लोकप्रिय वेब सीरीज के बड़े पर्दे के अवतार ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को लेकर रिलीज के बाद से ही चर्चाओं का दौर जारी है। फिल्म में शामिल एक गाने को लेकर शुरू हुआ कॉपीराइट का विवाद अब आधिकारिक स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद शांत होता नजर आ रहा है। फिल्म के एक अहम हिस्से में बजाए गए ‘शूरवीर’ ट्रैक को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर अब गाने के संगीत लेबल की ओर से बयान जारी कर दिया गया है।
ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने साफ की स्थिति
गाने के अधिकार अपने पास रखने वाले संगीत लेबल ट्रूपर रिकॉर्ड्स ने स्पष्ट किया है कि फिल्म में इस ट्रैक को शामिल करने के लिए एक्सेल एंटरटेनमेंट को वैध अनुमति दी गई थी। लेबल की तरफ से यह भी बताया गया कि फिल्म निर्माताओं के पास गाने का इस्तेमाल करने का आधिकारिक लाइसेंस मौजूद था। इस स्पष्टीकरण के सामने आने के बाद उन सभी सवालों और भ्रम की स्थिति पर विराम लग गया है, जिसमें बिना अनुमति गाना इस्तेमाल किए जाने की बात कही जा रही थी। इसके साथ ही लेबल ने फिल्म की पूरी टीम को उनकी इस नई सिनेमाई पेशकश के लिए शुभकामनाएं भी दी हैं।
रैपरिया बालम ने जताई थी नाराजगी
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राजस्थान के प्रसिद्ध कलाकार रैपरिया बालम ने सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका दावा था कि उनके द्वारा तैयार किए गए गीत ‘शूरवीर’ को उनकी सीधी जानकारी या अनुमति के बिना फिल्म में प्रयोग किया गया है। कलाकार का कहना था कि यह विशेष गीत महाराणा प्रताप के शौर्य को समर्पित है, जबकि फिल्म के भीतर इसका इस्तेमाल गैंगस्टर्स और हिंसक दृश्यों के बैकग्राउंड में किया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि फिल्म की टीम ने उनसे संपर्क किया होता, तो वह इसके उपयोग को लेकर अपने रचनात्मक सुझाव दे सकते थे। सोशल मीडिया पर उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया था।
सांस्कृतिक संदर्भ को लेकर भी उठे थे सवाल
मामला केवल कॉपीराइट की अनुमति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाने के फिल्मांकन और उसके संदर्भ पर भी बहस छिड़ गई। राजस्थानी लोक संगीत से जुड़े कई पेजों और सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर चिंता जताई कि महाराणा प्रताप से जुड़े एक गौरवशाली गीत को काल्पनिक अपराध और हिंसा से जुड़ी पटकथा में दिखाना कितना उचित है। उनका तर्क था कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े प्रतीकों का उपयोग मनोरंजन के दौरान इस प्रकार नहीं होना चाहिए जिससे उनके मूल सम्मान पर आंच आए। इस वैचारिक पक्ष पर भी लोगों की तरफ से बंटी हुई प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
अन्य क्रिएटर्स का समर्थन और फिल्म की पृष्ठभूमि
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कई अन्य कंटेंट क्रिएटर्स ने भी रैपरिया बालम का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी। उनका मानना था कि महाराणा प्रताप का नाम देश के स्वाभिमान और त्याग का प्रतीक है, इसलिए उनके नाम से जुड़े किसी भी कलात्मक कार्य के मंचन में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। हालांकि इस बीच फिल्म के निर्देशन की बात करें तो ‘मिर्जापुर: द मूवी’ का निर्देशन गुरमीत सिंह ने संभाला है। फिल्म का निर्माण फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी के प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले किया गया है। कलाकारों के लिहाज से फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रसिका दुग्गल जैसे बड़े चेहरे नजर आए हैं।
विवाद का समापन और आगे की स्थिति
ट्रूपर रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक तौर पर लाइसेंस की पुष्टि कर दिए जाने के बाद अब कानूनी और कॉपीराइट से जुड़ा पेंच पूरी तरह सुलझ गया है। हालांकि गाने के रचनात्मक इस्तेमाल और उसके सांस्कृतिक निहितार्थों पर चर्चाएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन मेकर्स के पक्ष में वैध दस्तावेज सामने आने के बाद अनधिकृत उपयोग के आरोप स्वतः खारिज हो गए हैं। फिल्म के लिए यह एक बड़ी राहत का विषय है क्योंकि अब बिना किसी कानूनी अड़चन के फिल्म अपनी सिनेमाई यात्रा आगे बढ़ा सकती है।



















