कुंभ साप्ताहिक राशिफल: नए आकर्षण के प्रभाव में पुराने रिश्तों की अनदेखी से बचेंबिहार के मंटू चंद्रवंशी ने पारंपरिक नुस्खों से खड़ा किया देसी मिठाई का कारोबार, 15 से 20 महिलाओं को मिला सहाराराजस्थान में कीमती धातुओं में भारी मंदी, चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई से आधी हुई और सोना भी फिसलानाश्ते में परोसें कुरकुरा प्याज लच्छा पराठा, स्वाद ऐसा कि हर कोई उंगलियां चाटता रह जाएराजस्थान कैडर में लौटे वरिष्ठ अधिकारी गौरव गोयल, लोकसभा सचिवालय से हुए कार्यमुक्तगुजरात के राजकोट में प्री-बर्थडे शराब पार्टी पर पुलिस का छापा, 76 लोग पकड़े गएबिरसा मुंडा हवाई अड्डे पर धुंध का असर, इंडिगो की दो उड़ानें देरी से हुईं रवानामूलांक 2 अंकज्योतिष भविष्यफल 1 नवंबर 2026: भावुकता पर रखें नियंत्रण, दस्तावेजी कार्यों और फैसलों में बरतें सतर्कताउज्जैन के होटल श्री गंगा में अपशिष्ट कक्ष की सफाई के दौरान चार कर्मियों की मौतसर्दियों की दस्तक के साथ घर के बगीचे को सजाने के आसान तरीके, फूलों से लेकर बौने फलदार पौधे लाएंगे हरियाली
लता मंगेशकर की भतीजी पद्मिनी कोल्हापुरे कैसे बनीं बॉलीवुड की चर्चित स्टार, जानें उनके सफर की पूरी कहानीबॉलीवुड
1 नव॰ 2026, 7:27 am (2 घंटे पहले)· 0

लता मंगेशकर की भतीजी पद्मिनी कोल्हापुरे कैसे बनीं बॉलीवुड की चर्चित स्टार, जानें उनके सफर की पूरी कहानी

सात साल की उम्र में कोरस गायिकी से शुरुआत करने वाली पद्मिनी कोल्हापुरे ने बेहद कम उम्र में शीर्ष पुरस्कार हासिल किए। जानिए देव आनंद और राज कपूर के साथ उनके करियर की पूरी दास्तान।

बॉलीवुड में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करके मुख्य नायिका के तौर पर अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले कलाकारों की फेहरिस्त में पद्मिनी कोल्हापुरे का नाम बेहद खास मुकाम रखता है। सात वर्ष की छोटी उम्र से सिने जगत में कदम रखने वाली इस अभिनेत्री ने अभिनय की दुनिया में न केवल कई यादगार किरदार गढ़े, बल्कि महज 15 साल की उम्र में अपनी अदाकारी के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार भी अपने नाम कर लिया। गायन की पृष्ठभूमि से निकलकर सिल्वर स्क्रीन पर छा जाने का उनका यह सफर कई दिलचस्प मोड़ों और संघर्षों से भरा रहा है।

संगीत से सराबोर परिवार और मंगेशकर बहनों से नाता

पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई की धरती पर हुआ था। कला और सुरों से उनका जुड़ाव जन्मजात रहा, क्योंकि उनके पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे स्वयं एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय संगीतकार थे। उनकी मां अनुपमा एक एयरलाइन संस्था में कार्यरत थीं। परिवार में कला का वातावरण होने की वजह से उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे ने भी गायन और फिल्म उद्योग का रुख किया। शिवांगी का विवाह आगे चलकर अभिनेता शक्ति कपूर के साथ हुआ, जिनकी सुपुत्री श्रद्धा कपूर वर्तमान समय में हिंदी सिनेमा की जानी-मानी मुख्य अभिनेत्रियों में शुमार हैं। इस पारिवारिक रिश्ते के चलते पद्मिनी कोल्हापुरे रिश्ते में श्रद्धा कपूर की मौसी लगती हैं। इसके अलावा पद्मिनी के पिता पंढरीनाथ का संबंध सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ था, क्योंकि वे दोनों मशहूर गायिकाओं के फर्स्ट कजिन थे। पारिवारिक रिश्तों में पद्मिनी गायिका आशा भोसले को आदर और स्नेह से आशा आत्या कहकर पुकारती थीं।

ये भी पढ़ें

कोरस गायन से लेकर देव आनंद के साथ पहली फिल्म का मौका

बचपन के दिनों में पद्मिनी को गायन और नृत्य का गहरा शौक था। सात साल की आयु में ही उन्होंने रिकॉर्डिंग स्टूडियो और फिल्मी दुनिया में समय बिताना शुरू कर दिया था। फिल्मी दुनिया में उनकी वास्तविक शुरुआत अभिनय से नहीं, बल्कि पार्श्व गायन में कोरस गाने से हुई थी। वह अपनी बहन शिवांगी के साथ मिलकर कई मशहूर फिल्मों के गीतों में बैकग्राउंड आवाज दिया करती थीं। उन दोनों बहनों की सुरीली आवाज यादों की बारात, किताब तथा दुश्मन दोस्त जैसी प्रमुख फिल्मों के गानों के कोरस में शामिल रही। इसी दौरान उनकी आशा भोसले से लगातार मुलाकातें होती रहती थीं। एक बार आशा भोसले ने जाने-माने अभिनेता व फिल्मकार देव आनंद से बातचीत की और उनसे अनुरोध किया कि यदि उनकी किसी परियोजना में कोई उपयुक्त किरदार हो, तो वे नन्हीं पद्मिनी को काम करने का अवसर दें। इस सिफारिश के बाद देव आनंद ने अपनी फिल्म इश्क इश्क इश्क में पद्मिनी को एक भूमिका सौंपी। इस तरह महज बालपन में बिना किसी योजना के उनके पेशेवर अभिनय का सफर शुरू हो गया।

बाल कलाकार के तौर पर पहचान और राज कपूर का मार्गदर्शन

अपनी पहली फिल्म के बाद पद्मिनी ने एक बाल कलाकार के रूप में कई अन्य परियोजनाओं में काम जारी रखा। उन्होंने जिंदगी और ड्रीम गर्ल जैसी लोकप्रिय फिल्मों में बाल भूमिकाएं निभाकर अपनी अभिनय क्षमता को तराशा। इसके बाद उन्हें महान फिल्मकार राज कपूर की कालजयी कृति सत्यम शिवम सुंदरम में अभिनय करने का बड़ा अवसर मिला। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य नायिका रूपा के बचपन का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और आलोचकों द्वारा खूब सराहा गया। रूपा के बाल रूप में उनके सहज अभिनय ने राज कपूर पर गहरा प्रभाव छोड़ा। यही वजह रही कि कुछ वर्षों बाद जब राज कपूर अपनी नई फिल्म प्रेम रोग की योजना बना रहे थे, तो उन्होंने पद्मिनी को इस फिल्म की केंद्रीय नायिका का किरदार सौंपने का फैसला किया।

प्रेम रोग और इंसाफ का तराजू से मिली ऐतिहासिक सफलता

साल 1980 में रिलीज हुई फिल्म इंसाफ का तराजू पद्मिनी कोल्हापुरे के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए संजीदा और संवेदनशील किरदार ने सिने प्रेमियों को झकझोर कर रख दिया। बेहतरीन अदाकारी के बूते उन्होंने महज 15 वर्ष की आयु में फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान जीत लिया। इतनी कम उम्र में इस स्तर का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना उस दौर में एक असाधारण कीर्तिमान था। सफलता का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद 1982 में जब राज कपूर निर्देशित फिल्म प्रेम रोग सिनेमाघरों में आई, तो उसमें ऋषि कपूर के साथ पद्मिनी की जोड़ी को जबर्दस्त लोकप्रियता मिली। इस फिल्म में उन्होंने मनोरमा नाम की एक युवा विधवा की जटिल और भावुक भूमिका निभाई थी, जो तत्कालीन समाज के कड़े नियमों, भेदभाव और परंपराओं की चुनौतियों से जूझती है। इस शानदार अभिनय के लिए उन्हें 1982 में फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब प्रदान किया गया।

मराठी फिल्मों में जलवा और पारिवारिक जीवन

अस्सी के दशक में पद्मिनी कोल्हापुरे हिंदी सिनेमा की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में शामिल हो चुकी थीं। उन्होंने विधाता, वो सात दिन, प्यार झुकता नहीं, आहिस्ता आहिस्ता, सौतन, स्वर्ग से सुंदर तथा प्यार के काबिल जैसी कई बॉक्स ऑफिस हिट फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं अदा कीं। हिंदी सिनेमा के अलावा उन्होंने अपनी मातृभाषा मराठी सिनेमा में भी उल्लेखनीय काम किया और वहां भी अपनी अदाकारी की अमिट छाप छोड़ी। अपने करियर के चरम पर पहुंचने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली थी। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वर्ष 1986 में उन्होंने फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा के साथ विवाह रचाया। इस दंपती का एक पुत्र प्रियंक शर्मा है, जो स्वयं अभिनय और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। अभिनय से लंबा अंतराल लेने के बाद उन्होंने दोबारा कैमरे का रुख किया और चिमनी पाखर, फटा पोस्टर निकला हीरो, पानीपत और प्रवास जैसी फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं निभाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।

सवाल-जवाब

पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म कब और कहां हुआ था?
पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ था।
पद्मिनी कोल्हापुरे का श्रद्धा कपूर से क्या संबंध है?
पद्मिनी कोल्हापुरे श्रद्धा कपूर की मौसी हैं, क्योंकि श्रद्धा की मां शिवांगी कोल्हापुरे पद्मिनी की बहन हैं।
पद्मिनी कोल्हापुरे को उनकी पहली फिल्म कैसे मिली थी?
दिग्गज गायिका आशा भोसले की सिफारिश पर अभिनेता देव आनंद ने उन्हें अपनी फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में मौका दिया था।
पद्मिनी कोल्हापुरे ने 15 साल की उम्र में कौन सा पुरस्कार जीता था?
उन्हें 1980 में आई फिल्म 'इंसाफ का तराजू' में अपने बेहतरीन अभिनय के लिए फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला था।
फिल्म 'प्रेम रोग' में पद्मिनी कोल्हापुरे का क्या किरदार था?
फिल्म 'प्रेम रोग' में उन्होंने मनोरमा नाम की एक युवा विधवा का किरदार निभाया था, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
पद्मिनी कोल्हापुरे के पति और बेटे का क्या नाम है?
पद्मिनी ने 1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से शादी की थी और उनके बेटे का नाम प्रियंक शर्मा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp