अमेठी जिले के ग्रामीण इलाकों में गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न बांटने की जिम्मेदारी अन्नपूर्णा भवन संचालकों यानी कोटेदारों के कंधों पर होती है। ये संचालक पात्र परिवारों तक राशन पहुंचाने का काम करते हैं, लेकिन शुरुआती दौर में इनकी आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी। पहले इन्हें हर एक क्विंटल राशन वितरण के एवज में बहुत ही मामूली राशि मिलती थी, जो न केवल उनके काम के लिहाज से बहुत कम थी बल्कि उनके आत्मसम्मान और मुनाफे के भी अनुकूल नहीं थी। अब शासन स्तर पर लिए गए फैसलों के बाद इन्हें एक संतोषजनक और बेहतर मानदेय मिलने लगा है।
अमेठी में राशन वितरण व्यवस्था और लाभ्रेार्थियों का दायरा
अगर पूरे जिले की बात की जाए, तो यहां मुफ्त राशन बांटने वाली दुकानों का नेटवर्क काफी बड़ा है। जिले के तमाम हिस्सों में लाखों की संख्या में आम लोग इन दुकानों से मिलने वाले खाद्यान्न का लाभ उठाते हैं। हालांकि, इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालने वाले कोटेदारों को अतीत में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मेहनताना बेहद कम होने के कारण उन्हें कई मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा। अपनी आर्थिक दशा सुधारने के लिए उन्होंने लगातार आवाज उठाई, कई बार धरने-प्रदर्शन और आंदोलन किए तथा अपनी मांगों का ज्ञापन शासन तक पहुंचाया। इन लंबी लड़ाइयों और इंतजार के बाद आखिरकार सरकार ने उनकी सुध ली है और अब उन्हें प्रति क्विंटल 125 रुपये का सम्मानजनक मानदेय दिया जा रहा है, जिससे उनकी स्थिति सुधरी है।
कोटेदारों का संघर्ष और पुरानी यादें
स्थानीय स्तर पर धरातल पर काम करने वाले कोटेदारों ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि पहले हालात कितने बदतर थे। हनुमंत प्रसाद पांडे नामक कोटेदार ने खुशी जाहिर करते हुए साझा किया कि एक समय ऐसा था जब उन्हें महज 6 रुपये या फिर 12 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मानदेय मिलता था। इस मामूली रकम से घर चलाना और दुकान का खर्च निकालना असंभव था, जिसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष और कई आंदोलन किए। इसी तरह जामों ब्लॉक के एक अन्य कोटेदार ने बताया कि वह साल 2018 से इस काम से जुड़े हैं। उनका मानना है कि जब सभी साथियों का भला होता है, तो उन्हें भी खुशी मिलती है। इस नई पहल से उनका व्यवसाय और अधिक मजबूत होगा तथा वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपना कार्य करेंगे।
इटौंजा पश्चिम गांव के कोटेदार की जुबानी
इटौंजा पश्चिम गांव के एक कोटेदार ने बताया कि इस बेहतर मानदेय की आस में उन्होंने वर्षों तक इंतजार किया। लगातार विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगाने के बाद कहीं जाकर उनकी मांगें पूरी हो सकीं। कोटेदारों को यह भी जानकारी मिली है कि शासन स्तर पर इस राशि को भविष्य में और बढ़ाया जा सकता है और इसे करीब 150 रुपये तक किया जा सकता है। यदि यह राशि और बढ़ती है, तो उन्हें और अधिक आर्थिक संबल मिलेगा। फिलहाल सभी कोटेदार ई-पॉस मशीन प्रणाली के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ राशन बांट रहे हैं, और इस नए मानदेय मिलने से उनका मनोबल काफी ऊंचा हुआ है।
जिला प्रशासन का पक्ष और भविष्य की योजनाएं
इस पूरे मामले पर जिला पूर्ति अधिकारी शशिकांत ने जानकारी देते हुए कहा कि अन्नपूर्णा भवन के संचालकों के लिए यह बढ़ी हुई राशि बेहद मददगार साबित होगी। अधिकारियों का भी यह मानना है कि अतीत में इन दुकान संचालकों को तमाम तरह की दिक्कतों और संघर्षों का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब इस बदलाव से उन्हें काफी राहत मिलेगी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि शासन की ओर से जैसे-जैसे नए दिशा-निर्देश प्राप्त होंगे, कोटेदारों के हित में पूरी मुस्तैदी से काम किया जाएगा।


















