्यक्तिगत सपनों को पंख देने के लिए प्रेरित किया। शान के प्रोत्साहन के बाद राधिका ने फ्लाइंग स्कूल में विधिवत दाखिला लिया और कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पायलट का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त किया। कई सालों तक अपने पेशेवर करियर को लेकर बहुत गंभीर न रहने वाली राधिका के इस कदम ने यह साबित किया कि सीखने और कुछ नया करने की कोई तय सीमा नहीं होती।
साल 2015 में एंटरप्रेन्योरशिप और लेखक के रूप में नया मुकाम
पारिवारिक जीवन और पायलट का लाइसेंस हासिल करने के बाद राधिका की जिंदगी ने साल 2015 में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ लिया। राधिका ने किसी की छाया बनने के बजाय खुद की स्वतंत्र पहचान गढ़ने का फैसला किया और बिजनेस की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने अमर पंडित के साथ मिलकर संगीत जगत से जुड़ा लाइव एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म 'हैप्पीडेमिक' शुरू किया।
इस स्टार्टअप की स्थापना के साथ राधिका मुखर्जी ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एंटरप्रेन्योर के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। आज इस व्यवसाय के जरिए वे न केवल अपनी स्वतंत्र पहचान स्थापित कर चुकी हैं, बल्कि एक सफल कंपनी का संचालन करते हुए अच्छी कमाई भी कर रही हैं। इसके अलावा राधिका एक संवेदनशील लेखिका भी हैं और उन्होंने 'ब्रोकेन शैडोज' नाम से एक किताब भी लिखी है। उनका यह सफर दिखाता है कि घरेलू जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए भी कोई महिला अपने दम पर सफलता की नई कहानी लिख सकती है।


















