वैश्विक बेंचमार्क इंडेक्स प्रदाता मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल (एमएससीआई) ने अपने इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स में अगस्त 2026 की समीक्षा के तहत बड़ा बदलाव किया है। इस रीबैलेंसिंग प्रक्रिया में चार नई कंपनियों को सूचकांक में स्थान दिया गया है, जबकि तीन पुरानी कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह फेरबदल 31 अगस्त 2026 को बाजार बंद होने के बाद लागू होगा, जबकि नए परिवर्तन 1 सितंबर 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में लगभग 1.5 अरब डॉलर का पैसिव फंड फ्लो आने की संभावना जताई गई है।
सूचकांक में शामिल होने वाले नए शेयर और संभावित इनफ्लो
एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में लौरस लैब्स, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स (फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म ग्रो की मूल कंपनी) को शामिल किया गया है। वित्तीय विश्लेषकों का अनुमान है कि इस समावेश से इन कंपनियों में भारी पैसिव खरीदारी देखने को मिलेगी। वित्तीय अध्ययन संस्था नुवामा अल्टरनेटिव एंड क्वांटिटेटिव रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, लौरस लैब्स में सबसे अधिक लगभग 598 मिलियन डॉलर का पैसिव निवेश आ सकता है।
इसके अलावा चश्मा और आईवेयर ब्रांड लेंसकार्ट सॉल्यूशंस को करीब 352 मिलियन डॉलर, अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को लगभग 310 मिलियन डॉलर और बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स को करीब 256 मिलियन डॉलर का इनफ्लो मिलने का अनुमान है। विशेष रूप से लेंसकार्ट सॉल्यूशंस और बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई थीं। लेंसकार्ट 10 नवंबर 2025 को और बिलियनब्रेन गैराज वेंचर्स 12 नवंबर 2025 को सूचीबद्ध हुई थी। दोनों कंपनियों ने बाजार में अपनी शुरुआत के महज 10 महीनों के भीतर ही एमएससीआई बेंचमार्क सूचकांक में जगह बना ली है।
सूचकांक से बाहर हुई कंपनियां और आउटफ्लो की स्थिति
दूसरी तरफ, तीन प्रमुख कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स से बाहर कर दिया गया है। इन कंपनियों में टायर निर्माता बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, क्रेडिट कार्ड प्रदाता एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज और पाइप निर्माता कंपनी एस्ट्रल शामिल हैं। इंडेक्स से बाहर होने के कारण इन शेयरों से पैसिव फंड्स द्वारा बिकवाली देखने को मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज से लगभग 169 मिलियन डॉलर, एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज से करीब 143 मिलियन डॉलर और एस्ट्रल से लगभग 138 मिलियन डॉलर का पैसिव आउटफ्लो हो सकता है। फंड मैनेजरों द्वारा पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के दौरान इन शेयरों में बिकवाली का दबाव रह सकता है।
भारतीय सूचकांक का बढ़ता वजन और बाजार में हिस्सेदारी
चार नए शेयरों को जोड़ने और तीन को हटाने के बाद एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में कुल कंपनियों की संख्या 165 से बढ़कर 166 हो गई है। इसके साथ ही वैश्विक एमएससीआई इमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में भारत का भारांक (वेटेज) 11.8 प्रतिशत से थोड़ा बढ़कर 11.9 प्रतिशत हो गया है। यह वृद्धि वैश्विक निवेशकों के बीच भारतीय इक्विटी बाजार के बढ़ते महत्व को दर्शाती है।
एमएससीआई इंडिया इंडेक्स मुख्य रूप से भारतीय इक्विटी बाजार के बड़े और मंझोले पूंजीकरण (लार्ज-कैप और मिड-कैप) वाले शेयरों के प्रदर्शन पर नजर रखता है। यह सूचकांक भारत के कुल सूचीबद्ध इक्विटी बाजार पूंजीकरण के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है। एमएससीआई की अगली नियमित सूचकांक समीक्षा का ऐलान चालू वर्ष में 11 नवंबर 2026 को होगा, जिसके बदलाव 1 दिसंबर 2026 से प्रभावी होंगे।


















