सिनेमा जगत में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि मुख्य भूमिका में होने के बावजूद कोई बड़ा कलाकार दर्शकों के दिलों पर वह अमिट छाप नहीं छोड़ पाता जो सह-कलाकार छोड़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही अनुभव हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ऋषि कपूर के साथ भी हुआ था। उनके करियर में दो ऐसी सुपरहिट फिल्में आईं जहां उनका दमदार योगदान होने के बावजूद सारी वाहवाही अभिनेत्रियों या अन्य कलाकारों के हिस्से में चली गई और उनका काम पीछे छूट गया।
चांदनी और श्रीदेवी का जादू
साल 1989 में मशहूर निर्देशक यश चोपड़ा ने फिल्म चांदनी का निर्देशन किया था। इस फिल्म में ऋषि कपूर ने रोहित नाम के एक ऐसे युवक की भूमिका निभाई थी जो व्हीलचेयर पर रहने को मजबूर होता है और अपनी प्रेमिका के लिए प्यार की बड़ी कुर्बानी देता है। निर्देशक ने उन्हें सफेद कपड़ों में बड़े ही शानदार तरीके से पर्दे पर पेश किया था। हालांकि उनके अभिनय में कोई कमी नहीं थी, लेकिन आज भी जब इस फिल्म का जिक्र होता है तो लोगों के जेहन में सबसे पहले श्रीदेवी का नाम और उनकी खूबसूरती ही आती है।
दामिनी और मीनाक्षी शेषाद्रि का प्रभाव
ठीक चार साल बाद 1993 में रिलीज हुई फिल्म दामिनी में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। इस प्रोजेक्ट में ऋषि कपूर ने मुख्य अभिनेत्री के पति का किरदार निभाया था, लेकिन कहानी में उनका स्क्रीन स्पेस काफी सीमित था। पूरी फिल्म का मुख्य केंद्र बिंदु मीनाक्षी शेषाद्रि रहीं, जिन्होंने अपने सशक्त अभिनय से हर दर्शक का दिल जीत लिया। फिल्म में सनी देओल के काम की भी जमकर तारीफ हुई, लेकिन ऋषि कपूर का किरदार एक बार फिर वह वाहवाही हासिल नहीं कर सका जिसके वे हकदार थे।
सुपरस्टारडम के बाद भी मिला जुदा अनुभव
ऋषि कपूर ने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई ब्लॉकबस्टर और सुपरहिट फिल्में दीं और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भी एक बहुत बड़ी हिट के साथ की थी। हालांकि उनके खाते में कुछ फ्लॉप फिल्में भी आईं, लेकिन इसके बावजूद वह हमेशा फिल्म इंडस्ट्री के चोटी के सुपरस्टार बने रहे। इन दोनों विशेष फिल्मों में उन्होंने अपनी तरफ से बेहतरीन अभिनय किया, लेकिन कहानी और निर्देशन के प्रभाव के चलते उनके हिस्से का श्रेय पूरी तरह से अन्य कलाकारों की झोली में चला गया।



















