सिनेमा जगत के सबसे चर्चित दंपतियों में शुमार अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के रिश्ते का सफर दशकों बीतने पर भी दर्शकों के बीच बेहद चाव से सुना जाता है। रूपहले पर्दे पर साथ अभिनय करते हुए दोनों के बीच पनपा तालमेल धीरे-धीरे अटूट रिश्ते में तब्दील हो गया था। आधुनिक दौर में विवाह समारोहों के लिए महीनों पहले से चलने वाली विस्तृत तैयारियों, पोशाकों के चयन और लंबी बैठकों के विपरीत इस मशहूर जोड़ी का ब्याह बिल्कुल अलग परिस्थितियों में संपन्न हुआ था। कौन बनेगा करोड़पति 18 के मंच पर पहुंचे अभिनेता ने स्पष्ट किया कि उनका वैवाहिक निर्णय किसी पूर्व नियोजित योजना का परिणाम नहीं, बल्कि एक त्वरित घटनाक्रम था।
मंच पर प्रतियोगी के सवाल से खुला पुराना संदूक
रियलिटी गेम शो के दौरान कोलकाता निवासी प्रतिभागी अहेली रॉय ने दिग्गज अभिनेता से उनके निजी जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प सवाल पूछा। प्रतिभागी यह जानने को उत्सुक थीं कि वैवाहिक बंधन में बंधने से पूर्व उन्होंने जया के परिजनों को रजामंद करने के लिए क्या प्रयास किए थे और अपनी सास की स्वीकृति हासिल करने का उनका क्या तरीका रहा था।
बिना औपचारिकता का अनूठा प्रस्ताव
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए अभिनेता ने बताया कि उन्होंने ससुराल पक्ष से औपचारिक रूप से कोई विस्तृत संवाद नहीं किया था। उनके अनुसार, उन्होंने एक साधारण क्षण में बिना किसी दिखावे के जया के सम्मुख विवाह का विचार रखा था। इस सामान्य से प्रस्ताव पर जया ने तुरंत अपनी सहमति दे दी, जिसके बाद दोनों ने जीवनसाथी बनने का संकल्प ले लिया। इस महत्वपूर्ण सहमति के पश्चात दोनों ने किसी अन्य व्यक्ति से लंबा विचार-विमर्श नहीं किया।
माता-पिता की त्वरित रजामंदी और विवाह का फैसला
आपसी सहमति बनने के बाद जया ने अपने माता-पिता से संपर्क साधा और उन्हें अपने सम्मिलित निश्चय से अवगत कराया। अमिताभ ने मुस्कुराते हुए साझा किया कि जया ने अपने अभिभावकों से क्या बात कही कि वे तुरंत मान गए, यह बात आज तक उनके लिए एक सुखद रहस्य बनी हुई है। परिवार की ओर से स्वीकृति मिलते ही सभी संबंधी समारोह में भाग लेने आ पहुंचे। दोनों पक्षों में बहुत संक्षिप्त बातचीत हुई और अगले ही दिन दोनों ने रस्में पूरी कर लीं।
भव्य तड़क-भड़क के मुकाबले आत्मीयता को प्राथमिकता
समकालीन शादियों में दिखने वाली लंबी औपचारिकताओं पर अपने विचार रखते हुए अभिनेता ने सादगी का महत्व रेखांकित किया। उनके मुताबिक, महीनों पूर्व से विशेष तिथियों की तलाश करना, भारी-भरकम पोशाकें जुटाना और विभिन्न शहरों में दौड़-धूप करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि जब दो व्यक्ति अंतर्मन से एक-दूसरे को अपना चुके हों, तो औपचारिक आयोजनों से अधिक महत्व दोनों के आपसी समर्पण का होता है।
जंजीर की कामयाबी और लंदन जाने की पूर्व शर्त
दोनों कलाकारों ने 3 जून 1973 को एक साधारण समारोह में विवाह रचाया था। कई परियोजनाओं में साथ काम करते हुए दोनों का जुड़ाव गहरा हुआ था, जिसमें ब्लॉकबस्टर फिल्म जंजीर ने मील के पत्थर की भूमिका निभाई। फिल्म की अपार सफलता का उत्सव मनाने के लिए दोनों कलाकार अपने करीबी मित्रों की टोली के साथ लंदन यात्रा पर जाने की रूपरेखा तैयार कर रहे थे।
इसी बीच जाने-माने साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन ने अपने पुत्र के समक्ष एक स्पष्ट शर्त रखी। उन्होंने कहा कि जया के साथ विदेश यात्रा पर जाने की अनुमति तभी मिल सकती है जब दोनों पहले विधिपूर्वक परिणय सूत्र में बंध जाएं। पिता के इस स्पष्ट निर्देश ने दोनों के विवाह की गति को अप्रत्याशित रूप से तेज कर दिया।
अक्टूबर की मूल योजना में हुआ बदलाव
बाद के वर्षों में जया बच्चन ने उजागर किया था कि उनकी प्रारंभिक योजना अक्टूबर के महीने में शादी करने की थी। हालांकि विदेशी दौरे की योजना बनने की वजह से वैवाहिक तिथि को पहले खिसकाना पड़ा। निर्धारित लंदन यात्रा से महज कुछ रोज पूर्व यह सादा आयोजन पूरा हुआ और दोनों अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत करते हुए विदेश के लिए रवाना हो गए।


















