मलयाली समुदाय के बीच अपनी अनूठी गायकी और विशेष आवाज के लिए खासी पहचान बनाने वाले लोकप्रिय गायक निसार वायनाड का दुबई में 44 वर्ष की उम्र में अचानक निधन हो गया है। यूएई के प्रवासी मलयाली समुदाय के बीच वह मुख्य रूप से एक ऐसे कलाकार के रूप में लोकप्रिय थे, जिनकी गायकी में प्रसिद्ध प्लेबैक सिंगर उदित नारायण की आवाज की गहरी झलक मिलती थी। निसार नियमित रूप से दुबई समेत यूएई के विभिन्न शहरों में आयोजित होने वाले लाइव संगीत कार्यक्रमों और सामुदायिक समारोहों का हिस्सा बनते थे। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने के बाद से पूरे प्रवासी मलयाली समुदाय में गहरा शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।
अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर अचानक निसार को तेज बुखार की शिकायत हुई, जिसके बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया। उनके डेथ नोटिफिकेशन के मुताबिक, उनकी मौत का मुख्य कारण एसिडोसिस दर्ज किया गया है, जो कि एक ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें शरीर के विभिन्न तरल पदार्थों और रक्त में एसिड की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है और पीएच स्तर सामान्य से काफी नीचे चला जाता है। उनके इस असमय निधन ने उनके परिवार, करीबी दोस्तों और प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सबसे ज्यादा भावुक करने वाली बात यह है कि जिस दिन उनका निधन हुआ, उसी दिन उन्हें अजमान में एक निर्धारित संगीत कार्यक्रम में अपनी प्रस्तुति देनी थी। उनके लिए यह शो अन्य रोजमर्रा के कार्यक्रमों की तरह ही एक और आम संगीत संध्या होने वाला था, लेकिन मंच पर उतरने से पहले ही उनके निधन की दुखद खबर सामने आ गई। निसार अपने पीछे अपनी पत्नी और दो बेटियों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
उदित नारायण के प्रति गहरी दीवानगी और वर्षों पुराना सपना
निसार वायनाड ने कभी भी इस बात को नहीं छिपाया था कि हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक उदित नारायण उनके सबसे बड़े आदर्शों में से एक हैं। उनके पुराने सोशल मीडिया पोस्ट इस बात की गवाही देते हैं कि भारतीय संगीत जगत के इस महान गायक का उनके पूरे कलात्मक सफर पर गहरा प्रभाव रहा था। उन्होंने अपने एक पुराने पोस्ट में उस यादगार मुलाकात का विशेष जिक्र किया था, जिसका उन्हें लगभग दो दशकों से बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने दुनिया के सामने साझा किया था कि उदित नारायण से आमने-सामने मिलने का उनका बरसों पुराना सपना आखिरकार सच हो गया है। निसार के लिए यह पल महज किसी सेलिब्रिटी से मिलने का साधारण अवसर नहीं था, बल्कि उस प्रेरणास्रोत कलाकार से मिलने का बेहद भावुक और खास क्षण था, जिनके गीतों को सुनकर वह बड़े हुए थे। बचपन से ही उदित नारायण के बड़े प्रशंसक रहे निसार ने करीब 20 साल के लंबे इंतजार के बाद जब उनसे व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, तो उन्होंने इसे अपनी जिंदगी के सबसे अनमोल और यादगार पलों में शुमार किया।
मप्पिलापट्टू से लेकर हिंदी गानों तक का सफर
अक्सर निसार को मुख्य रूप से एक मप्पिलापट्टू गायक के तौर पर पेश और पहचाना जाता था, जो कि केरल के मालाबार क्षेत्र की एक बेहद समृद्ध और पारंपरिक संगीत शैली है। हालांकि उनकी कलात्मक यात्रा किसी एक दायरे या शैली तक सीमित नहीं रही। वह विभिन्न प्रकार के अलग-अलग गीतों को बेहद खूबसूरती से अपनी आवाज देते थे, और विशेष रूप से हिंदी फिल्मों के गानों की उनकी प्रस्तुतियां श्रोताओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय थीं। लाइव स्टेज शोज़ के दौरान उदित नारायण की आवाज से उनकी अद्भुत समानता उनकी सबसे बड़ी और अलग पहचान बन चुकी थी। दुबई में होने वाले तमाम सांस्कृतिक और सामुदायिक आयोजनों में उनकी सुरीली आवाज का जादू देखने के लिए हमेशा बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते थे.
फिल्म जगत में भी रखा था कदम
केवल लाइव स्टेज संगीत तक ही नहीं, बल्कि निसार ने फिल्मी दुनिया में भी अपने हाथ आजमाए थे और अभिनय व गायन के नए अवसर तलाशे थे। सामने आई जानकारियों के मुताबिक, उन्होंने अपने करियर में एक कन्नड़ फिल्म के लिए भी अपनी आवाज दी थी। इसके अलावा उनका जुड़ाव बहुचर्चित मलयालम फिल्म प्रोफेसर दिनकान से भी रहा था। हालांकि, व्यापक पैमाने पर उनकी मुख्य पहचान यूएई में एक शानदार लाइव परफॉर्मर और ऐसे लोकप्रिय गायक के रूप में ही बनी, जिनकी आवाज सुनकर लोगों को सीधे तौर पर उदित नारायण की याद आ जाती थी। यही अनूठी खूबी धीरे-धीरे उनके पूरे संगीत करियर की सबसे बड़ी यूएसपी बन गई थी।
मलयालम संगीत जगत में शोक की लहर
निसार वायनाड के आकस्मिक निधन की खबर सार्वजनिक होते ही मलयालम संगीत और कला जगत से शोक संदेशों का तांता लग गया। प्रसिद्ध मलयालम प्लेबैक सिंगर अफसल ने सोशल मीडिया के माध्यम से निसार को याद करते हुए उन्हें अपना बेहद प्रिय मित्र बताया और उनके जाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। मात्र 44 वर्ष की छोटी आयु में निसार का यूं अचानक दुनिया से विदा हो जाना उनके तमाम परिचितों और यूएई के मलयाली संगीत भाईचारे के लिए एक कभी न पूरा होने वाला नुकसान है। केरल के वायनाड जिले से निकलकर दुबई की रंगीन दुनिया में अपनी कला और आवाज के दम पर खास मकाम बनाने वाले निसार ने प्रवासी समुदाय के हर छोटे-बड़े सांस्कृतिक उत्सव में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। उनकी जादुई आवाज, ऊर्जावान लाइव प्रस्तुतियां और उदित नारायण के प्रति उनकी दीवानगी के किस्से हमेशा उनके चाहنے वालों के दिलों में जिंदा रहेंगे।



















