रक्षाबंधन के पावन अवसर पर राजस्थान के धौलपुर जिला कारागार का माहौल पूरी तरह से भावनात्मक रंग में रंग गया। लंबे समय के अंतराल के बाद जब बहनें अपने बंदियों भाइयों से मिलने जेल परिसर पहुंचीं, तो जेल की सख्त दीवारें और सलाखें भी भाई-बहन के इस अटूट स्नेह के आगे बेअसर नजर आईं। सुबह से ही कारागार के बाहर परिजनों और बहनों का जुटना शुरू हो गया था, जो अपने भाइयों से मुलाकात कर रक्षासूत्र बांधने की राह देख रहे थे।
जेल प्रशासन की विशेष व्यवस्था और सुचारू प्रक्रिया
त्योहार के महत्व और आगंतुकों की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए जिला जेल प्रशासन ने पहले से ही व्यापक इंतजाम किए थे। कारागार में आने वाली बहनों और परिजनों को किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या असुविधा का सामना न करना पड़े, इसके लिए प्रवेश और मुलाकात की एक विशेष प्रक्रिया तय की गई थी। निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए बहनों को क्रमबद्ध तरीके से जेल परिसर के भीतर जाने की अनुमति दी गई।
सलाखों के बीच छलके आंसू और भावुक पल
मुलाकात कक्ष में जब भाई और बहन आमने-सामने आए, तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। कई महीनों बाद अपने भाइयों को सामने देखकर बहनें अपने आंसुओं को रोक न सकीं और उनसे लिपटकर रो पड़ीं। वहीं बंदियों के चेहरों पर भी अपनों को देखकर खुशी और सुकून के भाव साफ झलक रहे थे। बहनों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधी। इस दौरान बहनों ने ईश्वर से अपने भाइयों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और एक बेहतर कल की प्रार्थना की।
भाइयों का संकल्प और पारिवारिक जिम्मेदारी का अहसास
इस भावुक मुलाकात के दौरान भाई-बहनों ने एक-दूसरे का कुशलक्षेम जाना और घर-परिवार की वर्तमान परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। सलाखों के पीछे बैठे भाइयों ने भी बहनों के इस निस्वार्थ प्रेम के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। भाइयों ने अपनी बहनों को हर परिस्थिति में रक्षा का वचन दिया और जेल से बाहर आने के बाद अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को अधिक परिपक्वता और निष्ठा से निभाने का दृढ़ संकल्प दोहराया।
सुपरिटेंडेंट सुमन मीणा के नेतृत्व में शांतिपूर्ण आयोजन
रक्षाबंधन के इस संवेदनशील और भावनात्मक कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए थे। जेल अधीक्षक सुमन मीणा ने खुद पूरे परिसर में व्यवस्थाओं की कमान संभाली। उन्होंने मुलाकात प्रक्रिया की निरंतर निगरानी की और यह सुनिश्चित किया कि हर बहन अपने भाई से बिना किसी बाधा के मिल सके। प्रतिदिन की कठोर जेल दिनचर्या के बीच इस पर्व ने कैदियों के जीवन में सकारात्मकता और पारिवारिक रिश्तों की अहमियत का अहसास कराया।





















