सिनेमा प्रेमियों के बीच लंबे अरसे से चर्चित मुन्नाभाई फ्रैंचाइजी की तीसरी कड़ी को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। शुरुआती दोनों संस्करणों की जबरदस्त कामयाबी के बाद दर्शक संजय दत्त और अरशद वारसी की मशहूर जोड़ी को दोबारा बड़े पर्दे पर देखने की मांग लगातार करते रहे हैं। अब इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट की पटकथा तैयार करने की जिम्मेदारी फिल्म निर्देशक फरहद सामजी को सौंपी गई है, जो फिलहाल इसके लेखन कार्य को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं।
पटकथा मजबूत होने पर ही आगे बढ़ेंगे राजकुमार हिरानी
निर्देशक राजकुमार हिरानी इस तीसरे भाग को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं। उनका स्पष्ट मानना रहा है कि जब तक कहानी पूरी तरह पुख्ता और प्रभावशाली नहीं बन जाती, तब तक निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसी सोच के तहत लेखन का जिम्मा फरहद सामजी के कंधों पर डाला गया है। योजना के अनुसार, जैसे ही सामजी का लेखन कार्य पूरा होगा, हिरानी निर्देशन और निर्माण से जुड़े अपने हिस्से की जिम्मेदारियों को संभालेंगे। यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो यह बहुप्रतीक्षित फिल्म साल 2027 तक फ्लोर पर आ सकती है, हालांकि निर्माताओं की तरफ से अभी इस संबंध में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फ्रैंचाइजी से फरहद सामजी का पुराना जुड़ाव
फरहद सामजी का इस लोकप्रिय सीरीज से जुड़ाव कोई नया नहीं है। उनका यह सफर साल 2003 में आई पहली फिल्म से ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने इसके मशहूर गीत 'एम बोले तो' का शुरुआती मुखड़ा लिखा था। सामजी ने इस वाकये को याद करते हुए साझा किया था कि संगीतकार अनु मलिक ने एक रात करीब 10 बजे उन्हें अचानक फोन किया था। उस कॉल पर मलिक ने उन्हें बताया कि राजकुमार हिरानी के निर्देशन और विधु विनोद चोपड़ा के निर्माण में एक नई फिल्म तैयार हो रही है, जिसके लिए एक खास टपोरी अंदाज वाले मुखड़े की फौरन जरूरत है।
शाहरुख खान से लेकर संजय दत्त के चुनाव तक की यादें
उस दौर को याद करते हुए सामजी ने यह भी बताया था कि शुरुआत में मुख्य किरदार के लिए शाहरुख खान के नाम पर विचार चल रहा था। बाद में परिस्थितियों के अनुसार संजय दत्त को इस भूमिका के लिए तय किया गया। संजय दत्त ने निर्देशक की उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए अपने जीवंत अभिनय से हर दृश्य को यादगार बना दिया, जिसके चलते फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी।
दो दशकों का शानदार सफर और गांधीगिरी की विरासत
इस फ्रैंचाइजी का सफर साल 2003 में शुरू हुआ था, जिसमें संजय दत्त के साथ ग्रेसी सिंह, अरशद वारसी, बोमन ईरानी और जिम्मी शेरगिल जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा था। इसके ठीक तीन साल बाद, यानी साल 2006 में इसका सीक्वल 'लगे रहो मुन्नाभाई' रिलीज किया गया। इस दूसरी फिल्म में कहानी एक फर्जी इतिहास शिक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका संपर्क एक रेडियो जॉकी से होता है और धीरे-धीरे दोनों में प्रेम पनपता है। वह रेडियो जॉकी मुन्ना को महात्मा गांधी के विचारों पर व्याख्यान देने के लिए प्रेरित करती है, जिसके बाद मुन्ना का झुकाव गांधीवाद और अहिंसक तौर-तरीकों की ओर बढ़ता चला जाता है। अब दर्शकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि तीसरा भाग किस नई दिशा में आगे बढ़ता है।


















