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हिंदी सिनेमा के लिए 28 अगस्त क्यों माना जाता है अनलकी दिन, जानें लगातार असफल हुई फिल्मों का लेखा जोखाबॉलीवुड
28 अग॰ 2026, 4:21 pm (2 घंटे पहले)· 2

हिंदी सिनेमा के लिए 28 अगस्त क्यों माना जाता है अनलकी दिन, जानें लगातार असफल हुई फिल्मों का लेखा जोखा

बॉलीवुड इतिहास में 28 अगस्त की तारीख बॉक्स ऑफिस के लिए असफल साबित हुई है। सैफ अली खान की फैंटम से लेकर धर्मेंद्र की जुल्म-ओ-सितम तक, कई बड़ी फिल्में इस दिन सिनेमाघरों में दर्शकों का दिल जीतने में नाकाम रहीं।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में रिलीज की तारीखों का अपना एक विशेष महत्व होता है। कई बार अच्छी स्टार कास्ट और बड़े बजट वाली फिल्में भी केवल गलत समय पर रिलीज होने के कारण सिनेमाघरों में दर्शक जुटाने में नाकाम हो जाती हैं। कैलेंडर का 28 अगस्त का दिन हिंदी फिल्म उद्योग के लिए ऐसा ही एक मनहूस पन्ना माना जाता है। वर्षों से इस खास तारीख पर जब भी कोई नई फिल्म बड़े पर्दे पर उतरी, उसे दर्शकों से निराशा ही हाथ लगी। सैफ अली खान की थ्रिलर फिल्म से लेकर धर्मेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा, सुनील शेट्टी और सोहेल खान जैसे दिग्गज कलाकारों की फिल्मों तक, 28 अगस्त को रिलीज हुई दर्जनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ने में विफल रही हैं।

सैफ अली खान और कैटरीना कैफ की 'फैंटम' (2015)

वर्ष 2015 में 28 अगस्त के दिन निर्देशक कबीर खान के निर्देशन में बनी एक्शन थ्रिलर फिल्म फैंटम सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित इस काउंटर-टेररिज्म फिल्म में सैफ अली खान और कैटरीना कैफ मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म का निर्माण साजिद नाडियाडवाला की बड़ी प्रोडक्शन कंपनी के तहत किया गया था और इसे करीब 72 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में तैयार किया गया था। हालांकि, इतने बड़े बजट और चर्चित विषय के बावजूद फिल्म का स्क्रीनप्ले दर्शकों को आकर्षित नहीं कर सका। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म जैसे-तैसे अपनी लागत ही वसूल कर पाई और अंततः इसे बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप घोषित कर दिया गया।

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धर्मेंद्र और शत्रुघ्न सिन्हा की 'जुल्म-ओ-सितम' (1998)

90 के दशक में 28 अगस्त 1998 को निर्देशक केसी बोकाडिया की फिल्म जुल्म-ओ-सितम बड़े पर्दे पर आई थी। इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, जया प्रदा और मुकुल देव जैसे बड़े और स्थापित कलाकारों की पूरी फौज मौजूद थी। दिग्गजों की मौजूदगी के बाद भी फिल्म की बेहद कमजोर स्क्रिप्ट, पुराने ढर्रे के संवाद और घिसे-पिटे निर्देशन के चलते दर्शकों ने इसे सिरे से नकार दिया। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म एक बड़ी डिजास्टर साबित हुई और कमाई के मामले में पूरी तरह से पिछड़ गई।

आदित्य पंचोली की एक्शन फिल्म 'जंजीर द चेन' (1998)

उसी तारीख यानी 28 अगस्त 1998 को एक और बड़ी फिल्म जंजीर द चेन रिलीज हुई थी। इस एक्शन ड्रामा फिल्म में आदित्य पंचोली, शक्ति कपूर और सुदेश बेरी ने अहम किरदार निभाए थे। पहली झलक में कल्ट क्लासिक जैसी दिखने वाली यह फिल्म रिलीज के पहले दिन से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में पूरी तरह से विफल रही। कमजोर कहानी, औसत दर्जे के एक्शन सीक्वेंस और खराब माउथ पब्लिसिटी के कारण यह फिल्म सिनेमाघरों में अपनी पकड़ नहीं बना सकी और बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई।

सामाजिक विषय पर बनी सोहेल खान की 'किसान' (2009)

वर्ष 2009 में 28 अगस्त के दिन निर्देशक पुनीत सिरा की फिल्म किसान रिलीज की गई थी। भारतीय किसानों के दैनिक संघर्षों और उनकी वर्तमान समस्याओं पर केंद्रित यह एक गंभीर सामाजिक फिल्म थी। इसमें सोहेल खान, अरबाज खान, जैकी Shroff और दीया मिर्जा ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। यद्यपि फिल्म का विषय बहुत ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण था, लेकिन धीमी गति और कमजोर निष्पादन की वजह से यह दर्शकों का ध्यान खींचने में नाकाम रही। नतीजा यह हुआ कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपना बजट तक नहीं निकाल सकी।

सुनील शेट्टी की मल्टी-स्टारर 'डैडी कूल' (2009)

28 अगस्त 2009 को ही निर्देशक के. मुरली मोहन राव के निर्देशन में बनी कॉमेडी फिल्म डैडी कूल सिनेमाघरों में उतरी थी। सुनील शेट्टी, आफताब शिवदासानी, जावेद जाफरी और आरती छाबड़िया जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म एक विदेशी कॉमेडी फिल्म का रीमेक थी। कई जाने-माने कॉमेडी कलाकारों के होने के बावजूद फिल्म का बचकाना हास्य दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह नाकाम रहा। कमजोर निर्देशन और फीकी कॉमेडी के कारण यह मल्टी-स्टारर फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई।

राजपाल यादव और तिग्मांशु धूलिया की 'बांके की क्रेजी बारात' (2015)

वर्ष 2015 में 28 अगस्त को एक कम बजट की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म बांके की क्रेजी बारात रिलीज की गई थी। इस फिल्म में राजपाल यादव, विजय राज, संजय मिश्रा और तिग्मांशु धूलिया जैसे बेहतरीन और मंझे हुए कलाकारों ने अभिनय किया था। कलाकारों की शानदार अदाकारी के बावजूद मेकर्स की ओर से खराब प्रमोशन, सिनेमाघरों में शो की कम संख्या और ढीली स्क्रिप्ट के कारण यह फिल्म दर्शकों तक नहीं पहुंच सकी और बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही।

फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ा सबक

बॉलीवुड के इतिहास में 28 अगस्त का यह ट्रैक रिकॉर्ड इस बात का गवाह है कि केवल बड़े सितारों, भारी-भरकम बजट या नामचीन निर्देशकों के दम पर ही सफलता हासिल नहीं की जा सकती। जब तक फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले मजबूत नहीं होंगे, तब तक बॉक्स ऑफिस पर टिक पाना संभव नहीं है। 28 अगस्त को रिलीज हुई इन तमाम फिल्मों की नाकामी आज भी फिल्म निर्माताओं के लिए एक बड़ा सबक बनी हुई है।

सवाल-जवाब

28 अगस्त को रिलीज हुई कौन-कौन सी प्रमुख फिल्में फ्लॉप रहीं?
28 अगस्त को सैफ अली खान की 'फैंटम', धर्मेंद्र की 'जुल्म-ओ-सितम', आदित्य पंचोली की 'जंजीर द चेन', सोहेल खान की 'किसान', सुनील शेट्टी की 'डैडी कूल' और राजपाल यादव की 'बांके की क्रेजी बारात' जैसी फिल्में फ्लॉप साबित हुईं।
सैफ अली खान की फिल्म 'फैंटम' का बजट कितना था और इसका प्रदर्शन कैसा रहा?
28 अगस्त 2015 को रिलीज हुई फिल्म 'फैंटम' का बजट लगभग 72 करोड़ रुपये था। भारी बजट और कबीर खान के निर्देशन के बावजूद यह फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर केवल अपनी लागत ही निकाल पाई और फ्लॉप घोषित हुई।
फिल्म 'जुल्म-ओ-सितम' में कौन-कौन से मुख्य कलाकार शामिल थे?
28 अगस्त 1998 को रिलीज हुई 'जुल्म-ओ-सितम' में धर्मेंद्र, शत्रुघ्न सिन्हा, जया प्रदा और मुकुल देव जैसे बड़े स्टार्स मुख्य भूमिका में थे।
सोहेल खान और अरबाज खान की फिल्म 'किसान' क्यों असफल रही?
पुनीत सिरा के निर्देशन में बनी फिल्म 'किसान' अपने संवेदनशील विषय के बावजूद धीमी गति और कमजोर निष्पादन की वजह से दर्शकों को प्रभावित करने में नाकाम रही और अपना बजट भी नहीं निकाल सकी।
क्या 'डैडी कूल' किसी दूसरी फिल्म का रीमेक थी?
हां, 28 अगस्त 2009 को रिलीज हुई सुनील शेट्टी स्टारर 'डैडी कूल' एक विदेशी कॉमेडी फिल्म की रीमेक थी, जो अपनी कमजोर कॉमेडी की वजह से फ्लॉप रही।
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