हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित और भावुक रिश्तों में मधुबाला और दिलीप कुमार का दौर हमेशा याद किया जाता है। परदे पर उनकी केमिस्ट्री जितनी जादुई थी, असल जिंदगी में उनकी प्रेम कहानी उतनी ही अधूरी रह गई। दोनों के अलगाव को लेकर दशकों से कई तरह की बातें कही जाती रही हैं। हाल के दिनों में वरिष्ठ अभिनेत्री मुमताज ने यह दावा किया था कि दिलीप कुमार ने मधुबाला से दूरी इसलिए बना ली थी क्योंकि वह दिल के गंभीर रोग से पीड़ित थीं और कभी मां नहीं बन सकती थीं। इस तरह की बातों पर अब मधुबाला की सगी बहन मधुर भूषण ने अपनी बात रखी है और इन सभी दावों को सिरे से नकारते हुए साफ किया है कि रिश्ते के खत्म होने के काफी समय बाद तक किसी को इस बीमारी की खबर भी नहीं थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भावुक जानकारी भी साझा की कि मुंबई के जुहू मुस्लिम कब्रिस्तान में दोनों दिग्गज कलाकार एक-दूसरे से केवल 5 से 10 मीटर के फासले पर दफन हैं।
मुमताज के दावों पर बहन का स्पष्टीकरण
विक्की लालवानी के साथ बातचीत में मधुर भूषण ने दोनों कलाकारों के अलगाव के पूरे घटनाक्रम पर खुलकर बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी बहन की बीमारी को इस ब्रेकअप से जोड़ना पूरी तरह से बेबुनियाद है। मधुर के अनुसार, जब मधुबाला और दिलीप कुमार साथ थे, तब तक इस मेडिकल समस्या का कोई अंदेशा ही नहीं था। उन्होंने बताया कि यह एक लंबी दास्तान है और मुमताज का यह कहना कि दिलीप साहब ने बीमारी या बच्चे न होने की आशंका के कारण रिश्ता तोड़ा, सच्चाई से कोसों दूर है। मधुर का कहना था कि दिल की बीमारी का मामला काफी बाद के वर्षों में सामने आया था, और तब तक दिलीप कुमार उनकी जिंदगी से पूरी तरह अलग हो चुके थे।
पिता अताउल्लाह खान और दिलीप कुमार के बीच का तनाव
ऐतिहासिक फिल्म 'मुगल-ए-आजम' के निर्माण के दौरान साल 1957 में दोनों का यह गहरा रिश्ता हमेशा के लिए बिखर गया था। इस अलगाव की वास्तविक वजह मधुबाला के पिता अताउल्लाह खान और दिलीप कुमार के बीच उपजे गंभीर मतभेद थे। अताउल्लाह खान इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थे और दोनों के बीच पेशेवर स्तर पर भी टकराव शुरू हो गया था। दिलीप कुमार ने अपनी आत्मकथा 'द सब्सटेंस एंड द शैडो' में भी इस पहलू का स्पष्ट उल्लेख किया था। उन्होंने लिखा था कि अताउल्लाह खान एक नया फिल्म स्टूडियो स्थापित करना चाहते थे और उनकी योजना दिलीप कुमार तथा मधुबाला को अपनी कंपनी के मुख्य कलाकारों के रूप में अनुबंधित करने की थी। दिलीप कुमार को यह व्यावसायिक प्रस्ताव कतई स्वीकार्य नहीं था, जिससे दोनों पक्षों में कड़वाहट पैदा हो गई। यह तल्खी इतनी बढ़ गई कि 'मुगल-ए-आजम' के सेट पर शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार और मधुबाला के बीच बातचीत तक बंद हो चुकी थी। दिलीप कुमार ने अपनी पुस्तक में यह भी साफ लिखा था कि मधुबाला की शारीरिक बीमारी का उनके अलगाव से कोई वास्ता नहीं था।
सेट पर बिगड़ी सेहत और बीमारी का खुलासा
मधुबाला की स्वास्थ्य समस्याओं के शुरुआती दौर को याद करते हुए मधुर ने बताया कि पहली बार परेशानी कैमरे के सामने ही सामने आई थी। फिल्म 'बहुत दिन हुए' के काम के दौरान मधुबाला अचानक बेहोश हो गईं और उन्हें खून की उल्टियां हुईं। चिकित्सकीय परामर्श लेने पर उन्होंने सीने में भारी दर्द और बेचैनी की शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि अपनी बातचीत में मधुर ने एक जगह 1958 की फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' का भी जिक्र किया था, जबकि 'बहुत दिन हुए' साल 1954 में रिलीज हुई थी। इस कालखंड के अंतर पर मधुर ने खुद स्वीकार किया कि उस दौर में उनके पिता फिल्मों से जुड़ी बातों की ज्यादा जानकारी रखने की अनुमति नहीं देते थे, जिसके चलते फिल्मों के नामों और तारीखों को याद रखने में उनसे चूक हो सकती है। जब यह घटना हुई, तब मधुबाला चेन्नई में शूटिंग कर रही थीं और डॉक्टरों के कहने पर आगे की गंभीर जांच कराने के लिए तुरंत मुंबई लौट आईं।
बंबई में इलाज की सीमाएं और किशोर कुमार का साथ
मुंबई में गहन जांच के बाद डॉक्टरों ने पुष्टि की कि मधुबाला के दिल में जन्मजात छेद (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट) था। मधुर भूषण ने उस दौर की लाचारी बयां करते हुए बताया कि उस समय बॉम्बे में चिकित्सा विज्ञान इतना विकसित नहीं हुआ था कि कोई भी स्थानीय सर्जन इतने जटिल ऑपरेशन का जोखिम उठा सके। इस मुश्किल मोड़ तक मधुबाला और किशोर कुमार के बीच नजदीकियां बढ़ चुकी थीं। दोनों ने कई सफल फिल्मों में साथ अभिनय किया था और एक-दूसरे के करीब आ गए थे। जब इस गंभीर बीमारी की पुष्टि हुई, तब किशोर कुमार ने आगे बढ़कर मधुबाला से विवाह करने का फैसला किया और उन्हें बेहतर इलाज की उम्मीद में लंदन ले गए।
लंदन के डॉक्टरों का फैसला और मधुबाला का संघर्ष
लंदन पहुंचने पर वहां के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पूरी जांच की। मधुर के मुताबिक, एक बड़े डॉक्टर ने जांच के केवल पंद्रह मिनट बाद ही बेहद निराशाजनक फैसला सुना दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि दिल के छेद के कारण उनकी स्थिति ऐसी हो चुकी है कि वह केवल दो साल और जी पाएंगी। डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि इस स्थिति में कोई भी सर्जरी कामयाब नहीं हो सकती और कोई भी सर्जन इस तरह का खतरा मोल नहीं लेगा। परिवार ने जितने भी अन्य विशेषज्ञों से राय ली, सभी ने यही जवाब दिया। लेकिन मधुबाला इस सच्चाई को मानने के लिए तैयार नहीं थीं। वह अक्सर कहती थीं कि डॉक्टर गलत बोल रहे हैं, उनके दिल में कोई छेद नहीं है और वह पूरी तरह दौड़ और नाच सकती हैं। हालांकि सच बेहद कड़वा था और 'मुगल-ए-आजम' के एक गीत के फिल्मांकन के दौरान वह फिर से सेट पर गिर पड़ी थीं।
36 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा
बीमारी के गहराने के साथ मधुबाला का शारीरिक स्वास्थ्य तेजी से गिरता चला गया। उनका वजन बहुत ज्यादा कम हो गया और वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गईं। अपनी बहन के अंतिम दिनों को याद करते हुए मधुर भूषण ने बताया कि 30 साल की उम्र पूरी होने से पहले ही वह पूरी तरह बिस्तर पर आ गई थीं। उन्हें लगातार सांस लेने में अत्यधिक तकलीफ का सामना करना पड़ता था। आखिरकार इस असाध्य दर्द और बीमारी से लड़ते हुए केवल 36 साल की उम्र में हिंदी सिनेमा की इस बेमिसाल अदाकारा का निधन हो गया। आज भी जुहू के उसी कब्रिस्तान में उनके और दिलीप कुमार के मजार कुछ ही कदमों की दूरी पर स्थित हैं।



















