भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के 75 वर्ष की उम्र में अचानक हुए निधन से मनोरंजन जगत गहरे सदमे में है। इस दुखद घड़ी में शाहरुख खान ने एक बेहद भावुक संदेश साझा करते हुए अपने वरिष्ठ साथी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। अपने इस संस्मरण में उन्होंने नाना पाटेकर के साथ अपनी पहली मुलाकात से लेकर वर्षों की आत्मीय दोस्ती, उनकी अनमोल नसीहतों और साथ बिताए यादगार पलों को विस्तार से याद किया। शाहरुख के अनुसार, नाना उन दुर्लभ शख्सियतों में शामिल थे जो कभी किसी की झूठी खुशामद नहीं करते थे, बल्कि वही बात सीधे मुंह कहते थे जो सामने वाले के हित में होती थी।
पहली ही मुलाकात में मिली थी दिखावे से दूर रहने की नसीहत
शाहरुख खान ने नाना पाटेकर के साथ अपनी शुरुआती मुलाकात का एक दिलचस्प वाकया याद करते हुए बताया कि जब वह पहली बार उनके सामने आए, तो वह काफी सहमे हुए और नर्वस महसूस कर रहे थे। उस घबराहट में जब शाहरुख अपने बाल संवारने लगे, तो नाना ने तुरंत उनका हाथ रोक दिया था। उन्होंने सख्त लहजे में हिदायत दी कि किसी फिल्मी नायक की तरह संवरने की कोशिश करने के बजाय अपनी पहचान एक सच्चे अभिनेता के रूप में बनाए रखें।
शाहरुख ने आगे लिखा कि नाना ने कभी भी किसी को लुभाने वाली मीठी बातें नहीं कीं। उनके स्वभाव की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि जो बात उन्हें सही लगती थी, वह बिना किसी लाग-लपेट के सामने रख देते थे। बाहर से थोड़े रूखे और बेहद सीधे दिखने वाले नाना अंदर से पूरी तरह पारदर्शी थे और उनकी मुस्कान में एक अनोखा आकर्षण था।
कड़क मिजाज के पीछे छुपा रहता था गहरा अपनापन
नाना पाटेकर के प्यार जताने के अनोखे तरीके को याद करते हुए शाहरुख ने बताया कि नाना का अंदाज हमेशा दूसरों से जुदा रहता था। वह अक्सर बातचीत की शुरुआत तेज डांट से करते थे, जिससे पहली नजर में ऐसा लगता था कि वह काफी नाराज हैं। लेकिन थोड़ी ही देर में यह अहसास हो जाता था कि उस तल्खी के पीछे कितना गहरा स्नेह और अपनापन छुपा था।
शाहरुख ने स्वीकार किया कि दोनों के बीच एक बेहद गहरा रिश्ता था। उनके लिए नाना केवल एक मंझे हुए वरिष्ठ अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि वह एक मार्गदर्शक, शिक्षक, आलोचक और सच्चे दोस्त की भूमिका भी निभाते थे। दोनों के बीच कैरम का खेल भी जुड़ाव का एक बड़ा जरिया था। शाहरुख ने हल्के-फुल्के अंदाज में बताया कि कैरम के बोर्ड पर नाना लगातार मुकाबले जीतते थे और अपनी हर जीत का पूरे उत्साह से जश्न मनाते थे।
अभिनय का असली फलसफा और अधूरे वक्त का मलाल
नाना के जाने के बाद शाहरुख ने उनके द्वारा दी गई एक ऐसी सीख को दोहराया जो उनके दिल के बेहद करीब रही है। नाना अक्सर उन्हें कला की बारीकियों से अवगत कराते थे और उन्होंने एक बार कहा था कि एक चमक-दमक वाले स्टार बनने की होड़ में अपने भीतर के असल कलाकार को कभी खोने मत देना। यही बात शाहरुख ने अपने विदाई संदेश के समापन पर भी प्रमुखता से लिखी।
शाहरुख ने लिखा कि नाना का गहरा अभिनय, उनका ठहाका, बेबाक विचार और असीम स्नेह हमेशा दिलों में जिंदा रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने इस बात का अफसोस भी जताया कि काश उन्हें नाना के साथ बैठकर चाय पीने, गंभीर मुद्दों पर बहस करने और कैरम की कुछ और बाजियां खेलने का थोड़ा अतिरिक्त वक्त मिल पाता।
सिनेमाई दुनिया में पैदा हुआ बड़ा शून्य
शाहरुख खान ने कहा कि नाना पाटेकर के दुनिया से चले जाने के कारण केवल फिल्म जगत को ही नुकसान नहीं हुआ है, बल्कि देश-विदेश के अनगिनत प्रशंसकों के दिलों में भी एक गहरा खालीपन आ गया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए कहा कि एक उम्दा कलाकार और माहिर कैरम खिलाड़ी के पहुंचने से अब स्वर्ग की महफिल भी और समृद्ध हो जाएगी।
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट की वजह से निधन हो गया। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें तड़के करीब 4:30 बजे अस्पताल लाया गया था। वहां मौजूद मेडिकल टीम ने उन्हें बचाने के लिए लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक लगातार प्रयास किए, लेकिन उनकी स्थिति को संभाला नहीं जा सका। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उनकी हालत अत्यंत नाजुक हो चुकी थी।


















