अभिनेत्री करीना कपूर और अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन की आने वाली फिल्म 'दायरा' इन दिनों काफी सुर्खियां बटोर रही है। इस फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्म निर्देशक मेघना गुलजार ने किया है। खास बात यह है कि इस सिनेमाई सफर में मेघना को अपने पिता और दिग्गज लेखक गुलजार का भी पूरा सहयोग मिला है। गुलजार ने यश केसवानी और सीमा अग्रवाल के साथ मिलकर इस फिल्म की पटकथा तैयार की है। फिल्म के प्रचार के लिए आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान, मेघना गुलजार ने अपने पिता की कार्यशैली से जुड़े कई बेहद मजेदार और अनसुने राज खोले हैं।
शानदार काम के बदले चॉकलेट बांटने का अनोखा तरीका
फिल्म जगत में दशकों से अपनी एक खास पहचान रखने वाले गुलजार अपनी संवेदनशीलता के साथ-साथ सेट पर अपने अनूठे व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने खुद बताया कि सेट पर मौजूद कलाकारों और अन्य सहयोगियों का हौसला बढ़ाने के लिए वह हमेशा एक खास तरकीब अपनाते थे। जब भी कोई कलाकार या टीम का सदस्य मनमुताबिक काम करता था, तो वह उन्हें इनाम देते थे। गुलजार ने कहा, 'मैं अपनी जेब में टॉफियां रखता था।' उनका मानना था कि इस छोटी सी कोशिश से सेट का माहौल खुशनुमा बना रहता था और लोगों को बेहतर करने की प्रेरणा मिलती थी। केवल मुख्य कलाकार ही नहीं, बल्कि सेट पर मौजूद तकनीशियनों को भी बेहतरीन काम के लिए यह मीठा इनाम दिया जाता था।
नेचुरल लुक के प्रति गुलजार साहब की जबरदस्त सख्ती
एक तरफ जहां गुलजार अपने खुशमिजाज अंदाज और टॉफी बांटने की आदत के लिए पसंद किए जाते थे, वहीं दूसरी तरफ काम को लेकर उनका अनुशासन बेहद सख्त था। वह परदे पर बनावटीपन को बिल्कुल भी जगह नहीं देना चाहते थे। उनका दृढ़ विश्वास था कि कलाकारों को कैमरे के सामने जितना संभव हो उतना स्वाभाविक दिखना चाहिए। इसी वजह से अगर कोई कलाकार जरूरत से ज्यादा सज-धजकर या भारी मेकअप लगाकर सेट पर पहुंचता था, तो वह शूटिंग शुरू करने से पहले उसका चेहरा साफ करवाते थे। उनका मानना था कि वास्तविक दिखने वाले किरदार ही दर्शकों के दिलों पर गहरा और स्थाई प्रभाव छोड़ पाते हैं।
मेघना गुलजार ने साझा किए मजेदार अनुभव
मेघना गुलजार ने अपने पिता के इसी सख्त स्वभाव से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि अगर कोई अभिनेत्री उम्मीद से ज्यादा मेकअप करके कैमरे के सामने आती थी, तो गुलजार साहब तुरंत उसे वापस भेज देते थे। मेघना ने हंसते हुए याद किया कि इस बात का अनुभव शायद शर्मिला टैगोर को भी बखूबी होगा। इस बात पर खुद गुलजार ने मजाकिया लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई बहुत ज्यादा सज जाता था, तो वह बातचीत की शुरुआत ही हाथ-मुंह धोने की हिदायत देकर करते थे।
मेकअप उतरवाने के लिए बदल देते थे स्क्रिप्ट
इस बातचीत के दौरान मेघना ने एक और बेहद हैरान करने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब कोई अभिनेत्री अपना मेकअप कम करने के लिए आसानी से तैयार नहीं होती थी, तो उनके पिता एक नया रास्ता निकाल लेते थे। वह कहानी या दृश्य में ही कुछ ऐसा बदलाव कर देते थे जहां अभिनेत्री को अपना चेहरा धोना पड़े। यानी अगर भारी मेकअप किरदार के अनुकूल नहीं लगता था, तो उसे हटाने की प्रक्रिया को ही वह फिल्म की कहानी का हिस्सा बना देते थे। दिग्गज लेखक ने आगे बताया कि जब अभिनेत्रियों को उनके इस इरादे का पता चलने लगा, तो वे खुद ही समझदारी दिखाते हुए शूटिंग से पहले थोड़ा अतिरिक्त समय मांग लेती थीं और अपना अतिरिक्त मेकअप साफ कर लेती थीं।



















