बॉलीवुड का हर डायरेक्टर अपनी फिल्म शुरू करते वक्त यही सपना बुनता है कि उसकी कहानी बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच देगी। पर पर्दे पर ये सपना कभी सच होता है और कभी बिखर जाता है। मनमोहन देसाई, यश चोपड़ा, सुभाष घई, रमेश सिप्पी, महेश भट्ट, संजय लीला भंसाली, करण जौहर, फराह खान और रोहित शेट्टी — इस इंडस्ट्री ने ऐसे कई दिग्गज दिए, जिन्होंने हिट और ब्लॉकबस्टर की मिठास भी चखी और फ्लॉप का कड़वा घूंट भी पिया। आज से करीब 25 साल पहले एक ऐसे ही मशहूर डायरेक्टर का करियर एकदम किनारे पर खड़ा था। एक के बाद एक दो नाकामियों के बाद उसके सामने सब कुछ खत्म होने जैसा संकट था। लेकिन उसने जोखिम उठाया और एक ऐसी फिल्म गढ़ी, जिसने सिर्फ देश में ही नहीं, सात समंदर पार भी झंडे गाड़ दिए।
2001 का वो मोड़ जिसने सब बदल दिया
यह किस्सा है जाने-माने फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर का। साल 2001 उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनकर आया। बैक-टू-बैक दो फ्लॉप झेलने के बाद उन्होंने मन ही मन ठान लिया था कि अगर इस बार बात नहीं बनी तो वे हमेशा के लिए निर्देशन को अलविदा कह देंगे। हालत ऐसी थी कि कहानी सुनते ही फिल्म के हीरो और प्रोड्यूसर तक मन बना चुके थे कि यह प्रोजेक्ट डूब जाएगा। पर गोवारिकर ने हथियार नहीं डाले — उन्होंने महीनों स्क्रिप्ट को मांजा और जो रिस्क लिया, वही आगे चलकर ब्लॉकबस्टर बन गया। इस सफर का जिक्र खुद उन्होंने किया है।
15 जून की वो ऐतिहासिक टक्कर
15 जून के दिन बॉक्स ऑफिस पर दो ऐसी फिल्में आमने-सामने आई थीं, जिन्हें आज भी मिसाल के तौर पर याद किया जाता है। एक ओर थी अनिल शर्मा की 'गदर: एक प्रेम कथा' और दूसरी ओर आशुतोष गोवारिकर की पीरियड स्पोर्ट्स ड्रामा 'लगान'। दोनों ही फिल्मों ने दर्शकों के बीच जबरदस्त धूम मचाई।
एक्टर से डायरेक्टर तक का सफर
TrendKia को दिए एक इंटरव्यू में गोवारिकर ने माना था कि 90 के दशक के आखिरी बरसों में वे भारी दबाव से गुजर रहे थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर अभिनेता की थी और मशहूर टीवी शो 'सर्कस' से लेकर 'कभी हां कभी ना' जैसी फिल्मों में नजर आए। इसके बाद उन्होंने मेगाफोन थाम लिया। साल 1993 में उन्होंने थ्रिलर 'पहला नशा' बनाई, जिसमें दीपक तिजोरी, पूजा भट्ट और रवीना टंडन अहम किरदारों में थे। इस फिल्म में आमिर खान और शाहरुख खान का कैमियो भी था, फिर भी यह बॉक्स ऑफिस पर पिट गई।
दो हार और करियर पर सवाल
इसके दो साल बाद, 1995 में उन्होंने आमिर खान के साथ एक्शन थ्रिलर 'बाजी' बनाई, लेकिन यह भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक नहीं खींच पाई। दो बड़ी असफलताओं के बाद उनके निर्देशन पर सवालिया निशान लग चुके थे। उन्होंने इस दौर को याद करते हुए कहा था, 'मैं उस समय किसी कॉम्पेटिशन में नहीं था कि दूसरे फिल्ममेकर क्या बना रहे हैं। मुझे खुद को साबित करना था क्योंकि मेरी पिछली दो फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। यह मेरा तीसरा और आखिरी मौका था।'
एक चौंकाने वाला राज खोलते हुए उन्होंने बताया था, 'मैंने मन ही मन यह तय कर लिया था कि अगर मैं एक डायरेक्टर के रूप में 'लगान' से सफल नहीं हुआ तो मैं आगे कभी कोई फिल्म डायरेक्ट नहीं करूंगा। इसलिए मेरा पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ कहानी को सही करने पर था।'
आमिर का डर और भुवन की जीत
शुरू में आमिर खान खुद इस आइडिया से सहमत नहीं थे। एक गांव की पृष्ठभूमि में क्रिकेट और देशभक्ति को आपस में बुन देना उस वक्त बहुत बड़ा जोखिम था। आमिर ने अपने पुराने दोस्त को याद दिलाया था कि वे पहले ही दो फ्लॉप दे चुके हैं, इसलिए इस बार बेहद फूंक-फूंककर कदम रखना होगा। पर गोवारिकर पीछे नहीं हटे। उन्होंने पूरे तीन महीने लगाकर 'लगान' की एक-एक बारीकी पर स्क्रीनप्ले तैयार किया। जब उन्होंने दोबारा आमिर को कहानी सुनाई, तो आमिर हैरान रह गए। भुवन, कचरा, लाखा जैसे हर किरदार को जिस अंदाज में उन्होंने गढ़ा था, उसने आमिर का दिल जीत लिया।
25 करोड़ का बजट और आमिर खान प्रोडक्शंस की नींव
उस दौर में 'लगान' जैसी अनूठी फिल्म पर पैसा लगाने को कोई बड़ा प्रोड्यूसर तैयार नहीं था। फिल्म का बजट करीब 25 करोड़ रुपये था, जो उस समय के लिहाज से बहुत मोटी रकम थी। दिग्गज लेखक जावेद अख्तर ने भी इसे बड़ा जुआ माना था — हालांकि बाद में इसी फिल्म के सदाबहार गाने उन्हीं की कलम से निकले। जब कहीं रास्ता नहीं दिखा, तो आमिर खान ने खुद इसे प्रोड्यूस करने की ठानी और इसी फिल्म के साथ 'आमिर खान प्रोडक्शंस' की बुनियाद पड़ी।
ऑस्कर तक पहुंची कहानी
यह दांव पूरी तरह सही बैठा। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण पलट दिए और दुनिया भर में 65 करोड़ रुपये से ज्यादा की बंपर कमाई की। इतना ही नहीं, साल 2002 में 'लगान' को ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म की कैटेगरी में नॉमिनेशन मिला।
अगर 'लगान' न चलती, तो भारतीय सिनेमा गोवारिकर की कई शानदार फिल्मों से वंचित रह जाता। इसी कामयाबी के बाद वे शाहरुख खान के साथ 'स्वदेश' और ऋतिक रोशन व ऐश्वर्या राय स्टारर 'जोधा अकबर' जैसी यादगार फिल्में बना पाए।













