सिनेमा जगत में कई बार ऐसे प्रोजेक्ट्स सामने आते हैं जो रिलीज से पहले तमाम विवादों और अड़चनों में घिर जाते हैं, लेकिन पर्दे पर आते ही इतिहास रच देते हैं। आज से तीन साल पहले रिलीज हुई एक खास कोर्टरूम ड्रामा मूवी ने कुछ ऐसा ही करिश्मा दिखाया था। सेक्स एजुकेशन जैसे संवेदनशील और वर्जित माने जाने वाले विषय पर बनी इस फिल्म ने देश भर में एक बड़ी और जरूरी बहस छेड़ दी थी। सिनेमाघरों में इस कहानी ने ऐसा जादू चलाया कि बॉक्स ऑफिस पर शानदार कारोबार हुआ और एक दौर में फ्लॉप फिल्मों का सामना कर रहे सुपरस्टार के करियर को नया जीवनदान मिल गया। हम जिस चर्चित मूवी की बात कर रहे हैं, उसका नाम ओएमजी 2 है।
साल 2012 की सुपरहिट फिल्म का बहुप्रतीक्षित सीक्वल
साल 2023 के दौरान सिनेमाघरों में उतरी यह फिल्म भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा प्रोजेक्ट्स में गिनी जाती है, जिन्हें कड़े विरोध और विवादों का सामना करते हुए भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। निर्देशक अमित राय के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह मूवी असल में साल 2012 में आई अक्षय कुमार और परेश रावल की बेहद लोकप्रिय फिल्म 'ओएमजी' का अगला भाग यानी सीक्वल थी। हालांकि पहले भाग की तुलना में इसके तेवर और विषय काफी अलग और गंभीर थे, जिसने समाज के एक बड़े वर्ग का ध्यान अपनी ओर खींचने का काम किया।
सेंसर बोर्ड की सख्त कैंची और 27 कट
थिएटर्स में आने से ठीक पहले यह प्रोजेक्ट सेंसर बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के कड़े रवैये की वजह से जबरदस्त चर्चा का केंद्र बन गया था। चूंकि फिल्म का मुख्य विषय भारतीय समाज में सेक्स एजुकेशन और उससे जुड़ी भ्रांतियों पर आधारित था, इसलिए बोर्ड ने काफी सतर्कता बरती। आईएमडीबी के आंकड़ों के अनुसार, लंबी विचार-विमर्श और समीक्षा प्रक्रिया के बाद सेंसर बोर्ड ने इस मूवी में कुल 27 कट लगवाए और कई तीखे डायलॉग्स को बदलवा दिया। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई थी कि बोर्ड ने अक्षय कुमार के ऑन-स्क्रीन किरदार को सीधे भगवान शिव के रूप में दिखाने पर आपत्ति जताई और उन्हें शिव के दूत के रूप में पेश करने का सख्त निर्देश दिया। इसके अलावा, फिल्म को ए सर्टिफिकेट थमाया गया, जिसका सीधा मतलब यह था कि स्कूली बच्चे, जिनके लिए यह विषय सबसे ज्यादा जरूरी था, वे खुद इसे सिनेमाघरों में नहीं देख सके।
अदालत की चौखट पर न्याय की लड़ाई
कहानी के केंद्र में पंकज त्रिपाठी द्वारा निभाया गया कांति शरण मुद्गल नाम का किरदार है, जो एक पक्का शिवभक्त और समर्पित पिता है। जब उसका बेटा अनजाने में हुई गलती और सही जानकारी के अभाव में स्कूल में भारी बदनामी का शिकार होकर डिप्रेशन की अंधेरी दुनिया में चला जाता है, तब यह पिता टूटता नहीं बल्कि सिस्टम के खिलाफ खड़ा होता है। कांति अपने बेटे को न्याय दिलाने और समाज की दबी हुई सोच को बदलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाता है। वह स्कूल प्रशासन और शिक्षा प्रणाली पर केस दर्ज करता है और अपनी दलील में मांग करता है कि स्कूलों में सही और तय उम्र में यौन शिक्षा दी जानी अनिवार्य होनी चाहिए। इस अदालती लड़ाई में विपक्षी वकील संजना बनर्जी का किरदार निभाकर यामी गौतम ने भी अपनी दमदार अदाकारी से हर किसी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया।
फ्लॉप दौर से गुजर रहे सुपरस्टार के करियर को संजीवनी
फिल्म में अक्षय कुमार ने शिवदूत की भूमिका निभाकर अपनी खास उपस्थिति से पूरी कहानी में जान फूंक दी थी। उस विशेष समय में लगातार फ्लॉप फिल्मों का सामना कर रहे अक्षय कुमार के लिए यह प्रोजेक्ट करियर की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। भले ही यह उनकी कोई सोलो लीड फिल्म नहीं थी, लेकिन इसके खाते में जुड़ी सफलता ने उनके करियर के रिकॉर्ड में एक और सुपरहिट मूवी जोड़ने का काम किया। दर्शकों ने इस सामाजिक और साहसी कहानी को रिलीज होते ही सिर-आंखों पर बिठा लिया और सिनेमाघरों में भीड़ जुटनी शुरू हो गई।
शानदार बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और ब्लॉकबस्टर कमाई
वित्तीय आंकड़ों और रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो यह मूवी लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत के साथ बनकर तैयार हुई थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट के मुताबिक, ओएमजी 2 ने अकेले भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस कर दिखाया, जबकि इसकी दुनियाभर की कुल कमाई ने 221 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर लिया। बॉक्स ऑफिस के लिहाज से इस फिल्म का अंतिम वर्डिक्ट सुपरहिट रहा, जिसने यह साबित कर दिया कि दर्शक अब लीक से हटकर बनने वाली सार्थक और साहसिक कहानियों को भी हाथों-हाथ अपनाने लगे हैं।



















