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साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन पर, 96 प्रतिशत चांद होगा ओझल, जानें सूतक और धार्मिक महत्वधर्म
23 अग॰ 2026, 10:59 am (44 मिनट पहले)· 2

साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन पर, 96 प्रतिशत चांद होगा ओझल, जानें सूतक और धार्मिक महत्व

साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन लगने जा रहा है। इस खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा का 96% हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढंक जाएगा, लेकिन भारत में न दिखने के कारण सूतक मान्य नहीं होगा।

साल 2026 का अगस्त महीना खगोलीय गतिविधियों के मामले में बेहद दिलचस्प रहने वाला है। ठीक पांच दिन बाद, यानी 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। इसी दिन भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन मनाया जाएगा और साथ ही प्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा का समापन भी होगा। कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगने वाला यह खगोलीय ग्रहण एक आंशिक ग्रहण है, जिसमें चांद का करीब 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया के पीछे छिप जाएगा और तांबे या लाल रंग जैसा नजर आएगा। हालांकि, यह ग्रहण भारतीय क्षेत्र में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल यहां प्रभावी नहीं होगा और सभी मांगलिक कार्य बिना किसी रुकावट के संपन्न हो सकेंगे।

सावन पूर्णिमा के दिन लगने वाले इस आंशिक चंद्र ग्रहण को तकनीकी रूप से ब्लड मून कहना सही नहीं होगा, क्योंकि यह पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं बल्कि एक डीप पार्शियल चंद्र ग्रहण है। पूर्ण ग्रहण के दौरान पूरा चंद्रमा पृथ्वी के उमरा यानी गहरी छाया क्षेत्र में समा जाता है, जबकि इस घटना में चांद का एक छोटा हिस्सा रोशन बना रहेगा। लोगों के मन में यह आशंका थी कि क्या इस ग्रहण का असर रक्षाबंधन के पर्व पर पड़ेगा, तो स्थिति स्पष्ट है कि भारत में दृश्यमान न होने के कारण किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति नहीं है और सभी लोग बिना किसी संशय के अपना त्योहार मना सकते हैं।

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भारतीय समयानुसार, रक्षाबंधन के दिन इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर होगी। इसके बाद ग्रहण का मध्य काल सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर दर्ज किया जाएगा और इसका समापन सुबह 11 बजकर 22 मिनट पर होगा। इस पूरी खगोलीय प्रक्रिया की कुल अवधि 3 घंटे और 18 मिनट की होगी। जिस समय यह ग्रहण अपनी प्रक्रिया में होगा, उस वक्त भारत में सुबह हो चुकी होगी। हालांकि कुछ सीमित हिस्सों में इसका हल्का प्रभाव दिख सकता है, लेकिन देश के अधिकांश इलाकों से ग्रहण का चरम चरण देखना संभव नहीं होगा। देश के कुछ हिस्सों में सूर्योदय से ठीक पहले क्षितिज के पास चंद्रमा पर इसका अंतिम आंशिक चरण नजर आ सकता है।

भारत में ग्रहण न दिखने पर क्या करें और क्या है धार्मिकनियम

चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आएगा, इसलिए सनातन धार्मिक परंपराओं के अनुसार यहां किसी भी प्रकार का सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसी स्थिति में रक्षाबंधन के दिन बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधने, विधि-विधान से पूजा-पाठ करने, मंदिरों के कपाट खुले रहने और भोजन पकाने व खाने को लेकर कोई विशेष रोक-टोक नहीं रहेगी। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन भगवान का स्मरण करना, पवित्र मंत्रों का जाप करना, ध्यान लगाना और अपनी क्षमतानुसार दान-पुण्य करना बेहद कल्याणकारी माना जाता है। बहनें बिना किसी संकोच के अपने भाइयों की कलाई पर शुभ मुहूर्त में राखी बांध सकती हैं।

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान ईश्वर का स्मरण करना, ध्यान लगाना और सात्विक विचारों में लीन रहना सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। इस दौरान मन को शांत रखकर भगवान की आराधना करने से आध्यात्मिक एकाग्रता में वृद्धि होती है। कई श्रद्धालु इस विशेष समय में भगवान शिव, भगवान विष्णु या अपने आराध्य देव के पंचाक्षर या षडक्षर मंत्रों का जाप करते हैं। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का सस्वर पाठ करना और हनुमान चालीसा पढ़ना भी बहुत फलदायी माना गया है। ग्रहण की अवधि समाप्त होने के बाद दूध, चावल, दही और सफेद वस्त्र जैसी चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करना ज्योतिषीय रूप से शुभ फल देता है।

खगोलीय विज्ञान के जानकारों के अनुसार, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा तीनों एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी की परछाई उपग्रह चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण की स्थिति बनती है। आगामी 28 अगस्त को लगने वाला यह ग्रहण एक आंशिक चंद्र ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा का एक बहुत बड़ा हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया के आगोश में आएगा। इसी वजह से चांद का वह हिस्सा लाल या तांबे की चमक जैसा दिखाई देगा, जो इसे एक अद्भुत खगोलीय नजारा बनाता है।

सवाल-जवाब

साल 2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण कब लगेगा?
साल 2026 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा के दिन लगेगा।
क्या रक्षाबंधन के पर्व पर चंद्र ग्रहण का कोई प्रभाव पड़ेगा?
नहीं, चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए रक्षाबंधन के पर्व पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा और सूतक भी मान्य नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण की कुल अवधि कितनी होगी?
इस चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट की होगी, जिसकी शुरुआत सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर होगी।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा का कितना हिस्सा ढंकेगा?
इस आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढंक जाएगा।
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