हिंदी सिनेमा में एक दशक का सफर पूरा कर चुकीं अभिनेत्री सैयामी खेर ने अपने करियर की शुरुआती चुनौतियों और संघर्षों को खुलकर बयां किया है। नासिक की एक अंतर्मुखी युवती से लेकर बड़े पर्दे पर अपनी अलग पहचान बनाने तक का उनका यह रास्ता आसान नहीं रहा। जब वह करीब बीस साल की उम्र में पहली बार फिल्म सेट पर पहुंची थीं, तब उन्हें सिनेमा जगत के कामकाज का कोई खास अंदाजा नहीं था। ऐसे माहौल में उन्हें न केवल लगातार खारिज किए जाने का दर्द झेलना पड़ा, बल्कि कई तरह की अवांछित नसीहतों का भी सामना करना पड़ा।
रूढ़िवादी टिप्पणियां और दिखावे की बेतुकी सलाहें
इंडस्ट्री में शुरुआत करते वक्त लोगों ने उनके रूप-रंग और व्यक्तित्व को लेकर कई तरह की बातें बनाईं। उन्हें सीधे तौर पर यह तक कह दिया गया कि वह गांव की लड़की जैसी दिखती हैं और उनमें एक पेशेवर अभिनेत्री बनने की बुनियादी क्षमता ही नहीं है। इतना ही नहीं, करियर में तेजी से आगे बढ़ने के लिए उन्हें शॉर्टकट अपनाने के सुझाव भी दिए गए। कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वह अपनी जगह पक्की करने के लिए किसी बड़े अभिनेता या निर्देशक को डेट करना शुरू कर दें, क्योंकि उनके मुताबिक यह इंडस्ट्री में पहचान बनाने का सबसे सहज तरीका था।
शारीरिक दिखावे को लेकर भी उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्हें चेहरे पर कॉस्मेटिक सर्जरी करवाने और लिप जॉब कराने तक के सुझाव दिए गए। हालांकि, सैयामी ने इन बाहरी दबावों के आगे घुटने टेकने से साफ मना कर दिया। उनके मुताबिक, माता-पिता से मिली मजबूत परवरिश और आंतरिक आत्मविश्वास ने उन्हें बिखरने नहीं दिया। कई मौकों पर ऐसी गैरजरूरी और अजीबोगरीब बातें सुनकर उन्हें नाराज होने के बजाय हंसी आ जाती थी। एक तरफ जहां उन्हें हर दिन रिजेक्शन का सामना करना पड़ता था, वहीं दूसरी तरफ मुफ्त की सलाह देने वालों की कोई कमी नहीं थी।
वर्कशॉप का दौर और करियर का अहम मोड़
लगातार खारिज होने के इसी दौर में उनके करियर ने एक नया मोड़ लिया। उन्हें अदूर मुखर्जी का एक फोन आया, जिन्होंने बताया कि दिलीप शंकर उनका स्क्रीन टेस्ट लेने वाले हैं। यह अवसर पहले मिले तमाम मौकों से बिल्कुल अलग और रचनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ। इसके बाद सैयामी ने अभिनय की बारीकियां सीखने के लिए दिलीप शंकर और आदिल हुसैन के साथ लगभग तीन महीने तक सघन वर्कशॉप में हिस्सा लिया।
इन तीन महीनों ने उनके सोचने और काम करने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया। इस दौरान उन्होंने सीखा कि एक कलाकार के रूप में अपनी मौलिकता को कभी नहीं खोना चाहिए। अपने काम के प्रति ईमानदारी, सच्चाई और खुद पर गहरा भरोसा रखना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। इस प्रशिक्षण के लगभग छह महीने बाद, उन्हें निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा की महत्वाकांक्षी फिल्म मिर्ज्या के लिए मुख्य भूमिका में चुन लिया गया।
मिर्ज्या से शुरुआत और निर्देशक का मार्गदर्शन
साल 2016 में रिलीज हुई फिल्म मिर्ज्या से सैयामी खेर ने बॉलीवुड में अपना पहला कदम रखा, जिसमें वह अभिनेता हर्षवर्धन कपूर के साथ नजर आई थीं। इस फिल्म के जरिए उन्हें इंडस्ट्री में व्यापक पहचान मिली। निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा के साथ काम करने के अनुभव को वह अपने जीवन के सबसे अनमोल अध्यायों में से एक मानती हैं।
सैयामी के अनुसार, राकेश ओमप्रकाश मेहरा उस कठिन दौर में उनके लिए ठीक वैसे ही मार्गदर्शक साबित हुए जैसी उन्हें जरूरत थी। निर्देशक ने उन्हें सेट पर एक कलाकार के रूप में खुद को खुलकर अभिव्यक्त करने की पूरी छूट दी और अभिनय की कला से गहरा लगाव पैदा कराया। उनके प्रोत्साहन और स्नेह ने सैयामी को इंडस्ट्री में अपनी वास्तविक पहचान के साथ टिके रहने का संबल दिया।

















