फिल्म उद्योग में परिवारों से ताल्लुक रखने वाली नई पीढ़ी के लिए अक्सर यह मान लिया जाता है कि उनकी परवरिश सिनेमा के सेट और फिल्मी माहौल के बीच ही होती है। हालांकि, अभिनेत्री अथिया शेट्टी की जिंदगी की शुरुआत इससे बिल्कुल अलग ढंग से हुई। एक बड़े फिल्मी सितारे की संतान होने के बावजूद उनका बचपन कड़े अनुशासन, तय नियमों और फिल्मी चकाचौंध से दूर बीता। उनके घर में न तो फिल्मी पत्रिकाओं को लाने की अनुमति थी और न ही बच्चों को शूटिंग के सेट पर जाने दिया जाता था। इस कड़े सुरक्षात्मक और सादगी भरे माहौल के बाद भी अथिया ने आगे चलकर अभिनय की ही दुनिया को अपने करियर के रूप में चुना।
साउथ मुंबई में सादगी से भरा बचपन
5 नवंबर 1992 को मुंबई में जन्मी अथिया शेट्टी के पिता सुनील शेट्टी हिंदी सिनेमा के एक बड़े नाम हैं, जबकि उनकी मां माना शेट्टी एक फैशन डिजाइनर और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। आमतौर पर फिल्मी हस्तियों के परिवार जुहू या बांद्रा जैसे इलाकों में रहते हैं, जहां फिल्म इंडस्ट्री का प्रभाव बेहद गहरा होता है। इसके उलट, माना शेट्टी और सुनील शेट्टी ने अपने बच्चों की परवरिश साउथ मुंबई के अल्टमाउंट रोड वाले इलाके में करने का फैसला किया। उनका प्राथमिक उद्देश्य यह था कि अथिया और उनके भाई अहान शेट्टी दोनों ही एक आम बच्चे की तरह बड़े हों और उन्हें स्टार किड होने की वजह से किसी तरह का असामान्य दबाव न झेलना पड़े।
फिल्म पत्रिकाओं और शूटिंग सेट पर पूरी तरह रोक
आज के दौर में जहां बच्चों और किशोरों के लिए स्क्रीन टाइम और मनोरंजन पर निगरानी रखना एक कठिन चुनौती बन चुका है, वहीं अथिया शेट्टी के बचपन में मनोरंजन की हर गतिविधि पर माता-पिता की सख्त नजर रहती थी। सुनील शेट्टी के घर में एक कड़ा नियम लागू था कि घर की दहलीज के भीतर कोई भी फिल्मी मैगजीन नहीं आएगी। इसके अलावा, अथिया और अहान को अपने पिता की फिल्मों के सेट पर जाने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं थी।
इस कड़े फैसले के पीछे सुनील शेट्टी की सोच बेहद स्पष्ट थी। वे नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म जगत की अफवाहों, गॉसिप या किसी भी किस्म की नकारात्मक सुर्खियों को पढ़कर बड़े हों। फिल्म इंडस्ट्री में आने वाली सफलता और नाकामी, उतार-चढ़ाव और मीडिया ट्रायल का असर बच्चों के कोमल मन पर न पड़े, इसलिए उन्हें लाइमलाइट से मीलों दूर रखा गया ताकि वे एक सुरक्षित, स्वस्थ और सहज बचपन जी सकें।
सेवा भाव और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव
ग्लैमर से दूर रखने के साथ-साथ अथिया शेट्टी में बचपन से ही सामाजिक कार्यों के संस्कार रोपे गए। जब वे मात्र 10 से 12 साल की थीं, तभी से वे अपनी मां और नानी द्वारा संचालित संस्था 'सेव द चिल्ड्रन इंडिया' से जुड़ गईं। वहां वे नियमित रूप से विशेष जरूरतों वाले बच्चों को पढ़ाने और उनके रोजमर्रा के कामों में हाथ बंटाने का काम करती थीं। इस अनुभव ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने और समाज की वास्तविकताओं को समझने में बड़ी मदद की।
इंटरनेशनल स्कूल और शिक्षकों का चयन
बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को लेकर भी सुनील शेट्टी ने एक खास रणनीति बनाई थी। एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने इस बात का जिक्र किया था कि उन्होंने अपने बच्चों को भारतीय बोर्ड वाले स्कूलों के बजाय इंटरनेशनल या अमेरिकन बोर्ड के स्कूल में क्यों भेजा। सुनील शेट्टी के अनुसार, वे चाहते थे कि बच्चों के स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक और अन्य स्टाफ विदेशी अथवा अमेरिकी हों, जिन्हें भारतीय सिनेमा और यहां के फिल्मी सितारों के बारे में ज्यादा जानकारी न हो।
इस व्यवस्था की वजह से स्कूल में अथिया और अहान पर 'सुनील शेट्टी के बच्चे' होने का कोई खास लेबल नहीं लगा। उन्हें किसी भी तरह का विशेषाधिकार या अनावश्यक दबाव नहीं मिला। शिक्षकों के लिए वे अन्य आम विद्यार्थियों की तरह थे, जिससे वे अपनी व्यक्तिगत पहचान के साथ बिना किसी हीनभावना या अतिरिक्त दंभ के सामान्य रूप से विकसित हो सके।
एयरपोर्ट पर अचानक बदला फैसला और सिनेमा की ओर रुख
घर में इतनी पाबंदियों और सुरक्षात्मक माहौल के बावजूद सिनेमा के प्रति अथिया शेट्टी का आकर्षण कम नहीं हुआ। अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के अटलांटा स्थित एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया था। वे अपनी आगे की पढ़ाई शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार थीं, लेकिन ऐन वक्त पर एयरपोर्ट पर उनका मन बदल गया।
एयरपोर्ट पर खड़े होकर अथिया ने अपने पिता सुनील शेट्टी को अपने दिल की बात बताई कि वे अकादमिक दुनिया के बजाय फिल्मों और अभिनय के क्षेत्र में ही अपना जीवन बनाना चाहती हैं। बेटी के इस दृढ़ संकल्प को देखते हुए परिवार ने उनके फैसले का सम्मान किया। इसके बाद अथिया अकेले न्यूयॉर्क शहर चली गईं और वहां की प्रतिष्ठित न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी में प्रवेश लिया।
न्यूयॉर्क में रहकर उन्होंने फिल्ममेकिंग और लिबरल आर्ट्स में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की। अभिनय की तकनीकी और रचनात्मक बारीकियों को गहराई से सीखने के बाद, उन्होंने साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म 'हीरो' के जरिए बॉलीवुड में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर अपना औपचारिक सफर शुरू किया।


















