पंजाब के जालंधर शहर से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने संगीत जगत और प्रशंसकों को गहरे सदमे में डाल दिया है। स्पीड रिकॉर्ड्स के प्रमुख दिनेश औलख के 18 वर्षीय पुत्र दिवित औलख का एक भीषण सड़क दुर्घटना में असामयिक देहांत हो गया। दिवित संगीतकार यो यो हनी सिंह के भतीजे थे। रविवार के तड़के हुए इस भयावह हादसे ने दो परिवारों के चिराग छीन लिए, जिसमें दिवित के साथ उनके करीबी मित्र ने भी दम तोड़ दिया। मंगलवार के दिन जालंधर में दिवित का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया, जहां पंजाबी कला जगत, संगीत उद्योग और समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग भारी तादाद में शोक व्यक्त करने पहुंचे। श्मशान घाट पर उपस्थित हर शख्स की आंखें भर आईं और पूरे क्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसर गया। सोशल मीडिया पर भी इस दुखद घड़ी के दृश्य साझा किए जा रहे हैं, जिन्हें देखकर हर कोई औलख परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कर रहा है।
मॉडल टाउन श्मशान भूमि पर उमड़ा जनसैलाब, दिग्गजों ने दिया कंधा
दिवित औलख की अंतिम यात्रा मंगलवार, 3 नवंबर को दोपहर 1 बजे जालंधर स्थित मॉडल टाउन के श्मशान घाट पर निकाली गई। इस दुखद अवसर पर औलख परिवार के रिश्तेदार, परिचित और अनगिनत शुभचिंतक अपने लाडले को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पंजाबी संगीत जगत के प्रमुख स्तंभ माने जाने वाले कई शीर्ष कलाकार व्यक्तिगत रूप से श्मशान घाट पर उपस्थित रहे और इस विपत्ति की घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाया।
संगीत और सिनेमा जगत से जुड़े कलाकारों ने न केवल परिजनों को सांत्वना दी, बल्कि दिवित की अर्थी को कंधा देकर अपने गहरे आदर और स्नेह का परिचय भी दिया। अर्थी को कंधा देने वाले कलाकारों में गिप्पी ग्रेवाल, बब्बू मान, जैजी बी, अमृत मान और सतिंदर सरताज शामिल रहे। इसके अलावा प्रीत हरपाल और रणजीत बावा भी श्मशान स्थल पर पहुंचे और नम आंखों से दिवित को श्रद्धांजलि अर्पित की। इन तमाम दिग्गजों की मौजूदगी यह स्पष्ट दर्शाती है कि औलख परिवार का पंजाबी मनोरंजन उद्योग में कितना गहरा और आत्मीय संबंध रहा है।
यो यो हनी सिंह इस पूरे समय अपने परिजनों के साथ डटे रहे। वह अपने जीजा दिनेश औलख और परिवार के अन्य दुखी सदस्यों को संभालते नजर आए। 18 वर्ष के बालक के यूं अचानक चले जाने से पूरे परिवार की खुशियां बिखर चुकी हैं, और उद्योग जगत के तमाम साथी इस विकट संकट में औलख परिवार की ढाल बनकर उनके साथ खड़े दिखाई दिए।
मां का विलाप देख दहल उठा हर दिल, पिता ने संपन्न किया अंतिम संस्कार
श्मशान घाट पर सबसे अधिक व्यथित करने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला जब दिवित की माता अपने बेटे के पार्थिव शरीर के समीप पहुंचीं। इंटरनेट पर प्रसारित हो रहे वीडियो में वह अपने दिवंगत पुत्र के पास असहाय खड़ी नजर आ रही हैं। भरे-पूरे संसार से अपने जवान बेटे का इस तरह अचानक चले जाना किसी भी मां के लिए जीवन का सबसे असहनीय आघात होता है, और यही असह्य पीड़ा उनके चेहरे और आंसुओं में साफ झलक रही थी।
वह सुधबुध खो चुकी थीं और बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर विलाप कर रही थीं। वहां मौजूद सगे-संबंधी और परिजन उन्हें सहारा देने की भरसक कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस महाविपत्ति में किसी के भी शब्द नाकाफी साबित हो रहे थे। 18 वर्ष की कच्ची उम्र में औलाद को खोने का दारुण दुख शब्दों की सीमा से परे है। नम आंखों के बीच पिता दिनेश औलख ने अपने बेटे की चिता को मुखाग्नि दी और अंतिम संस्कार की विधियां पूरी कीं। उपस्थित जनसमूह स्तब्ध था कि नियति ने परिवार पर इतना क्रूर प्रहार कैसे कर दिया। आम जनता भी इन दृश्यों को देखकर द्रवित हो उठी है और सामाजिक मंचों पर यह टिप्पणी कर रही है कि जवान संतान को विदा करने से बड़ा कोई दुर्भाग्य माता-पिता के जीवन में नहीं हो सकता।
रविवार तड़के हुआ था घातक हादसा, मोबाइल के क्रैश डिटेक्शन से मां तक पहुंचा था अलर्ट
यह हृदयविदारक हादसा रविवार के दिन सुबह करीब 3:30 बजे जालंधर की सड़क पर घटित हुआ। उस समय दिवित औलख के साथ उनके साथी आरव तलवार भी गाड़ी में सवार थे। अनियंत्रित टक्कर इतनी जोरदार थी कि इन दोनों नौजवानों की मौके पर ही जान चली गई। दोनों मित्र अपनी जिंदगी के उस पड़ाव पर थे जहां वे भविष्य के सुनहरे सपने बुन रहे थे, लेकिन एक क्षण की दुर्घटना ने सब कुछ हमेशा के लिए तबाह कर दिया।
हादसे के बाद एक बेहद भावुक करने वाला तकनीकी पहलू भी सामने आया। दुर्घटना के समय दिवित के स्मार्टफोन में क्रैश डिटेक्शन की सुविधा सक्रिय थी। जैसे ही वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ, फोन के सिस्टम ने तत्काल प्रभाव से हादसे को भांप लिया और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट के तौर पर दर्ज उनकी माता के मोबाइल पर संकट का संदेश प्रेषित कर दिया। उस संदेश के साथ दुर्घटना स्थल की सटीक लोकेशन भी मां के फोन पर पहुंच गई।
अलर्ट मिलते ही मां ने घबराकर तुरंत घर के बाकी सदस्यों को सूचना दी। परिजनों ने फौरन दिवित के नंबर पर संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन उस पार से कोई आवाज नहीं आई और केवल सन्नाटा पसरा रहा। इसके बाद घबराए परिवार ने दिवित के अन्य दोस्तों से खोजबीन शुरू की, जिसके बाद दोनों युवकों की दुर्घटना और मृत्यु की मनहूस खबर सामने आई। आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपने ही बच्चे की मौत की सूचना मिलना उस मां के लिए कल्पनातीत सदमा बन गया जो हर पल अपने बेटे की सलामती की कामना करती थी। हालांकि इस सड़क हादसे के मूल और तकनीकी कारणों को लेकर अभी आधिकारिक जांच और पुष्टि की प्रतीक्षा की जा रही है।
गुरप्रीत घुग्गी ने सड़क सुरक्षा और व्यवस्था पर उठाए तीखे सवाल
अंतिम विदाई के दौरान उपस्थित मशहूर अभिनेता और हास्य कलाकार गुरप्रीत घुग्गी भी इस भयावह घटना से स्तब्ध और आक्रोशित नजर आए। उन्होंने पीड़ित औलख परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट करने के साथ-साथ देश में लगातार हो रहे जानलेवा सड़क हादसों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
गुरप्रीत घुग्गी ने समाज और व्यवस्था के रवैये पर बात करते हुए कहा कि किसी के घर जाकर औपचारिक दुख जताना और फिर अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट जाना बहुत आसान होता है, परंतु जिस घर का चिराग हमेशा के लिए बुझ जाता है, वह परिवार जीवन भर उस असहनीय खालीपन और दर्द के साथ जीने को मजबूर हो जाता है। उन्होंने इस पूरे हादसे को बेहद क्रूर और अन्यायपूर्ण करार देते हुए कहा कि किसी मां-बाप के लिए अपने जवान बेटे को इस तरह खो देने से बड़ा दुर्भाग्य दूसरा नहीं हो सकता।
इसके अलावा अभिनेता ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर पूछा कि आखिर कब तक हमारी सड़कों पर मासूमों का खून इसी तरह बहता रहेगा? घुग्गी ने स्पष्ट कहा कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए महज कागजी बातें करने या शोक संदेश जारी करने से कुछ नहीं बदलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और सख्त कदम उठाने होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि नौजवान और कम उम्र के वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना सबसे अनिवार्य जरूरत है। इसके साथ ही सड़कों के बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करना, वाहनों पर रिफ्लेक्टर लगाना और समय पर उनकी तकनीकी सर्विसिंग कराना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भारी चिंता जताई कि सड़क सुरक्षा को लेकर आज भी समाज और प्रशासन में उस गंभीरता का अभाव दिखता है जिसकी दरकार है। यदि अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो न जाने कितने और परिवार इसी तरह अपने मासूम बच्चों को खोते रहेंगे।
भाजपा नेता सुशील रिंकू ने जताया शोक, गुरु चरणों में मांगी शक्ति
अंतिम संस्कार के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के नेता सुशील रिंकू भी शोक संतप्त परिवार के बीच पहुंचे। उन्होंने इस असामायिक क्षति पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा कि इतनी कम उम्र के होनहार युवक का इस प्रकार अचानक चले जाना असहनीय और अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दिनेश औलख और उनकी पत्नी के लिए प्रार्थना की कि ईश्वर उन्हें इस असीम अंधकार से जूझने का संबल प्रदान करे।
सुशील रिंकू ने कहा कि जीवन में कुछ दुख इतने अथाह होते हैं कि उन्हें शब्दों में व्यक्त करना असंभव हो जाता है। इस तरह के असहनीय आघात को सहने की शक्ति केवल परमात्मा ही किसी परिवार को दे सकता है। उन्होंने गुरु महाराज के समक्ष अरदास करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल माता-पिता के लिए आत्मिक बल की कामना की।
हनी सिंह ने सोशल मीडिया पर बयां किया अपना अंधकार
अपने चहेते भतीजे के निधन से संगीतकार यो यो हनी सिंह अंदर से पूरी तरह टूट चुके हैं। मंगलवार को हुए अंतिम संस्कार से पहले उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक अत्यंत भावुक संदेश साझा करते हुए अपने दिल का दर्द बयां किया था।
हनी सिंह ने दिवित के चले जाने को अपने जीवन की एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने लिखा कि उनके लिए यह पूरा दशक अंधकारमय हो चुका है और अपने भतीजे को खोने का दर्द बयान नहीं किया जा सकता। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखने की गुहार लगाते हुए लिखा, 'भोलेनाथ, मेहर, मेहर, मेहर।' उनकी इस छोटी सी पोस्ट ने यह साफ कर दिया कि परिवार के इस लाडले सदस्य का साया उठने से उन पर दुखों का कितना बड़ा पहाड़ टूटा है। एक ओर जहां पूरा परिवार और नाते-रिश्तेदार अपने जवान बेटे और भतीजे की इस अकाल मृत्यु के गहरे सदमे में हैं, वहीं दूसरी ओर समूचा पंजाबी संगीत जगत भी इस अपूरणीय क्षति से स्तब्ध और गमगीन है।



















