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शेखर सुमन के मंच पर भावुक हुए संजय दत्त, देश में आपसी भाईचारे की वापसी पर दिया जोरबॉलीवुड
4 अक्तू॰ 2026, 7:25 am (24 दिन पहले)· 1

शेखर सुमन के मंच पर भावुक हुए संजय दत्त, देश में आपसी भाईचारे की वापसी पर दिया जोर

गांधी जयंती पर शेखर सुमन के कार्यक्रम में पहुंचे अभिनेता संजय दत्त ने राष्ट्र में पुरानी शांति और सद्भाव की वापसी की कामना की।

गांधी जयंती के विशेष अवसर पर अभिनेता संजय दत्त ने शेखर सुमन के हास्य व व्यंग्य कार्यक्रम 'शेखर टुनाइट' में शिरकत की। अपनी लोकप्रिय फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' में महात्मा गांधी के विचारों और 'गांधीगिरी' को जन-जन तक पहुंचाने वाले अभिनेता ने इस दौरान देश के मौजूदा माहौल और समाज की स्थिति पर दिल खोलकर अपनी भावनाएं रखीं। बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि वर्तमान समय में देश के भीतर पहले जैसा चैन और ठहराव नजर नहीं आता।

शांति और सद्भाव लौटने की जताई दिली उम्मीद

कार्यक्रम के दौरान अभिनेता ने भारतवासियों के स्वभाव और देश की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे देश के नागरिकों का दिल बहुत विशाल है और हमारी मूल पहचान 'अतिथि देवो भव' की पावन भावना में रची-बसी है। इसके साथ ही उन्होंने अनुभव साझा किया कि आज उन्हें समाज में वह आंतरिक शांति और गहरा सुकून नहीं मिल पा रहा है जो कभी आम बात हुआ करती थी।

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संजय दत्त ने अपने आराध्य देव से प्रार्थना करते हुए कहा,

"मैं महादेव से प्रार्थना करता हूं कि वो पुराने दिन जल्द लौट आएं"।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से एक महान राष्ट्र रहा है और वे चाहते हैं कि समाज फिर से उसी गौरव, मिठास और आपसी समझ के रास्ते पर लौटे।

जब 5 मिनट के लिए काल्पनिक प्रधानमंत्री बने अभिनेता

कार्यक्रम के संचालक शेखर सुमन ने मंच पर माहौल को रोचक बनाते हुए संजय दत्त के सामने एक काल्पनिक परिस्थिति रखी। उन्होंने अभिनेता से पूछा कि यदि उन्हें केवल 5 मिनट की अवधि के लिए देश का प्रधानमंत्री बनने का दायित्व सौंप दिया जाए, तो वे समस्त देशवासियों को क्या संदेश देना पसंद करेंगे। इसके बाद संजय दत्त ने अपने मशहूर फिल्मी किरदार मुन्नाभाई के अनोखे अंदाज और ठेठ मुंबइया बोली को अपनाते हुए भाषण शुरू कर दिया।

काल्पनिक प्रधानमंत्री की भूमिका निभाते हुए अभिनेता ने कहा कि इस बड़े पद की जिम्मेदारी संभालते ही उनके भीतर एक अलग ही रोमांचक तरंग दौड़ने लगी है। उन्होंने हास्य के लहजे में श्रोताओं को आश्वस्त किया कि वे इस नई उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं निकलेंगे, बल्कि अपने ही लोगों के बीच रहकर जनता से सीधा संपर्क और जीवंत रिश्ता बनाए रखेंगे।

बढ़ती दूरियों के दौर में आपसी मोहब्बत बढ़ाने का पैगाम

काल्पनिक प्रधानमंत्री के रूप में अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए संजय दत्त ने आज के सामाजिक जीवन की एक गंभीर सच्चाई की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में लोग भौतिक रूप से करीब होने के बावजूद भावनात्मक धरातल पर एक दूसरे से काफी दूर होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि वे सत्ता में होते तो उनके प्रशासन का सबसे बड़ा लक्ष्य लोगों के बीच प्रेम और भाईचारा स्थापित करना होता। अभिनेता के इस हाजिरजवाबी और मुन्नाभाई शैली वाले संबोधन ने सभागार में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया और पूरा मंच ठहाकों से गूंज उठा।

सवाल-जवाब

संजय दत्त किस कार्यक्रम में नजर आए?
संजय दत्त हास्य अभिनेता शेखर सुमन के व्यंग्य शो 'शेखर टुनाइट' में अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अभिनेता ने देश में शांति के संदर्भ में क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में उन्हें देश में पहले जैसी शांति और सुकून महसूस नहीं होता और वे पुराने दिनों की वापसी की प्रार्थना करते हैं।
शो में संजय दत्त को क्या काल्पनिक कार्य सौंपा गया था?
उन्हें पांच मिनट की अवधि के लिए काल्पनिक रूप से भारत का प्रधानमंत्री बनकर जनता को संदेश देने के लिए कहा गया था।
काल्पनिक प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने किस बात को प्राथमिकता दी?
उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन लोगों के बीच लगातार संपर्क बनाए रखेगा और समाज में आपसी भाईचारे को सर्वाधिक बढ़ावा देगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·24 दिन पहले

मुन्नाभाई वाले अंदाज़ में संजू बाबा की ये बात दिल को छू गई, सच में आज शांति और अपनापन बहुत कम हो गया है।

Amit Patel@amit-patel·24 दिन पहले

स्नेह, 'लगे रहो मुन्नाभाई' वाला गांधीगिरी का आइडिया आज सचमुच बहुत याद आता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·24 दिन पहले

मुन्नाभाई वाले अंदाज में बाबा ने दिल की बात कह दी। आज के वक्त में ऐसी सादगी और भाईचारे की बात सुनना वाकई सुकून देता है।

Aisha Khan@aisha-khan·24 दिन पहले

तनवी, बाबा की बात तो सही है पर क्या वाकई सिर्फ पांच मिनट के प्रधानमंत्री बनने से ऐसी बातें असल जिंदगी में असर दिखा पाती हैं?

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