जापान सरकार वित्तीय बाजारों में जारी भारी उठापटक और विनिमय दरों की दिशा पर बेहद पैनी और सतर्क नजर बनाए हुए है। टोक्यो में प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विदेशी मुद्रा बाजार में किसी भी तरह के असामान्य रुख को गंभीरता से देखा जा रहा है। बुधवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान जापान के डिप्टी चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने इस बात की पुष्टि की कि सरकारी व्यवस्थाएं वित्तीय गतिविधियों को बहुत ही संवेदनशील नजरिए से देख रही हैं। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी मुद्रा दबाव का सामना कर रही है।
मिनोरू किहारा ने बाजार के बदलते मिजाज पर टिप्पणी करते हुए कहा, "बाजार कई तरह के कारकों के आधार पर आगे बढ़ते हैं।" सरकारी तंत्र की इस टिप्पणी के तुरंत बाद जापानी येन पर कोई बड़ा अचानक प्रभाव दर्ज नहीं किया गया। मुद्रा विनिमय बाजार में यह बयान आने के समय तक यूएसडी/जेपीवाई 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 158.00 के बेहद करीब कारोबार कर रहा था। निवेशक लंबे समय से इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि विनिमय दर में आने वाले बड़े झटकों पर टोक्यो का क्या रुख रहता है।
जापानी येन का वैश्विक कद और उसके निर्धारक तत्व
जापानी येन दुनिया की सबसे ज्यादा कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में इसका स्थान बेहद अहम माना जाता है, जहां हर दिन अरबों डॉलर का लेनदेन इसके माध्यम से होता है। जापानी मुद्रा का मूल्य मुख्य रूप से जापान की घरेलू अर्थव्यवस्था के संपूर्ण प्रदर्शन से तय होता है। इसके साथ ही बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीतियां, जापानी और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर, तथा वैश्विक व्यापारियों के बीच जोखिम की भावना भी येन के उतार चढ़ाव को तय करने वाले प्राथमिक कारक हैं।
बैंक ऑफ जापान के मुख्य संवैधानिक दायित्वों में देश की मुद्रा पर नियंत्रण बनाए रखना शामिल है। यही कारण है कि केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों को येन के भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। बैंक ऑफ जापान ने ऐतिहासिक रूप से मुद्रा बाजारों में सीधे तौर पर हस्तक्षेप भी किया है। आम तौर पर यह हस्तक्षेप जापानी मुद्रा के मूल्य को कम रखने के उद्देश्य से किया जाता रहा है ताकि देश का निर्यात प्रतिस्पर्धी बना रहे। हालांकि अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों की राजनीतिक चिंताओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक इस तरह के प्रत्यक्ष दखल से काफी हद तक परहेज भी करता है।
नीतियों का अलगाव और बॉन्ड यील्ड का खेल
साल 2013 से लेकर 2024 के बीच बैंक ऑफ जापान ने अत्यधिक उदार मौद्रिक नीति का रास्ता चुना था। इस लंबे दशक में बैंक ऑफ जापान और दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के बीच नीतियों का एक बड़ा अलगाव पैदा हो गया था। वैश्विक स्तर पर जब अन्य देश ब्याज दरों में बदलाव कर रहे थे, तब जापान ने बेहद ढीली नीतियां जारी रखीं। इस नीतिगत अंतर के कारण जापानी येन अपनी प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं की तुलना में लगातार कमजोर होता चला गया।
विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के रुख में जमीन आसमान का फर्क देखा गया। इस फर्क ने 10 वर्षीय अमेरिकी और जापानी बॉन्ड के प्रतिफल के अंतर को काफी चौड़ा कर दिया। बॉन्ड यील्ड के इस बड़े फासले ने अमेरिकी डॉलर को जापानी मुद्रा के मुकाबले लगातार मजबूत बनाए रखा। हालांकि साल 2024 में बैंक ऑफ जापान ने अपनी इस अत्यधिक ढीली मौद्रिक नीति को धीरे धीरे समाप्त करने का बड़ा फैसला लिया। इसके साथ ही दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कटौती का चक्र शुरू किया। इन दोनों परिस्थितियों के मिलने से अमेरिका और जापान के बीच बॉन्ड यील्ड का अंतर अब सिकुड़ रहा है, जिसने जापानी मुद्रा को निचले स्तरों पर ठोस सहारा दिया है।
सुरक्षित निवेश का दर्जा और संकट के दौर में येन
वैश्विक वित्तीय जगत में जापानी येन को एक सुरक्षित निवेश संपत्ति यानी सेफ हेवन के रूप में देखा जाता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय उथल पुथल, राजनीतिक संकट या बाजार में तनाव बढ़ता है, निवेशक अपनी पूंजी को जापानी मुद्रा में लगाना अधिक पसंद करते हैं। निवेशकों का यह भरोसा येन की मानी हुई विश्वसनीयता और ऐतिहासिक स्थिरता पर आधारित होता है। जब भी बाजार में अनिश्चितता का माहौल गहराता है, तब जोखिम भरी मानी जाने वाली अन्य मुद्राओं की तुलना में येन की मजबूती काफी बढ़ जाती है।
बुधवार के कारोबारी सत्र में भी ठीक ऐसा ही देखने को मिला। एशियाई सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई पर भारी बिकवाली का दबाव बना रहा और यह फिसलकर 158.00 के नीचे चला गया। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की शुरुआती मतगणना के बाद बढ़ी राजनीतिक अनिश्चितता के कारण अमेरिकी डॉलर एक महीने के निचले स्तर तक लुढ़क गया। वाशिंगटन में विधायी गतिरोध की संभावना ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकानों की ओर धकेल दिया। इस सुरक्षित प्रवाह ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई गिरावट पैदा की, जिससे ग्रीनबैक पर दबाव और गहरा गया।
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और वैश्विक बाजारों पर असर
राजनीतिक मोर्चे पर अमेरिकी संसद के दोनों सदनों से आ रहे संकेतों ने वैश्विक मुद्रा बाजार को हिलाकर रख दिया है। हाउस और सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत ने वाशिंगटन में राजनीतिक गतिरोध के हालात बना दिए हैं। इस घटनाक्रम के चलते यूएस डॉलर इंडेक्स, जो दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को मापता है, बुधवार को एशियाई सत्र में भारी बिकवाली की चपेट में आ गया। यह सूचकांक गिरकर सितंबर के अंत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
इस व्यापक राजनीतिक उथल पुथल का असर केवल येन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अन्य संपत्तियों में भी देखा गया। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर यानी एयूडी/यूएसडी अपने दो सप्ताह के निचले स्तर से ऊपर संभलते हुए 0.6965 के पास स्थिर रहा। मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों से अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और सुरक्षित संपत्तियों की मांग ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को गिरा दिया, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के दांव बेअसर हो गए। हालांकि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के कम आक्रामक रुख ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की बढ़त को एक सीमा में बांधे रखा।
वहीं दूसरी ओर सोने की कीमतों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई। पीली धातु शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के काफी ऊपर बनी रही और अपने साप्ताहिक उच्चतम स्तर के पास मजबूती से टिकी रही। अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और वाशिंगटन में राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में जमकर खरीदारी की, जिससे अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल नीचे गिरा और बहुमूल्य धातुओं को मजबूत समर्थन मिला।


















