बिहार के जमुई जिले में दसवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ हुई घिनौनी हरकत के बाद पूरे देश में रोष देखा जा रहा है। 19 सितंबर को एक स्थानीय पर्यटक स्थल से वापस लौटते समय दसवीं के दो विद्यार्थियों को कुछ उपद्रवियों ने रास्ते में घेर लिया था। हमलावरों ने अभद्र टिप्पणियां कीं, छात्र को थप्पड़ मारे और मदद की गुहार लगा रही छात्रा के साथ बेहद शर्मनाक दुर्व्यवहार किया। इस स्तब्ध करने वाले मामले को लेकर राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और प्रशासन दबाव में है। इसी बीच अलीनगर विधानसभा क्षेत्र की विधायक मैथिली ठाकुर ने एक बयान जारी कर कहा कि यह घटना राज्य की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान नहीं लगाती। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे बिहार की बेटी हैं और उन्हें यहां पूरी तरह सुरक्षित महसूस होता है।
विधायक के बयान पर लेखक नीरज पांडे का पलटवार
अलीनगर की विधायक के इस बयान के सामने आते ही कई लोगों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। 'मिसेज', 'रामप्रसाद की तेहरवीं' और 'हैप्पी पटेल' जैसी चर्चित फिल्मों के लेखक नीरज पांडे ने इस टिप्पणी पर गहरा असंतोष जाहिर किया है। नीरज पांडे ने बुधवार 23 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत नोट साझा करते हुए कहा कि किसी एक व्यक्ति का अनुभव पूरे राज्य की हकीकत तय नहीं कर सकता। उन्होंने लिखा कि अगर किसी को सुरक्षा महसूस होती है तो यह अच्छी बात है, परंतु राज्य की परिस्थितियां हर नागरिक के लिए एक समान नहीं रही हैं। वहां परवरिश पाने वाले हर व्यक्ति को ऐसा सकारात्मक अनुभव साझा करने का अवसर नहीं मिला है।
व्यक्तिगत अनुभवों का हवाला और सुरक्षा पर सवाल
बिहार के बक्सर जिले से ताल्लुक रखने वाले नीरज पांडे ने अपने गृह राज्य के सामाजिक माहौल पर खुलकर बात की। उन्होंने अपने बचपन और युवावस्था के दौर को याद करते हुए लिखा कि बिहार में बड़े होने के दौरान उन्होंने कभी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं किया। उन्होंने साझा किया कि एक पुरुष होने के बावजूद कई अवसरों पर उनकी शारीरिक सीमाओं का उल्लंघन किया गया। पांडे के अनुसार, किसी व्यक्ति का निजी आराम या विशेषाधिकार पूरे समाज के सामूहिक अनुभवों का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता। किसी भी क्षेत्र या राज्य की वास्तविक स्थिति का आकलन उन लोगों के अनुभवों से होना चाहिए जिन्होंने वहां गंभीर संकट और प्रताड़ना झेली हो, और उन्होंने स्वयं ऐसी विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है।
जमुई की घटना और सामाजिक यथार्थ
जमुई में हुई घटना को किसी एक मामले तक सीमित मानने से इनकार करते हुए लेखक ने कहा कि समाज की सच्चाई जाननी है तो उस पीड़िता से पूछना चाहिए जिसने इस दर्दनाक हादसे को झेला है। उन्होंने रेखांकित किया कि जमुई का यह अपराध कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि प्रदेश की किसी भी लड़की से पूछने पर जमीनी हकीकत समझ आ जाएगी। नीरज पांडे ने जोर देकर कहा कि इंसान की जन्मभूमि हमेशा किसी परियों की कहानी जैसी सुखद नहीं होती, बल्कि यह कई बार ऐसे गहरे सदमे और आघात का केंद्र भी बन जाती है जिसे लोग जीवन भर अपने साथ ढोते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके साथ जो कुछ भी बीता, उसे वे एक दिन विस्तार से लिखेंगे। जमुई के इस घिनौने अपराध को लेकर इस समय देश भर के लोगों में भारी गुस्सा बना हुआ है।



















