भारतीय फिल्म संगीत की दुनिया में जब भी ऊर्जा से भरपूर धुनों और देसी तालमेल की बात आती है, तब संगीतकार और गायक वाजिद खान का काम सबसे अलग नजर आता है. उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में 7 अक्टूबर 1977 को जन्मे वाजिद के घर में पीढ़ियों से सुर और लय की साधना होती आ रही थी. उनके पिता उस्ताद शराफत अली खान देश के जाने-माने तबला वादक रहे, जबकि उनके मामा उस्ताद फैज अहमद खान शास्त्रीय गायन के बड़े उस्ताद थे. घर की इसी संगीतमय आबोहवा ने बचपन से ही उन्हें सुरों की गहरी समझ दी और वे गिटार बजाने के प्रति खास लगाव रखने लगे.
साजिद के साथ बनी जोड़ी और पहली फिल्म का आगाज
पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए वाजिद ने अपने बड़े भाई साजिद खान के साथ हाथ मिलाया और हिंदी सिनेमा में 'साजिद-वाजिद' नाम की मशहूर जोड़ी के तौर पर अपनी पहचान स्थापित की. संगीत निर्देशन की दुनिया में इस जोड़ी का सफर 1988 में अभिनेता सलमान खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' के जरिए शुरू हुआ था. इस शुरुआती कदम के बाद दोनों भाइयों ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और मुख्यधारा के सिनेमा में एक के बाद एक कई सफल फिल्मों के संगीत का जिम्मा संभाला.
चार्टबस्टर फिल्मों का सफर और ब्लॉकबस्टर एलबम
साजिद और वाजिद की इस संगीतकार जोड़ी ने हिंदी फिल्म जगत को कई जबरदस्त हिट एलबम दिए. इस सफर में 'तेरे नाम', 'मुझसे शादी करोगी', 'पार्टनर', 'वांटेड', 'वीर', 'दबंग' और 'एक था टाइगर' जैसी बड़ी फिल्में शामिल रहीं. इन फिल्मों के गानों ने आम दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और रेडियो से लेकर हर शादी-समारोह की शान बन गए.
गायन के मैदान में भी बिखेरा अपनी आवाज का जलवा
धुनें तैयार करने के साथ-साथ वाजिद खान एक बेहद जोशीले प्लेबैक सिंगर भी साबित हुए. अपनी बुलंद और दमदार आवाज के दम पर उन्होंने कई ऐसे पार्टी एंथम्स और डांस नंबर्स गाए, जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं. उनके गाए यादगार गानों में 'हुड हुड दबंग', 'मेरा ही जलवा', 'सोनी दे नखरे', 'तुझे अक्सा बीच घुमा दूं', 'फेविकोल से', 'पांडे जी सीटी' और 'हमका पीनी है' जैसे गीत प्रमुख रहे हैं.
पारिवारिक जीवन और असमय अलविदा
निजी जिंदगी की बात करें तो वाजिद खान ने साल 2003 में कमलरुख खान के साथ निकाह किया था, और इस दांपत्य जीवन से उनकी दो बेटियां हैं. संगीत की दुनिया में अपनी अनूठी छाप छोड़ने के बाद, 1 जून 2020 को मुंबई के एक अस्पताल में महज 42 वर्ष की उम्र में उनका देहांत हो गया. कम उम्र में दुनिया को अलविदा कहने के बावजूद अपने अमर तरानों और धुनों के जरिए वे हमेशा संगीत प्रेमियों की यादों में जिंदा रहेंगे.


















