भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत केवल सुने नहीं जाते, बल्कि वे इंसान की रूह में उतरकर गहरा सुकून पहुंचाते हैं। फिल्म वेक अप सिड का चर्चित गीत इकतारा ऐसा ही एक संगीतमय तोहफा है, जो श्रोताओं को हर बार एक नए ताजगी भरे सफर पर ले जाता है। जब यह गाना बजता है, तो मन की तमाम उलझने खत्म हो जाती हैं और एक सुखद अहसास दिलों को छू लेता है। यही वजह है कि रिलीज के लंबे समय बाद भी यह नगमा लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना हुआ है।
संगीत और गायकी का अद्भुत संगम
इस गीत की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और गायकी की गहराई है। गायिका कविता सेठ की रूहानी आवाज ने इसमें जान फूंक दी है। उनकी गायकी में एक खास तरह का ठहराव और ईमानदारी नजर आती है, जो सीधे श्रोता के दिल से जुड़ती है। वहीं संगीतकार अमित त्रिवेदी के धुन संयोजन ने इस नगमे को बेहद खास बना दिया है। इसके साथ ही जावेद अख्तर के कलम से निकले संवेदनशील बोल प्यार, आकांक्षाओं और जिंदगी के अनछुए पहलुओं को बेहद सहजता से पिरोते हैं।
रणबीर कपूर और कोंकणा सेन शर्मा का सादगी भरा अंदाज
पर्दे पर इस गाने का प्रस्तुतीकरण भी उतना ही शानदार है जितना कि इसका संगीत। अभिनेता रणबीर कपूर और अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा पर फिल्माया गया यह दृश्य सादगी और सपनों की खूबसूरती को दर्शाता है। दोनों कलाकारों के बीच की सहज केमिस्ट्री और स्वाभाविक अभिनय ने गाने के हर एक पल को जीवंत बना दिया है। शहर की भागदौड़ के बीच दो अलग-अलग किरदारों की आत्मीयता को इसमें बेहद खूबसूरती से उभारा गया है।
हर दौर की प्लेलिस्ट में बनी खास जगह
समय बदलने के साथ संगीत के नए दौर आए, लेकिन इकतारा का जादू कभी कम नहीं हुआ। आज भी चाहे कोई शांत शाम बितानी हो या फिर पुराने दिनों की यादों को संजोना हो, संगीत प्रेमी इस गाने को सुनना पसंद करते हैं। सुलगते और बेचैन दिलों को राहत देने की जो क्षमता इस रचना में है, वही इसे भारतीय संगीत की सबसे पसंदीदा और कालजयी कृतियों में शामिल करती है।



















