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शोले से महीने भर पहले रिलीज हुई वह फिल्म, जिसने छोटे बजट में कमाए थे कई गुना ज्यादाबॉलीवुड
7 सित॰ 2026, 11:39 pm (52 मिनट पहले)· 3

शोले से महीने भर पहले रिलीज हुई वह फिल्म, जिसने छोटे बजट में कमाए थे कई गुना ज्यादा

साल 1975 में बिना किसी बड़े सितारे या एक्शन के रिलीज हुई जय संतोषी मां ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा इतिहास रचा कि इसने कई दिग्गज फिल्मों को पीछे छोड़ दिया।

भारतीय फिल्म इतिहास में साल 1975 को स्वर्ण युग माना जाता है। इसी दौरान बड़े सितारों से सजी कई फिल्में पर्दपर आईं और उन्होंने बॉक्स ऑफिस के तमाम रिकॉर्ड अपने नाम किए। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी फिल्म भी थिएटर्स में उतरी जिसके पास न तो कोई भारी-भरकम बजट था और न ही कोई नामचीन स्टारकास्ट। इस धार्मिक फिल्म ने कम संसाधनों के बावजूद ऐसी सफलता हासिल की जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। रिलीज के वक्त इस प्रोजेक्ट को लेकर किसी को भी बड़े मुनाफे की आस नहीं थी, क्योंकि उस दौर में एक्शन और स्टार पावर का बोलबाला हुआ करता था। इसके बावजूद इसने अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के दिलों में अपनी जगह पक्की की।

छोटे बजट में बनी थी यह कल्ट फिल्म

इस धार्मिक प्रोजेक्ट को तैयार करने में केवल 25 से 30 लाख रुपये की लागत आई थी। उस समय जब फिल्मों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे थे, यह फिल्म बेहद सीमित खर्च में बनकर तैयार हुई थी। लेकिन जब इसने सिनेमाघरों में दस्तक दी, तो कमाई के मामले में इसने बड़े-बड़े दिग्गजों को चौंका दिया। बॉक्स ऑफिस पर इसने 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया। निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की बात करें तो यह फिल्म अपने बजट से लगभग 20 गुना ज्यादा कमाई करने में सफल रही। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर यह उस साल की तीसरी सबसे बड़ी हिट साबित हुई और इसके साथ ही इसे हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में गिना जाने लगा।

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दर्शकों में ऐसा था धार्मिक उत्साह

इस फिल्म का असर सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह लोगों की आस्था से जुड़ गया। दर्शक जब सिनेमाघरों में इसे देखने पहुंचते थे तो वे स्क्रीन के बाहर ही अपने जूते और चप्पल उतार देते थे। फिल्म के शुरू होते ही थिएटर्स के भीतर लोग आरती गाने लगते थे, स्क्रीन पर फूल बरसाते थे, पैसे फेंकते थे और नारियल भी फोड़ते थे। कई जगह थिएटर्स के मालिकों ने स्क्रीन के नजदीक ही पूजा की थाली और अगरबत्ती की व्यवस्था कर दी थी। जो महिलाएं शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत रखती थीं, वे सिनेमाघर के भीतर ही बैठकर अपना व्रत खोलती थीं। इस तरह यह फिल्म एक सांस्कृतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी थी।

महान कलाकारों का अभिनय और अमर संगीत

फिल्म की मुख्य भूमिका में कानन कौशल ने सत्यवती का किरदार निभाया था, जबकि अनीता गुहा ने देवी संतोषी के रूप में स्क्रीन पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन दोनों अभिनेत्रियों के काम ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। इसके अलावा फिल्म के गानों ने इतिहास रचने में अहम भूमिका निभाई। पंडित प्रदीप द्वारा लिखे गए और सी. अर्जुन द्वारा संगीतबद्ध किए गए भजन आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उषा मंगेशकर की आवाज में गाया गया मुख्य भजन उस समय देश के हर घर में गूंजता था और इस संगीत ने उस दौर में रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की थी।

बड़ी फिल्मों को दी कड़ी टक्कर

जिस साल यह फिल्म रिलीज हुई, उसी दौरान बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी और बहुचर्चित फिल्में अपना जलवा बिखेर रही थीं। उस वर्ष की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शीर्ष स्थान पर अन्य फिल्में थीं, लेकिन यह कम बजट की धार्मिक फिल्म तीसरे स्थान पर कब्जा जमाने में कामयाब रही। इसने अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे उस दौर के सबसे बड़े सितारों की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया। जानकारों के मुताबिक, यह इस बात का प्रमाण था कि भारतीय दर्शकों के लिए भावनाएं और संस्कृति हमेशा से सबसे ऊपर रही हैं और सही भावनात्मक जुड़ाव होने पर कम बजट की फिल्में भी इतिहास रच सकती हैं।

सवाल-जवाब

जय संतोषी मां किस वर्ष रिलीज हुई थी?
यह फिल्म 30 मई 1975 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
इस फिल्म का कुल बजट कितना था?
फिल्म को बनाने में लगभग 25 से 30 लाख रुपये की लागत आई थी।
फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितनी कमाई की थी?
इसने बॉक्स ऑफिस पर 5 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था।
फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई थी?
फिल्म में कानन कौशल ने सत्यवती की मुख्य भूमिका निभाई थी।
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