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टुन टुन की जयंती पर जैकी श्रॉफ ने साझा की अनदेखी याद, याद आया बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन का सुनहरा सफरबॉलीवुड
11 जुल॰ 2026, 4:25 pm (18 दिन पहले)· 1

टुन टुन की जयंती पर जैकी श्रॉफ ने साझा की अनदेखी याद, याद आया बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन का सुनहरा सफर

दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन टुन टुन की जयंती पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके ऐतिहासिक फिल्मी सफर को याद किया।

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ही ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने पर्दे पर कदम रखते ही दर्शकों के चेहरों पर एक अनमोल और सहज मुस्कान बिखेर दी। उनकी बेमिसाल कॉमिक टाइमिंग, चुलबुला अंदाज और अपनी सहज एक्टिंग के दम पर उन्होंने दशकों तक सिनेमा प्रेमियों का भरपूर मनोरंजन किया। ऐसी ही एक महान शख्सियत थीं उमा देवी खत्री, जिन्हें पूरी दुनिया और भारतीय फिल्म जगत प्यार से 'टुन टुन' के नाम से जानता है। आज उनके जन्मदिवस के इस बेहद खास मौके पर पूरा देश उन्हें शिद्दत से याद कर रहा है। हिंदी सिनेमा को कई यादगार और कल्ट फिल्में देने वाली इस महान कलाकार की बर्थ एनिवर्सरी पर बॉलीवुड के 'जग्गु दादा' यानी दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ ने भी बेहद भावुक होकर उन्हें एक खास श्रद्धांजलि दी है।

जैकी श्रॉफ का भावुक ट्रिब्यूट और यादें

अभिनेता जैकी श्रॉफ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर टुन टुन के सुनहरे दौर की एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर साझा की है। इस पुरानी और अनमोल याद को प्रशंसकों के साथ पोस्ट करते हुए जैकी श्रॉफ ने एक हाथ जोड़ने वाला इमोजी लगाया। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में लिखा कि उमा देवी खत्री (टुन टुन जी) हमेशा हमारे दिलों में जीवित रहेंगी। इसके साथ ही जैकी श्रॉफ ने इस महान अभिनेत्री के पूरे जीवन सफर की तारीखों यानी 11 जुलाई 1923 से 24 नवंबर 2003 को भी अपने फैंस के साथ साझा किया। सोशल मीडिया पर उनकी यह श्रद्धांजलि खूब वायरल हो रही है और लोग टुन टुन के प्रति अपना सम्मान व्यक्त कर रहे हैं।

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प्लेबैक सिंगर के रूप में शुरू हुआ था फिल्मी सफर

आज की पीढ़ी भले ही टुन टुन को केवल उनकी लाजवाब कॉमेडी और बेहतरीन अभिनय के लिए पहचानती हो, लेकिन बहुत कम लोग इस दिलचस्प सच्चाई से वाकिफ हैं कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम एक प्लेबैक सिंगर के तौर पर रखा था। उनका यह सफर 1940 के दशक के आखिरी वर्षों में शुरू हुआ था। 11 जुलाई 1923 को जन्मीं उमा देवी की आवाज में एक अनोखा जादू और सुरीलापन था। उनके इस छिपे हुए हुनर को हिंदी सिनेमा के महान संगीत निर्देशक नौशाद साहब ने सबसे पहले पहचाना था। नौशाद साहब ने उनके टैलेंट पर भरोसा किया और करियर के शुरुआती दौर में उन्हें संगीत की दुनिया में बड़े और बेहतरीन मौके दिए।

'दर्द' फिल्म का वह गाना जिसने बनाया रातों-रात स्टार

उमा देवी के गायन करियर में साल 1947 एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस साल रिलीज हुई फिल्म 'दर्द' में उन्होंने एक गाना गाया था, जिसके बोल थे 'अफसाना लिख रही हूं दिल-ए-बेकरार का'। इस गाने ने रिलीज होते ही पूरे देश में तहलका मचा दिया था। उमा देवी की जादुई आवाज घर-घर में गूंजने लगी और वे रातों-रात देश की एक बेहद लोकप्रिय और चर्चित प्लेबैक सिंगर बन गईं। संगीत प्रेमियों के बीच उनकी सुरीली आवाज का जादू इस कदर चला कि इस गाने को आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन क्लासिक गानों में गिना जाता है।

रूढ़िवादी दौर में बनीं बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन

संगीत की दुनिया में अपनी आवाज का लोहा मनवाने और बड़ी शोहरत हासिल करने के बाद उमा देवी ने अभिनय की दुनिया का रुख करने का फैसला किया। फिल्मों में एक्टिंग शुरू करने के साथ ही उन्होंने खुद को 'टुन टुन' के एक नए और मजेदार नाम के साथ री-ब्रांड किया। यह वह दौर था जब फिल्मों में कॉमेडी करने का जिम्मा मुख्य रूप से केवल पुरुष अभिनेताओं के पास ही हुआ करता था। ऐसे रूढ़िवादी और पुरुष प्रधान माहौल में टुन टुन ने अपनी एक बेहद अलग, स्वतंत्र और मजबूत पहचान बनाई। उन्हें आधिकारिक तौर पर बॉलीवुड की सबसे पहली महिला कॉमेडियन होने का गौरव हासिल है, जिन्होंने इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए नए रास्ते खोले।

साफ-सुथरी पारिवारिक कॉमेडी और गजब के हाव-भाव

पर्दे पर टुन टुन ने अपनी शारीरिक बनावट और चेहरे के कमाल के हाव-भाव का इस्तेमाल इस तरह से किया कि वे दर्शकों के लिए शुद्ध पारिवारिक मनोरंजन का पर्याय बन गईं। उनकी कॉमेडी में कहीं भी अश्लीलता या फूहड़ता नहीं होती थी, बल्कि वह बेहद मासूम और मनोरंजक होती थी। उनकी कमाल की कॉमिक टाइमिंग का ही नतीजा था कि उस दौर के बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखते समय टुन टुन के लिए विशेष रूप से किरदार तैयार किया करते थे ताकि फिल्म में मनोरंजन का तड़का लगाया जा सके।

सिनेमाई इतिहास में दर्ज हैं ये अमर फिल्में

अपने कई दशकों लंबे और शानदार अभिनय करियर में टुन टुन ने भारतीय सिनेमा की कई कालजयी और सदाबहार फिल्मों में अपनी अदाकारी के जौहर दिखाए। उन्होंने महान फिल्मकार गुरु दत्त की कल्ट फिल्मों 'मिस्टर एंड मिसेज 55' और 'प्यासा' में बेहद यादगार भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा उन्होंने 'हाफ टिकट', 'कोहिनूर', 'मुजरिम', 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'आया सावन झूम के' और 'आंखें' जैसी कई बेहतरीन फिल्मों से दर्शकों को हंसने पर मजबूर किया। आज भी जब इन क्लासिक फिल्मों की चर्चा होती है, तो टुन टुन के निभाए गए किरदार सिनेमा प्रेमियों के चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं।

सवाल-जवाब

टुन टुन का असली नाम क्या था और जैकी श्रॉफ ने उन्हें क्या श्रद्धांजलि दी?
टुन टुन का असली नाम उमा देवी खत्री था। उनकी जयंती पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उनके सुनहरे दिनों की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो साझा कर उन्हें याद किया और लिखा कि वे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।
टुन टुन ने अपने करियर की शुरुआत किस रूप में की थी?
टुन टुन ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक के उत्तरार्ध में एक प्लेबैक सिंगर के रूप में की थी। संगीतकार नौशाद ने उनके इस हुनर को पहचानकर उन्हें शुरुआती मौके दिए थे।
गायिका के तौर पर टुन टुन के करियर का टर्निंग पॉइंट कौन सा गाना था?
साल 1947 में आई फिल्म 'दर्द' का गाना 'अफसाना लिख रही हूं दिल-ए-बेकरार का' उनके सिंगिंग करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था, जिसने उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना दिया था।
टुन टुन को बॉलीवुड की पहली महिला कॉमेडियन क्यों कहा जाता है?
उस दौर में फिल्मों में कॉमेडी केवल पुरुष अभिनेता ही करते थे। ऐसे पुरुष प्रधान और रूढ़िवादी माहौल में अभिनय में कदम रखकर टुन टुन ने अपनी साफ-सुथरी कॉमिक टाइमिंग से पहली महिला कॉमेडियन के रूप में अमिट पहचान बनाई।
टुन टुन की यादगार फिल्मों के नाम क्या हैं?
टुन टुन की यादगार फिल्मों में गुरु दत्त की 'मिस्टर एंड मिसेज 55' और 'प्यासा' के साथ-साथ 'हाफ टिकट', 'कोहिनूर', 'मुजरिम', 'दिल अपना और प्रीत पराई', 'आया सावन झूम के' और 'आंँखें' शामिल हैं।
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