भारतीय सिनेमा में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब स्थापित अभिनेत्रियों ने अपने करियर के सबसे सफल दौर में पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दी। रानी मुखर्जी, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी मशहूर अदाकारों ने विवाह और मां बनने के बाद फिल्मों से दूरी बनाई और बाद में शानदार वापसी की। इसी क्रम में जया बच्चन का नाम भी बेहद प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्होंने विवाह के उपरांत अपने अभिनय करियर को एक लंबा विराम देकर अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों को पहली प्राथमिकता बनाया।
स्टारडम के शिखर पर करियर को विराम
3 जून 1973 को अमिताभ बच्चन के साथ परिणय सूत्र में बंधने से पहले जया बच्चन हिंदी फिल्म जगत की एक बेहद लोकप्रिय और सराही गई अभिनेत्री थीं। उनके पास अभिनय क्षमता, स्क्रीन प्रेजेंस और कई बड़ी फिल्मों के प्रस्ताव मौजूद थे। हालांकि, शादी के बाद उनकी जीवन शैली और प्राथमिकताओं में बदलाव आने लगा। जब उनके घर में बच्चों का आगमन हुआ, तो उन्होंने अपनी अभिनय यात्रा को सीमित करने का फैसला किया।
सिनेमा जगत में इस तरह के निर्णय लेना आसान नहीं होता, विशेषकर तब जब कोई कलाकार अपने करियर की बुलंदियों पर हो। श्रीदेवी और रानी मुखर्जी ने भी मां बनने के बाद अपनी घरेलू प्राथमिकताओं को संभाला और बाद में जब पर्दे पर वापसी की, तो अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल फिर जीत लिया। जया बच्चन के जीवन में भी शादी के बाद परिवार ही उनकी जीवन यात्रा का केंद्र बिंदु बन गया।
17 वर्षों की लंबी दूरी और 1998 में वापसी
अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के दो बच्चे, अभिषेक बच्चन और श्वेता बच्चन हैं। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए जया बच्चन ने बड़े पर्दे से एक लंबा ब्रेक लिया। यह अंतराल कोई छोटा समय नहीं था, बल्कि वह लगभग 17 वर्षों तक हिंदी सिनेमा से दूर रहीं।
जिस दौर में वह लगातार एक के बाद एक बड़ी फिल्मों में काम कर सकती थीं, उस दौरान उन्होंने अपने घर की जिम्मेदारियां संभालीं। वर्षों के इस लंबे अंतराल के बाद, उन्होंने आखिरकार 1998 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'हजार चौरासी की मां' के माध्यम से बड़े पर्दे पर एक सशक्त वापसी की। हालांकि, यह 17 साल की दूरी उनके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रही।
अमिताभ बच्चन का आभार और पूजा सामंत का संस्मरण
पत्रकार पूजा सामंत ने एक बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन के साथ हुए अपने एक पुराने संवाद को साझा किया था। इस संस्मरण के अनुसार, अमिताभ बच्चन अपनी सफलता में अपनी पत्नी जया बच्चन के योगदान को बहुत बड़ा मानते थे। उन्होंने यह स्वीकार किया था कि वह जीवन में जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसमें उनकी पत्नी का बहुत बड़ा सहयोग रहा है।
अमिताभ बच्चन का कहना था कि जब वे दिन-रात लगातार शूटिंग और काम में व्यस्त रहते थे, उस समय जया ने अपने सपनों और करियर को पीछे रखकर दोनों बच्चों की देखभाल की। उन्होंने बच्चों में अच्छे संस्कार डाले और पूरे घर को संभाला। अमिताभ बच्चन ने माना कि वे बिना किसी चिंता के अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सके और सफलता हासिल कर पाए, क्योंकि जया बच्चन उनके साथ मजबूती से खड़ी थीं।
टिफिन बॉक्स में छोटी चिट्ठियों की अनूठी कहानी
व्यस्त दिनचर्या के बावजूद परिवार से जुड़े रहने का एक अनूठा तरीका जया बच्चन ने खोज निकाला था। पूजा सामंत द्वारा साझा किए गए किस्से के मुताबिक, जया अक्सर अमिताभ बच्चन के टिफिन बॉक्स में एक छोटी सी चिट्ठी रख दिया करती थीं।
इन छोटी चिट्ठियों के जरिए वे अमिताभ को घर-परिवार की रोजमर्रा की बातें बताया करती थीं। अगर कभी अभिषेक की तबीयत खराब होती, तो चिट्ठी में लिखा होता था कि संभव हो तो काम खत्म कर जल्दी घर आ जाएं। कभी बच्चों के स्कूल से जुड़े किसी कार्यक्रम की याद दिलाई जाती थी। इस तरह, शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के बीच भी अमिताभ बच्चन अपने परिवार से लगातार जुड़े रहते थे।



















