भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे बने हैं जिनकी गूंज दशकों बाद भी कम नहीं होती। 37 साल पहले 1989 में जब निर्देशक यश चोपड़ा की रोमांटिक फिल्म ‘चांदनी’ सिनेमाघरों में उतरी, तब उसके एक खास गीत ने पूरे उपमहाद्वीप के श्रोताओं को दीवाना बना दिया था। ऋषि कपूर और श्रीदेवी पर फिल्माए गए इस टाइटल ट्रैक का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान में भी इसकी धुन इस कदर छाई कि वहां के फिल्मकारों ने इसे सीधे अपनी फिल्म में उतार लिया। उस दौर में एक्शन फिल्मों के दबदबे के बीच एक विशुद्ध संगीतमय प्रेम कहानी लाना अपने आप में बहुत बड़ा साहसिक कदम माना गया था।
संदेहों के बीच यश चोपड़ा का बड़ा रचनात्मक दांव
साल 1989 में जब ‘चांदनी’ के निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी, तब निर्देशक कुछ बिल्कुल अनोखा पेश करना चाहते थे। इस प्रोजेक्ट के दौरान पटकथा में कई बार बदलाव किए गए ताकि कहानी दर्शकों के दिल को सीधे छू सके। फिल्म में ऋषि कपूर, श्रीदेवी और विनोद खन्ना ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। शुरुआत में फिल्म उद्योग के जानकारों का अनुमान था कि यह प्रयोग शायद टिकट खिड़की पर सफल न हो सके। हालांकि जब फिल्म रिलीज हुई, तो इसने सारे कयासों को गलत साबित करते हुए ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। फिल्म के हर गीत को व्यापक सराहना मिली और संगीत प्रेमियों के बीच इसका जादू सिर चढ़कर बोलने लगा।
स्विट्जरलैंड की वादियों में रचा गया क्लासिक रोमांस
इस पूरे संगीत सफर का सबसे चमकता सितारा बना टाइटल गीत ‘चांदनी ओ मेरी चांदनी’। इस गाने को स्विट्जरलैंड के सुरम्य और बर्फीले प्राकृतिक नजारों के बीच कैमरे में कैद किया गया था, जिसने परदे पर एक नया विजुअल आकर्षण पैदा किया। गाने में ऋषि कपूर और श्रीदेवी की सहज अदाकारी के साथ-साथ गायकी का भी अनोखा तालमेल दिखा। श्रीदेवी ने खुद जॉली मुखर्जी के साथ मिलकर इस ट्रैक को अपनी आवाज दी थी। वहीं जाने-माने गीतकार आनंद बख्शी के लिखे बोलों को शास्त्रीय संगीत के दिग्गज शिव-हरि की जोड़ी ने एक अमर धुन में पिरोया था, जबकि सरोज खान की कोरियोग्राफी ने इसमें जान फूंक दी थी।
1991 में पाकिस्तानी फिल्म ने किया पूरा रीक्रिएशन
इस भारतीय गीत की दीवानगी का आलम यह था कि ठीक दो साल बाद 1991 में पाकिस्तान में निर्देशक अल्ताफ हुसैन की फिल्म ‘नादिरा’ रिलीज हुई। इस फिल्म में मुख्य गीत का नाम बदलकर ‘नादिरा ओ मेरी नादिरा’ रखा गया, जिसकी पूरी धुन, संगीत संयोजन और यहां तक कि शूटिंग की लोकेशंस भी भारतीय मूल गीत की हूबहू नकल थीं। पाकिस्तानी अखबार डॉन को दिए एक साक्षात्कार में उस देश के मशहूर गायक ए. नय्यर ने इस बात की पुष्टि की थी। उन्होंने बताया था कि उन्हें सीधे तौर पर हिंदी गीत ‘चांदनी ओ मेरी चांदनी’ की तर्ज पर ही ट्रैक गाने के निर्देश दिए गए थे, जिसे केवल मुख्य किरदार के नाम के अनुरूप बदला गया था।
साढ़े तीन दशक बाद भी कायम है संगीत का जादू
रिलीज के 37 वर्षों बाद भी यह रचना एक सदाबहार गीत के रूप में याद की जाती है। भारत और पाकिस्तान दोनों ही मुल्कों में संगीत के कद्रदान आज भी इसे उतने ही चाव से सुनते हैं। अभिनेताओं की यादगार केमिस्ट्री, सरोज खान का नृत्य निर्देशन, आनंद बख्शी के सदाबहार शब्द और शिव-हरि का सम्मोहक संगीत इस गीत को उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धरोहर का एक अनूठा हिस्सा बना चुके हैं।

















