हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता रजा मुराद ने अपने दिवंगत पिता और मशहूर कलाकार मुराद के 115वें जन्मदिन के मौके पर एक दिल छू लेने वाला संदेश साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पुरानी दुर्लभ तस्वीर पोस्ट करते हुए उन्होंने अपने बचपन के दिनों और पिता के कड़े संघर्ष को याद किया। इस विंटेज तस्वीर में फॉर्मल सूट पहने मुराद कैमरे की ओर मुस्कुराते नजर आ रहे हैं, जबकि उनकी गोद में नन्हे रजा मुराद बैठे हुए हैं।
पिता की 115वीं जयंती पर भावुक संदेश
इस तस्वीर को साझा करते हुए रजा मुराद ने लिखा कि 24 सितंबर 1911 को जन्मे उनके पिता मुराद का आज 115वां जन्मदिन है, और तस्वीर में पिता की गोद में बैठा छोटा बच्चा कोई और नहीं बल्कि वे खुद हैं। पिता के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे आज जिस मुकाम पर भी हैं, वह सब उनके पिता की कड़ी मेहनत और उनके आशीर्वाद की बदौलत ही संभव हुआ है।
रजा मुराद ने परिवार के लालन-पालन में पिता की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए लिखा कि पूरे घर में कमाने वाले वे अकेले इंसान थे, इसलिए उन्होंने परिवार को पालने के लिए अकेले ही लंबा संघर्ष झेला। उन्होंने यह भी लिखा कि 40, 50 और 60 के दशक के लोकप्रिय अभिनेता रहे मुराद को उनका पूरा परिवार और लाखों चाहने वाले हमेशा शिद्दत से याद रखेंगे।
हामिद अली मुराद से स्क्रीन का रुतबा
सिनेमा जगत में मुराद नाम से पहचान बनाने वाले इस दिग्गज कलाकार का वास्तविक नाम हामिद अली मुराद था। भारतीय फिल्म उद्योग में उन्हें एक बेहद सम्मानित चरित्र अभिनेता का दर्जा हासिल था। ब्रिटिश हुकूमत के दौर से अपने अभिनय का आगाज करने की वजह से उन्हें अंग्रेजों के जमाने का कलाकार भी कहा जाता था। उनका सिनेमाई सफर 1940 से 1980 के दशक तक लगभग तीन दशकों तक अनवरत चला, जिस दौरान उन्होंने 200 से अधिक फिल्मों में अपनी अदाकारी की छाप छोड़ी।
रौबदार भूमिकाओं में छोड़ी गहरी छाप
मुराद ने अपने तीन दशक लंबे फिल्मी करियर में अधिकतर रौबदार और गरिमामयी सपोर्टिंग भूमिकाएं निभाईं। बड़े पर्दे पर वे अक्सर राजा, जमींदार, कड़क पुलिस अफसर, निष्पक्ष जज और पिता के किरदारों में नजर आते थे। उनके अभिनय से सजी प्रमुख फिल्मों में 1946 की 'अनमोल घड़ी', 1949 की 'अंदाज', 1952 की 'आन', 1953 की 'दो बीघा जमीन', 1955 की 'देवदास', 1958 की 'यहूदी', 1960 की क्लासिक 'मुगल-ए-आजम', 1963 की 'ताजमहल', 1973 की 'यादों की बारात' और 1978 की 'गंगा की सौगंध' शामिल हैं।
यादगार किरदार और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा
निर्देशक बिमल रॉय की कालजयी फिल्म 'दो बीघा जमीन' में मुराद द्वारा निभाया गया जमींदार ठाकुर हरनाम सिंह का किरदार आज भी मील का पत्थर माना जाता है। वहीं फिल्म 'देवदास' में उन्होंने मुख्य नायक के पिता की भूमिका निभाई थी, जबकि निर्देशक के. आसिफ की भव्य ऐतिहासिक कृति 'मुगल-ए-आजम' में वे राजा मान सिंह के प्रभावशाली रोल में दिखे थे। इसके अलावा उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी काम किया और 1962 की हॉलीवुड फिल्म 'टार्जन गोज टू इंडिया' में एक महाराजा का किरदार अदा किया था। भारतीय सिनेमा को समृद्ध करने वाले इस दिग्गज कलाकार का अप्रैल 1997 में मुंबई में निधन हो गया था।



















