दक्षिण कोरियाई सीमा पर उत्तर कोरिया की हलचल, तोपों की तैनाती से बढ़ा तनावरणबीर कपूर की 'रामायण' के खौफ से टली अंशुमान झा की 'लकड़बग्घा 2', जानिए अब कब आएगी फिल्मसावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त को, संतान प्राप्ति के लिए इस शुभ योग में करें पूजामैक्सिकन पेसो में हालिया तेज गिरावट अब सीमित रहने के आसार, कमर्जबैंक का आकलनचक्रवाती तूफान अर्नब की आहट से सहमा रेल यातायात, 6 राज्यों में दर्जनों एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें रद्दसेंट टेरेसा में रहस्यमयी मौत और जानलेवा खेल, शनाया कपूर का डबल रोल थ्रिलर 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर: आफ्टर डार्क' का वीडियो सामने आयारिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड 3 प्रतिशत कर सकता है ब्याज दर, मुद्रास्फीति और वैश्विक दबावों के बीच नीतिगत समीक्षा पर टिकी नज़रेंफर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासअमेरिकी डॉलर के मुकाबले मेक्सिको का पेसो फिसला, 18.60 का स्तर पार करने के बाद कैरी ट्रेड का आकर्षण घटापुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौती
यश चोपड़ा की फिल्म लम्हे के गाने में हुआ था कुदरती करिश्मा, जब श्रीदेवी के डांस के बीच सच में बरसने लगा था पानीबॉलीवुड
20 सित॰ 2026, 8:48 pm (37 दिन पहले)· 2

यश चोपड़ा की फिल्म लम्हे के गाने में हुआ था कुदरती करिश्मा, जब श्रीदेवी के डांस के बीच सच में बरसने लगा था पानी

साल 1991 में आई फिल्म लम्हे के लोकप्रिय गीत मेघा रे मेघा की शूटिंग के दौरान नकली फुहारों की जगह कुदरत ने खुद बादलों से पानी बरसा दिया था।

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे जादुई पल दर्ज हैं, जो किसी तय योजना का हिस्सा नहीं थे बल्कि अचानक घटी घटनाओं ने उन्हें सदाबहार बना दिया। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया तीन दशक से भी पहले एक खास गीत के फिल्मांकन के दौरान देखने को मिला था। इस गीत में लता मंगेशकर और ईला अरुण की जुगलबंदी ने संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया था, वहीं परदे पर मुख्य अभिनेत्री ने अपने जोरदार नृत्य और मनमोहक अंदाज से हर दर्शक का दिल जीत लिया था। गाने की शूटिंग के वक्त हुआ कुदरती करिश्मा इतना अप्रत्याशित था कि खुद फिल्म निर्माता और निर्देशक भी दंग रह गए थे।

फिल्म लम्हे और उसका लीक से हटकर ताना-बाना

साल 1991 में बड़े परदे पर निर्देशक यश चोपड़ा की एक महत्वाकांक्षी फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका नाम लम्हे था। इस बहुचर्चित सिनेमाई रचना में श्रीदेवी और अनिल कपूर मुख्य भूमिकाओं में दिखाई दिए थे। उस जमाने की आम मुख्यधारा की फिल्मों से हटकर इसकी पटकथा काफी साहसी और लीक से अलग थी। उस दौर के सामाजिक परिवेश के लिहाज से कहानी इतनी अनोखी थी कि आम दर्शकों के लिए इसे सहजता से स्वीकार कर पाना आसान साबित नहीं हुआ था। इसके बावजूद फिल्म का संगीत बेहद पसंद किया गया और इसके गानों ने संगीत की दुनिया में खूब वाहवाही बटोरी।

ये भी पढ़ें

मेघा रे मेघा की शूटिंग और नकली बारिश के बीच आया कुदरती तूफान

इस फिल्म का सबसे चर्चित प्रसंग इसके प्रसिद्ध वर्षा गीत के साथ जुड़ा हुआ है, जिसके बोल थे 'मेघा रे मेघा, तेरा मन तरसा रे, पानी क्यों बरसा रे'। इस दृश्य में श्रीदेवी अपनी सहेलियों के संग बादलों की रिमझिम में मोरनी की तरह थिरकती हुई नजर आती हैं, जबकि दृश्य में अनिल कपूर की मौजूदगी भी दिखाई देती है। जब इस विशेष गीत को कैमरे में कैद करने की तैयारी चल रही थी, तब अभिनेत्री को सावन की फुहारों में भीगते हुए नृत्य करना था। निर्देशक यश चोपड़ा ने इसके लिए सेट पर नकली बारिश करवाने के पूरे पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। जैसे ही कैमरे का स्विच ऑन हुआ और शूटिंग शुरू हुई, ठीक उसी क्षण आसमान से सचमुच बारिश होने लगी। पूरी टीम ने इस अप्रत्याशित कुदरती बारिश का भरपूर लाभ उठाया और असली बादलों के बरसते पानी के बीच ही पूरे गाने की शूटिंग पूरी की गई।

शानदार संगीत, दिग्गज आवाजें और अदाकारी का जादू

गीत को यादगार बनाने में कई दिग्गजों का अमूल्य योगदान रहा। स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी मीठी आवाज से इसे संवारा, तो लोक गायिका ईला अरुण ने भी इसमें अपनी सशक्त आवाज का योगदान दिया। प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी शिव हरि ने इसकी सुरीली धुन तैयार की थी, जबकि इसके बोल गीतकार आनंद बक्शी की कलम से निकले थे। इस गीत पर श्रीदेवी ने अपनी भाव-भंगिमाओं और ऊर्जावान ठुमकों से ऐसा समां बांधा कि उनके चाहने वाले पूरी तरह मोहित हो गए थे।

बॉक्स ऑफिस पर असफलता के बावजूद कल्ट क्लासिक बनी फिल्म

सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो गई थी। अनिल कपूर और श्रीदेवी जैसे बड़े सितारों की मौजूदगी भी इसे टिकट खिड़की पर व्यावसायिक सफलता नहीं दिला सकी, क्योंकि तत्कालीन दर्शक इसकी बोल्ड कहानी को हजम नहीं कर पाए थे। हालांकि, निर्देशक यश चोपड़ा अपनी फिल्म के इस खास गाने और इसके निर्माण से बेहद खुश थे। फिल्म में श्रीदेवी, अनिल कपूर, अनुपम खेर और वहीदा रहमान जैसे उम्दा कलाकारों की टोली मौजूद थी। श्रीदेवी ने इसमें दोहरा किरदार निभाया था। अपनी उत्कृष्ट अदाकारी के दम पर उन्होंने आलोचकों की भरपूर प्रशंसा बटोरी और उन्हें इस भूमिका के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से लेकर फिल्मफेयर पुरस्कार तक से नवाजा गया। वक्त के साथ आज इस फिल्म को भारतीय सिनेमा की एक कल्ट रचना का दर्जा मिल चुका है।

अलग-अलग जोड़ियों में श्रीदेवी का जलवा

श्रीदेवी ने अपने पूरे फिल्मी सफर में हर तरह के मुश्किल और चुनौतीपूर्ण किरदारों को बखूबी निभाया। पर्दे पर उनकी जोड़ी कई दिग्गज अभिनेताओं के साथ खूब सराही गई। एक दौर में अभिनेता जितेंद्र के साथ उनकी जोड़ी सिनेमाघरों में भारी भीड़ खींचने के लिए जानी जाती थी। इसके अलावा अनिल कपूर और ऋषि कपूर के साथ भी उनकी फिल्मी जोड़ी ने बड़े परदे पर जबर्दस्त कमाल दिखाया और दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी।

सवाल-जवाब

फिल्म लम्हे किस साल रिलीज हुई थी?
यह फिल्म साल 1991 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन यश चोपड़ा ने किया था।
गाने मेघा रे मेघा की शूटिंग के दौरान क्या हुआ था?
शूटिंग के लिए नकली बारिश की तैयारी की गई थी, लेकिन कैमरा चालू होते ही असली बारिश होने लगी थी।
इस गीत को किन गायिकाओं ने अपनी आवाज दी थी?
इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था और इसमें गायिका ईला अरुण ने भी अपनी आवाज का योगदान दिया था।
फिल्म में किन प्रमुख कलाकारों ने अभिनय किया था?
फिल्म में श्रीदेवी, अनिल कपूर, अनुपम खेर और वहीदा रहमान ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।
श्रीदेवी को इस फिल्म के लिए कौन से पुरस्कार मिले थे?
फिल्म में अपने दोहरे किरदार के बेहतरीन अभिनय के लिए श्रीदेवी को राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Verma@rohan-verma·37 दिन पहले

यह वाकया दिखाता है कि कला और प्रकृति का अनियोजित संयोग किस तरह किसी रचना को अमर बना देता है। बॉक्स ऑफिस की शुरुआती असफलताओं के बावजूद, ऐसे प्रामाणिक और अनूठे पलों ने ही इस फिल्म को कल्ट क्लासिक का दर्जा दिलाया, जो आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·37 दिन पहले

यश चोपड़ा के निर्देशन और श्रीदेवी की सहज अदाकारी ने 'लम्हे' के इस गीत को सिनेमाई इतिहास का हिस्सा बना दिया। हालांकि यह फिल्म अपने समय से आगे होने के कारण बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई, लेकिन इसका संगीत और ऐसे अनियोजित कुदरती वाकये इसे आज भी कल्ट क्लासिक का दर्जा दिलाते हैं। ओटीटी के इस दौर में भी ऐसी सदाबहार फिल्में दर्शकों को सिनेमा के स्वर्णिम दिनों की याद दिलाती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·37 दिन पहले

सिनेमा सिर्फ तकनीकी निर्माण नहीं, बल्कि अप्रत्याशित क्षणों और मानवीय संवेदनाओं का दस्तावेज है। 'लम्हे' की यह घटना दर्शाती है कि कैसे कला और प्रकृति का संयोग किसी रचना को समय की सीमाओं से परे कर देता है। हालांकि शुरुआती व्यावसायिक असफलता ने इसके निर्माताओं को चौंकाया था, लेकिन ऐसे वाकये यह साबित करते हैं कि दृश्यों की प्रामाणिकता और मजबूत संगीत किसी भी फिल्म को दशकों बाद भी प्रासंगिक बनाए रखने की ताकत रखते हैं, जो आज के डिजिटल और एल्गोरिदम आधारित सिनेमाई दौर में एक बड़ा सबक है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·37 दिन पहले

यश चोपड़ा की इस क्लासिक फिल्म के सेट पर हुई यह प्राकृतिक घटना साबित करती है कि सिनेमा में कई बार तकनीक से परे कुछ जादुई संयोग होते हैं जो स्क्रीन पर एक अलग ही प्रामाणिकता ले आते हैं। आज के अत्यधिक वीएफएक्स और कृत्रिम माहौल वाले दौर में, इस तरह की वास्तविक और अनियोजित घटनाएं किसी भी दृश्य के भावनात्मक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती हैं और यही वह खूबी है जो इसे दशकों बाद भी ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बार-बार देखने लायक बनाती है।

Aisha Khan@aisha-khan·37 दिन पहले

तन्वी ने सही रेखांकित किया है कि कैसे अप्रत्याशित प्राकृतिक घटनाएं फिल्मों को अमर बना देती हैं। आज जब वीएफएक्स का दौर है और हर फ्रेम को कृत्रिम रूप से गढ़ा जाता है, तब 'लम्हे' जैसे किस्से याद दिलाते हैं कि सहजता और प्रामाणिकता का कोई विकल्प नहीं है। डिजिटल और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के इस युग में, दर्शक आज भी ऐसी कहानियों और वास्तविक पलों से जुड़ना पसंद करते हैं जो स्क्रीन पर जीवंतता भर देते हैं। यह प्रामाणिकता ही इस कल्ट क्लासिक को आज के दर्शकों के बीच भी प्रासंगिक बनाए रखती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp