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कव्वाली के घराने में जन्मे शबाब साबरी ने कैसे बॉलीवुड में बनाई अपनी अलग पहचानबॉलीवुड
6 जुल॰ 2026, 4:12 am (25 दिन पहले)· 3

कव्वाली के घराने में जन्मे शबाब साबरी ने कैसे बॉलीवुड में बनाई अपनी अलग पहचान

सहारनपुर के मशहूर कव्वाली घराने में जन्मे शबाब साबरी ने पिता के निधन के बाद मुंबई में संघर्ष किया और फिल्म दबंग के गाने हमका पीनी है से बॉलीवुड में बड़ी पहचान बनाई।

बॉलीवुड में जब भी सूफी अंदाज़ और कव्वाली की मिठास घुली हुई कोई धुन बजती है, तो श्रोता खुद-ब-खुद झूम उठते हैं। हिंदी सिनेमा को ऐसी कई यादगार धुनें देने वाले पार्श्वगायक शबाब साबरी की पहचान आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। अपनी बुलंद और मखमली आवाज से लाखों श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले शबाब साबरी का जन्म 6 जुलाई 1979 को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर सहारनपुर में हुआ था।

संगीत जो विरासत में मिला

शबाब साबरी उस परिवार से आते हैं जिसकी रगों में सुर और संगीत दौड़ता है। उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और उनके चाचा उस्ताद अफजल साबरी देश के सबसे सम्मानित सूफी और कव्वाली गायकों में शुमार थे। यही वह घराना है जिसने ‘भर दो झोली मेरी’ जैसी कालजयी और सदाबहार कव्वाली को दुनियाभर के मंचों तक पहुंचाकर सूफी संगीत को एक नई पहचान दी थी। संगीत से भरे ऐसे माहौल में पले-बढ़े शबाब का रुझान बचपन से ही गायकी की ओर था, लेकिन परिवार शुरुआत में उन्हें संगीत की दुनिया के संघर्ष और अनिश्चितता से दूर रखना चाहता था। परिवार को डर था कि इस फील्ड में स्थिरता आसान नहीं होती। लेकिन जब घरवालों ने शबाब की अटूट लगन और उनकी सुरीली आवाज को करीब से देखा, तो उन्होंने उन्हें शास्त्रीय संगीत की विधिवत ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया।

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14 साल की उम्र में शुरू हुआ संगीत का सफर

महज 14 साल की उम्र में शबाब साबरी ने रामपुर सहसवान घराने के मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद राशिद खान से संगीत की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। यही कठिन और अनुशासित प्रशिक्षण आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ी पहचान बना। शिक्षा पूरी करने के बाद शबाब ने अपने पिता के साथ देश और विदेश के कई लाइव शो और कव्वाली कॉन्सर्ट में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने मंच पर प्रस्तुति देने का हुनर सीखा और अपनी गायकी को निखारा।

पिता के निधन के बाद मुंबई पहुंचा परिवार

पिता के असमय निधन के बाद शबाब साबरी का पूरा परिवार मुंबई आ गया। मायानगरी में शबाब के लिए शुरुआती दौर आसान नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी शास्त्रीय गायकी को फिल्मी गानों के सांचे में ढालने की कोशिशें शुरू कर दीं और मौके की तलाश में जुटे रहे।

दबंग के गाने ने बदल दी किस्मत

साल 2010 में शबाब की मेहनत रंग लाई, जब मशहूर संगीतकार जोड़ी साजिद वाजिद ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने शबाब को सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दबंग’ में ‘हमका पीनी है’ गाना गाने का मौका दिया। रिलीज होते ही यह गाना हर पार्टी और शादी की जान बन गया और शबाब रातोंरात बॉलीवुड में मशहूर हो गए। शबाब साबरी हमेशा अभिनेता सलमान खान और संगीतकार साजिद वाजिद को अपने करियर का गॉडफादर मानते हैं और अपनी इस बड़ी सफलता का श्रेय उन्हीं को देते हैं।

सलमान खान की फिल्मों में जारी रहा जादू

‘हमका पीनी है’ की कामयाबी के बाद शबाब ने सलमान खान की ही फिल्म ‘जय हो’ (2014) का बेहद रोमांटिक गाना ‘तेरे नैना मार ही डालेंगे’ गाया। इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘वीर’ (2010) में ठुमरी अंदाज़ का गाना ‘पवन उड़ावे बतिया’ गाकर यह साबित कर दिया कि वे रोमांटिक धुनों से लेकर पारंपरिक अंदाज़ तक, हर तरह की गायकी में उतने ही माहिर हैं।

अन्य सितारों के लिए भी गाए सुपरहिट गाने

सलमान खान के अलावा शबाब साबरी ने कई और बड़े कलाकारों के लिए भी हिट गाने गाए। उन्होंने जॉन अब्राहम की फिल्म ‘वेलकम बैक’ (2015) का चर्चित गाना ‘नस नस में’ गाया, जिसे नसीरुद्दीन शाह और अनिल कपूर जैसे दिग्गज अभिनेताओं पर फिल्माया गया था। इसके अलावा उन्होंने संगीतकार प्रीतम के साथ फिल्म ‘एजेंट विनोद’ का गाना ‘दिल मेरा मुफ्त का’ गाया, तो वहीं संगीतकार हिमेश रेशमिया के संगीत निर्देशन में फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ का रूहानी गाना ‘जलते दिए’ गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इन गानों की फेहरिस्त बताती है कि शबाब की आवाज़ सिर्फ एक अंदाज़ तक सीमित नहीं, बल्कि रोमांस, भक्ति और परंपरा तीनों में समान रूप से असरदार रही है।

सवाल-जवाब

शबाब साबरी का जन्म कब और कहां हुआ था?
उनका जन्म 6 जुलाई 1979 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में हुआ था।
शबाब साबरी को संगीत की ट्रेनिंग किससे मिली?
उन्होंने 14 साल की उम्र में रामपुर सहसवान घराने के उस्ताद राशिद खान से शास्त्रीय संगीत सीखा।
शबाब साबरी के पिता और चाचा कौन थे?
उनके पिता स्वर्गीय मोहम्मद इकबाल साबरी और चाचा उस्ताद अफजल साबरी मशहूर सूफी और कव्वाली गायक थे।
शबाब साबरी को बॉलीवुड में बड़ी पहचान किस गाने से मिली?
साल 2010 में फिल्म ‘दबंग’ के गाने ‘हमका पीनी है’ से उन्हें बड़ी पहचान मिली।
शबाब साबरी ने सलमान खान की और किन फिल्मों में गाने गाए?
उन्होंने ‘जय हो’ (2014) का ‘तेरे नैना मार ही डालेंगे’ और ‘वीर’ (2010) का ‘पवन उड़ावे बतिया’ गाया।
शबाब साबरी ने किन अन्य कलाकारों के लिए गाने गाए?
उन्होंने जॉन अब्राहम की फिल्म ‘वेलकम बैक’ का गाना ‘नस नस में’ गाया, जो नसीरुद्दीन शाह और अनिल कपूर पर फिल्माया गया था।
शबाब साबरी अपने करियर का श्रेय किसे देते हैं?
वे सलमान खान और संगीतकार जोड़ी साजिद वाजिद को अपने करियर का गॉडफादर मानते हैं।
पिता के निधन के बाद शबाब साबरी का परिवार कहां गया था?
पिता के असमय निधन के बाद उनका पूरा परिवार मुंबई आ गया था।
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