गोरखपुर की धरती पर आयोजित एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की आधी आबादी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए एक बड़ा संकल्प व्यक्त किया। आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों की व्यापक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच बोलते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार अब महिला सुरक्षा की ठोस बुनियाद पर आर्थिक स्वावलंबन की एक नई इमारत खड़ी करने जा रही है। इस विशेष अवसर पर मंच पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की गरिमामयी मौजूदगी ने इस घोषणा के राजनीतिक और सामाजिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया।
महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत का रोडमैप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि डबल इंजन सरकार महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वाभिमान की रक्षा के लिए पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ निरंतर कार्य कर रही है। कानून-व्यवस्था में सुधार के माध्यम से बहनों और माताओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जा चुका है, और अब अगला ठोस कदम उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार इसके लिए जल्द ही एक विशेष और प्रभावशाली पैकेज लाने की तैयारी में है, जिसका सीधा उद्देश्य हर महिला को अपने पैरों पर खड़े होने के योग्य बनाना होगा।
महिलाओं की आर्थिक प्रगति को उन्होंने पारिवारिक और राष्ट्रीय विकास की धुरी बताया। उनका कहना था कि जब एक महिला आत्मनिर्भर बनेगी, तो वह पूरे परिवार का मजबूत सहारा बनेगी और अपने बच्चों को बेहतरीन शिक्षा दिलाने में सक्षम होगी। बच्चों की बेहतर शिक्षा से समाज का कायाकल्प होगा। योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की आधी आबादी का आत्मनिर्भर होना ही पूरे राज्य को आत्मनिर्भर बनाएगा। जब उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर और सशक्त बनेगा, तभी वह विकसित राज्य के रूप में उभरेगा, जिससे समूचे भारत के विकसित राष्ट्र बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का स्मरण कराते हुए कहा कि देश की आजादी का शताब्दी महोत्सव हर भारतीय की समृद्धि और खुशहाली का पर्व तभी बन सकेगा, जब समाज का प्रत्येक नागरिक स्वावलंबी बने।
ईवीएम और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विरोधी दलों की घेराबंदी
अपने संबोधन के दूसरे हिस्से में मुख्यमंत्री ने दिल्ली की हालिया राजनीतिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए विपक्षी गठबंधन और कांग्रेस पार्टी की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खुद एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। विपक्षी दलों का दोहरा मापदंड पूरी तरह उजागर हो चुका है, जहां चुनावी जीत का श्रेय वे अपने पुरुषार्थ को देते हैं, लेकिन जनता के हाथों नकार दिए जाने और हार मिलने पर सारा दोष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के मत्थे मढ़ देते हैं। यह नकारात्मक सोच जनता के फैसले का अपमान करने जैसी है।
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर विपक्ष के रुख पर भी मुख्यमंत्री ने तीखा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के शासनकाल में जब मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया जाता था, तब वे उसका खुलकर समर्थन करते थे। लेकिन वर्तमान समय में जब भारत निर्वाचन आयोग बांग्लादेशी घुसपैठियों, पाकिस्तानियों और मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए विशेष अभियान चला रहा है, तो विपक्षी खेमे में हायतौबा मची हुई है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस वैध प्रक्रिया के खिलाफ बेवजह भ्रम फैलाकर देश के भीतर अराजकता का माहौल निर्मित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी गठबंधन को पूरे राष्ट्र से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।
गरीबों के संवैधानिक अधिकार और राजनीतिक जवाबदेही
सीएम योगी आदित्यनाथ ने मतदाता सूची की शुद्धि को सामाजिक न्याय और गरीबों के अधिकारों से जोड़ते हुए अपनी बात को विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई अनधिकृत बांग्लादेशी या पाकिस्तानी घुसपैठिया फर्जी तरीके से भारतीय मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाता है, तो वह वास्तव में भारत के किसी निर्धन, वंचित और दलित नागरिक के लोकतांत्रिक और नागरिक अधिकारों पर सीधा डाका डालता है। किसी भी गरीब, दलित अथवा वंचित को उसके बुनियादी संवैधानिक अधिकारों से महरूम न किया जा सके, इसके लिए अत्यंत आवश्यक है कि ऐसे सभी अवैध नामों को मतदाता सूची से तत्काल छांटकर बाहर किया जाए।
इसी संदर्भ में केंद्रीय गृहमंत्री की पुरानी टिप्पणी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ईवीएम में वास्तव में कोई खराबी या गड़बड़ी होती, तो उसी प्रणाली के तहत चुनकर आए राहुल गांधी को संसद में शपथ लेने के बजाय तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि जिस दल ने 1975 में देश पर आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोंटा था, वह आज किस मुंह से लोकतंत्र और संविधान बचाने का उपदेश दे रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी अथवा कांग्रेस पार्टी देश की जनता से आपातकाल के काले दौर के लिए कभी माफी मांगेंगे।
लोकतंत्र में बदले की भावना नहीं, बदलाव की ताकत
समाजवादी पार्टी के प्रमुख के हालिया वक्तव्य पर कड़ा प्रतिवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में दिया गया सपा अध्यक्ष का वह बयान बेहद विचित्र था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगली पीढ़ी हर लाठी और हर जख्म का बदला लेगी। इस पर तंज कसते हुए योगी ने कहा कि लोकतंत्र में बदले की कोई जगह नहीं होती, बल्कि लोकतंत्र में जनता बदलाव करने का काम करती है। यह बदलाव जनता जनार्दन ने 2014 के आम चुनाव में देश भर में करके दिखाया और 2017 में उत्तर प्रदेश की सत्ता में बदलाव लाकर प्रमाणित किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014, 2017, 2019, 2022 और 2024 के चुनावों की एक अटूट श्रृंखला रही है, जिसमें जनता ने भारतीय जनता पार्टी की विकासोन्मुख नीतियों पर मुहर लगाते हुए ऐतिहासिक विजय यात्रा को आगे बढ़ाया है। इस समूचे कालखंड में जनता उत्तर प्रदेश के इन दो लड़कों की जोड़ी की विफलता को बार-बार देख चुकी है। यह जोड़ी अपनी पराजय के कारणों और अपनी नकारात्मक राजनीति का आत्ममंथन करने के बजाय हर बार कोई न कोई नया बहाना खोजती है। कभी ईवीएम पर सवाल उठाए जाते हैं, तो कभी अन्य प्रक्रियाओं पर ठीकरा फोड़ा जाता है। हकीकत यही है कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नकारात्मक दृष्टिकोण को जनता लगातार सिरे से खारिज कर रही है। जब ये दल हारते हैं तो कमल, ईवीएम, संवैधानिक संस्थाएं और यहां तक कि लोकतंत्र भी उन्हें खतरे में दिखाई देने लगता है।
कार्यक्रम में शामिल बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों पर जनता को भ्रमित करने और विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया। अपने संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव पर कटाक्ष करते हुए उनकी तुलना ऐसे पटाखे से की जिसका बारूद पहले ही समाप्त हो चुका हो और केवल धुआं ही शेष रह गया हो।



















