फरीदाबाद में दिल से जुड़े मामलों को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है, जिसके तहत दिल का दौरा पड़ने पर हर स्थिति में सीने में ही तकलीफ महसूस हो, यह जरूरी नहीं माना जाता है। कई मामलों में कंधे, दांत या फिर पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाला दर्द भी इस गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है। मौजूदा समय में अनियंत्रित जीवनशैली, स्मोकिंग और वेपिंग जैसी आदतें दिल की सेहत को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। इस विषय पर फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष कुमार ने दिल की बीमारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी है।
बिना दर्द के भी आ सकता है दिल का दौरा
चिकित्सक के अनुसार कुछ मामलों में लोगों को सीने में किसी भी तरह की तकलीफ के बिना भी दिल का दौरा पड़ सकता है। इस तरह के लक्षण खासतौर पर महिलाओं और डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में अधिक देखने को मिलते हैं। कई बार जब जबड़े, कंधे या पेट के ऊपरी हिस्से में असहजता होती है, तो लोग उसे मामूली गैस या अन्य सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुल मामलों में से करीब 5 से 10 प्रतिशत स्थितियां ऐसी होती हैं जहां स्पष्ट दर्द महसूस नहीं होता या फिर इसके संकेत बेहद अलग होते हैं, जो पहचान में नहीं आते हैं।
वेपिंग से बढ़ती है दिल और नसों की परेशानी
डॉक्टर आशीष का यह भी कहना है कि ई-सिगरेट यानी वेपिंग को आम सिगरेट के मुकाबले किसी भी तरह से सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। इसमें निकोटीन समेत कई ऐसे हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं जो शरीर के भीतर सूजन को बढ़ाने का काम करते हैं। इसके सेवन से रक्त वाहिकाओं में ब्लॉकेज की आशंका बढ़ जाती है, जिससे आगे चलकर दिल का दौरा पड़ने, हृदय गति रुकने, दिल की धड़कन अनियमित होने और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि विशेषकर युवा वर्ग को इन उत्पादों से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी जाती है.
उम्र से पहले दिल का समय से पहले कमजोर होना
विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि किसी भी व्यक्ति की शारीरिक उम्र और उसके दिल की जैविक उम्र में भिन्नता हो सकती है। यदि कोई 50 वर्ष की आयु का व्यक्ति भी नियमित रूप से कसरत करता है और अपनी सेहत का ध्यान रखता है, तो उसका हृदय कम उम्र के किसी स्वस्थ व्यक्ति की भांति मजबूत हो सकता है। इसके विपरीत, बहुत कम उम्र में ही अत्यधिक शराब का सेवन, धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और शारीरिक सक्रियता की कमी दिल को तेजी से बूढ़ा और कमजोर बना देती है।
आधुनिक तकनीक और शुरुआती चेतावनी के संकेत
डॉक्टर आशीष के मुताबिक आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणालियों, स्मार्टवॉच और ईसीजी जैसी आधुनिक तकनीकों की मदद से हृदय संबंधी कुछ समस्याओं के शुरुआती संकेत अवश्य मिल सकते हैं। हालांकि, इन उपकरणों के जरिए किसी भी ब्लॉकेज या दिल के दौरे की शत-प्रतिशत सटीक पहचान होने का दावा नहीं किया जा सकता है। यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी चेतावनी मिलती है या शरीर में कोई असहजता महसूस होती है, तो बिना देर किए किसी योग्य चिकित्सक से संपूर्ण चिकित्सीय जांच करानी चाहिए।
सामान्य रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के बाद भी खतरा
यह भी गौर करने वाली बात है कि किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल स्तर और ब्लड प्रेशर यदि सामान्य सीमा के भीतर है, तब भी उसे दिल का दौरा पड़ने की संभावना से पूरी तरह मुक्त नहीं माना जा सकता है। शरीर में मधुमेह की मौजूदगी, तनाव, अत्यधिक नशा, पारिवारिक पृष्ठभूमि में हृदय रोगों का इतिहास और खराब दिनचर्या जैसे कारक इस जोखिम को और अधिक बढ़ा देते हैं। इसके अलावा आनुवांशिक कारणों से भी कुछ लोगों में यह खतरा काफी अधिक हो सकता है, जिसके चलते नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और एक संतुलित जीवनशैली का पालन करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है.



















