अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के पहले नतीजों के बाद वैश्विक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर चौतरफा बिकवाली के दबाव में आ गया है। इस राजनीतिक उलटफेर के बीच स्विस फ्रैंक के मुकाबले अमेरिकी डॉलर आठ सप्ताह के निचले स्तर 0.8127 तक गिरने के बाद मामूली रूप से संभलकर 0.8159 से 0.8160 के आसपास कारोबार कर रहा है। दिन के कारोबार में यह अब भी 0.5 प्रतिशत से अधिक टूटा हुआ है, जबकि पिछले सत्र के बंद स्तर 0.8184 के मुकाबले लाइव भाव करीब 0.29 प्रतिशत की कमजोरी दिखा रहा है। राजनीतिक अनिश्चितता और तकनीकी संकेतकों की कमजोरी ने मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर के रुझान को बेहद नाजुक बना दिया है।
मध्यावधि चुनाव के झटके से अमेरिकी डॉलर पर बढ़ा चौतरफा दबाव
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के प्रति कड़ा असंतोष जाहिर किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस और सीनेट दोनों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इस चुनावी मुकाबले में डेमोक्रेट्स ने कंसास, नॉर्थ कैरोलिना और टेक्सास जैसे रिपब्लिकन पार्टी के पारंपरिक गढ़ों को अपने पक्ष में उलटकर सभी को चौंका दिया है। सत्ता संतुलन में आए इस बड़े बदलाव ने निवेशकों को अमेरिकी संपत्तियों को लेकर सतर्क कर दिया है, जिसके चलते बुधवार को बाजार में अमेरिकी डॉलर की भारी बिकवाली दर्ज की गई।
वाशिंगटन में सत्ता संतुलन बिगड़ने से नीतिगत गतिरोध की आशंका तेज हो गई है। जब भी राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनता है, वैश्विक निवेशक पारंपरिक सुरक्षित मुद्राओं की ओर रुख करते हैं। स्विस फ्रैंक को वैश्विक वित्तीय उथल-पुथल के दौर में सबसे सुरक्षित मुद्राओं में गिना जाता है, और यही वजह है कि चुनावी झटके के बाद स्विस फ्रैंक प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनकर उभरा है।
आईएनजी विश्लेषक की राय: जनवरी तक तात्कालिक राहत, लेकिन आगे चुनौतियां
शुरुआती भारी गिरावट के बाद डॉलर में निचले स्तरों से आई हल्की रिकवरी पर बाजार विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है। आईएनजी के क्रिस टर्नर के अनुसार, हालिया रिकवरी का मुख्य कारण संभवतः यह है कि डेमोक्रेट्स औपचारिक रूप से जनवरी तक पदभार ग्रहण नहीं करेंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चुनावी नतीजों को स्वीकार कर लेने के कदम ने भी मध्यावधि नतीजों के बाद होने वाली निरंतर बिकवाली को सीमित किया है।
हालांकि क्रिस टर्नर ने आने वाले समय को लेकर आगाह करते हुए कहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली कांग्रेस डॉलर के लिए हल्की नकारात्मक साबित होगी, चाहे वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में हो या फिर संभावित रूप से अगली गर्मियों से लंबे समय तक चलने वाले अमेरिकी सरकारी कामकाज के ठप होने की आशंका के लिहाज से हो। विधायी गतिरोध की यह संभावना मध्यम अवधि में डॉलर के लिए एक बड़ा अवरोधक बन सकती है।
तकनीकी विश्लेषण: डबल टॉप फॉर्मेशन से 0.8050 तक फिसलने का जोखिम
तकनीकी चार्ट पर डॉलर बनाम स्विस फ्रैंक की स्थिति विक्रेताओं के पक्ष में झुकी नजर आ रही है। यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान भाव ने 0.8159 तक का निचला उछाल दिखाया, लेकिन यह जोड़ी लगातार एक मंदी वाले चैनल के भीतर ही कारोबार कर रही है। मंगलवार को 0.8220 के स्तर से आई तेज गिरावट ने 0.8380 के क्षेत्र में डबल टॉप फॉर्मेशन की पुष्टि कर दी है, जिसने मंदड़ियों को नए सिरे से बिकवाली करने का आधार दे दिया है।
चार घंटे के समयावधि वाले चार्ट पर मोमेंटम संकेतक भी इस मंदी के दृष्टिकोण का समर्थन कर रहे हैं। 14-अवधि का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI वर्तमान में 38 से 40 के नीचे बना हुआ है। हालांकि यह ओवरसोल्ड स्तर से थोड़ा ऊपर है, लेकिन इसकी कमजोरी दर्शाती है कि खरीदारी की गति बेहद कमजोर है। वहीं मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी MACD थोड़ा नकारात्मक बना हुआ है, जो यह स्पष्ट संकेत देता है कि किसी भी प्रकार की तात्कालिक तेजी टिकने वाली नहीं है।
चार्ट के अनुसार अब तक नीचे की ओर गिरावट के प्रयासों को 0.8130 और 0.8127 के 20-दिवसीय समर्थन स्तर पर रोका गया है। लेकिन डबल टॉप के मापे गए लक्ष्य को देखें तो यह जोड़ी सितंबर की शुरुआत के निचले स्तरों, यानी 0.8050 से 0.8070 के दायरे तक फिसल सकती है। दूसरी तरफ, यदि खरीदार बाजार में लौटना चाहते हैं तो उन्हें 0.8220 पर स्थित डबल टॉप नेकलाइन को पार करना होगा। इस स्तर के टूटने पर ही ध्यान नवंबर की शुरुआत के उच्चतम स्तर 0.8250 और 28 अक्टूबर के उच्च स्तर 0.8313 की ओर स्थानांतरित हो सकेगा।
लाइव तकनीकी स्तर और प्रमुख संकेतक
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, इस मुद्रा जोड़ी का 52-सप्ताह का दायरा 0.7629 से 0.8395 के बीच रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर सामान्य स्तर पर देखा जा रहा है। चलती औसत यानी मूविंग एवरेज पर नजर डालें तो 20-दिवसीय घातीय चलती औसत यानी EMA20 0.8246 पर, EMA50 0.8220 पर और 200-दिवसीय EMA200 0.8057 पर स्थित है। वहीं 50-दिवसीय साधारण चलती औसत यानी SMA50 0.8223 पर और 200-दिवसीय SMA200 0.7997 पर है। लंबी अवधि में गोल्डन क्रॉस मौजूद होने के बावजूद वर्तमान भाव 0.8169 से 0.8362 वाले बोलिंगर बैंड के निचले बैंड से भी नीचे फिसल चुका है।
दैनिक उतार-चढ़ाव को मापने वाला औसत ट्रू रेंज यानी ATR14 का मान 0.01 पर है, जिसे स्टॉप-लॉस बफर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अल्पकालिक दिशा के लिहाज से दैनिक पिवट बिंदु 0.8166 पर स्थित है। यदि जोड़ी ऊपर बढ़ती है तो पहला प्रतिरोध R1 0.8205 और दूसरा प्रतिरोध R2 0.8250 पर है। गिरावट की स्थिति में पहला तात्कालिक समर्थन S1 0.8121 पर और दूसरा मजबूत सहारा S2 0.8082 पर बना हुआ है। ADX सूचक 19 पर है, जो दर्शाता है कि रुझान की ताकत अभी सीमित है और बाजार रेंज-बाउंड मंदी में फंसा है, जबकि स्टोकेस्टिक का फास्ट इंडिकेटर 18 और सिग्नल लाइन 22 पर चल रही है।
वैश्विक बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों पर चुनावी असर
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की जीत का असर केवल स्विस फ्रैंक तक ही सीमित नहीं रहा है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य को मापता है, बुधवार को एशियाई सत्र के दौरान तेज बिकवाली के दबाव में आ गया और सितंबर के अंत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया। बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नई गिरावट ला दी, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दावों का असर फीका पड़ गया।
जापानी येन के मुकाबले भी अमेरिकी डॉलर भारी दबाव में दिखा। एशियाई सत्र में डॉलर बनाम येन 158.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसलकर एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। वाशिंगटन में नीतिगत गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया, जिसने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर एशियाई सत्र में 0.6965 के आसपास स्थिर रहा। चुनावी नतीजों ने अमेरिकी डॉलर पर भारी दबाव डाला, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को दो सप्ताह के निचले स्तर से उबरने में मदद मिली। हालांकि रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधकर रखा।
दूसरी ओर, सोने की कीमतों में जबर्दस्त तेजी देखने को मिली। कमजोर डॉलर और वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध के कारण निवेशकों ने सोने को प्राथमिकता दी, जिससे पीली धातु शुरुआती यूरोपीय सत्र में 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े से काफी ऊपर मजबूती से टिकी रही। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट ने बिना ब्याज वाली इस सुरक्षित धातु को अतिरिक्त ताकत प्रदान की है।

















