सिनेमा के शौकीनों के लिए फिल्मों में दिखने वाली वास्तविक लोकेशंस हमेशा से एक खास आकर्षण रही हैं। निर्देशक आदित्य धर की जासूसी थ्रिलर 'धुरंधर' की जबर्दस्त बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद अब लद्दाख की वादियों में स्थित एक साधारण खानपान की दुकान प्रशंसकों के लिए तीर्थ जैसी बन गई है। बड़े पर्दे पर जिस जगह को 'वाश्मा बट' नाम की चाय और बिरयानी शॉप के तौर पर दिखाया गया था, वह असल जिंदगी में लेह के व्यस्त मॉल रोड पर स्थित है। फिल्म के मुख्य किरदारों हमजा और आलम के बीच की गोपनीय बातचीत और रणनीति वाले दृश्यों की वजह से यह ठिकाना अब पर्यटकों के बीच 'धुरंधर कैफे' के रूप में मशहूर हो चुका है।
लेह के मॉल रोड से जुड़ा फिल्मी सफर
फिल्म निर्माण से पहले इस प्रतिष्ठान को एसएच खान रेस्टोरेंट के नाम से जाना जाता था। जब आदित्य धर की टीम ने लेह मार्केट में शूटिंग की योजना बनाई, तो पटकथा की मांग के अनुसार इस रेस्टोरेंट को एक पारंपरिक कश्मीरी भोजनालय 'वाश्मा बट' का स्वरूप दिया गया। कहानी के भीतर रणवीर सिंह द्वारा अभिनीत किरदार हमजा और गौरव गेरा द्वारा निभाया गया आलम इसी दुकान के एक कोने में बैठकर कई महत्वपूर्ण चर्चाएं करते नजर आते हैं। जब फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई, तो लद्दाख घूमने जाने वाले दर्शकों ने तुरंत इस लोकेशन को पहचान लिया। इसके बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस दुकान की क्लिप्स और तस्वीरें तेजी से प्रसारित होने लगीं, जिससे यहां आने वाले सैलानियों का तांता लग गया।
हरे रंग की दीवारें और फिल्म के किरदारों की यादें
दुकान के संचालक सोहेल अली ने फिल्म की भारी लोकप्रियता को देखते हुए शूटिंग के लिए तैयार किए गए पूरे लुक को वैसे ही सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। जब शूटिंग चल रही थी, तब केवल स्थानीय निवासी अभिनेताओं की एक झलक पाने के लिए जमा होते थे, लेकिन अब देश के कोने-कोने से आने वाले पर्यटक खासतौर पर इस जगह को देखने पहुंच रहे हैं। कैफे के भीतर कदम रखते ही दर्शकों को स्क्रीन पर दिखे माहौल का सीधा अहसास होता है। दुकान की विशिष्ट हरी दीवारों को जस का तस रखा गया है। इसके अलावा दीवारों पर रणवीर सिंह और गौरव गेरा के किरदारों की तस्वीरें तथा फिल्म से जुड़े विशेष पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे पूरा वातावरण फिल्म के दृश्यों को जीवंत कर देता है।
पचास रुपये का टोकन और किरदारों के गेटअप में तस्वीरें
इस प्रतिष्ठान की सबसे अनोखी व्यवस्था यह है कि यहां हर आने वाले व्यक्ति के लिए भोजन या पेय पदार्थ ऑर्डर करना अनिवार्य नहीं है। जो लोग केवल फिल्म की लोकेशन देखने और तस्वीरें लेने के उद्देश्य से आते हैं, वे पचास रुपये का प्रवेश शुल्क देकर अंदर जा सकते हैं। इस अनुभव को और अधिक मनोरंजक बनाने के लिए संचालक ने हमजा और आलम के किरदारों से प्रेरित विग और पोशाकें भी उपलब्ध कराई हैं। आगंतुक इन परिधानों को पहनकर बाकायदा फिल्म के किरदारों जैसा लुक अपनाते हैं और सोशल मीडिया रील तथा वीडियो शूट करते हैं। सोहेल अली का कहना है कि लोग कुछ पलों के लिए पर्दे के उन जासूस किरदारों के जीवन को महसूस करना चाहते हैं और यह सेटअप उन्हें वही अहसास देता है।
नाश्ते के व्यंजन और विशेष धुरंधर चाय
खानपान के शौकीनों के लिए भी यहां का मेन्यू काफी विविधतापूर्ण और किफायती रखा गया है। सुबह के समय पर्यटकों को गरमा-गरम पराठे, ऑमलेट, मैगी और रेमन जैसे विकल्प परोसे जाते हैं। दोपहर के भोजन के समय शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के ग्राहकों का ध्यान रखते हुए वेज थाली, चिकन थाली और पारंपरिक राजमा-चावल उपलब्ध कराए जाते हैं। इन सबके बीच सबसे ज्यादा मांग चाय के विभिन्न विकल्पों की रहती है। मेन्यू में विशेष 'धुरंधर चाय' शामिल की गई है, जो फिल्म के प्रशंसकों की पहली पसंद बनी हुई है। इसके अलावा लद्दाख और कश्मीर की पारंपरिक संस्कृति से जुड़ी नमकीन चाय, कश्मीरी कहवा और ठंड से राहत देने वाली लेमन-जिंजर टी भी यहां परोसी जाती है।
दो भागों में रिलीज हुई फ्रेंचाइजी का असर
आदित्य धर की यह दो भागों वाली सिनेमाई गाथा दर्शकों के जेहन में गहराई से बस चुकी है। फ्रेंचाइजी का पहला भाग दिसंबर 2025 में बड़े पर्दे पर उतारा गया था, जबकि कहानी का दूसरा और निर्णायक हिस्सा मार्च 2026 में रिलीज हुआ। दोनों ही फिल्मों के किरदारों और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर दर्शकों में जबरदस्त दीवानगी देखने को मिली। उसी का परिणाम है कि लेह बाजार की एक सीधी-सादी दुकान आज सोशल मीडिया के दौर में एक नए पर्यटन स्थल में तब्दील हो चुकी है, जहां सैलानी अपनी यात्रा की सुनहरी यादें संजोने पहुंचते हैं।



















