सिनेमा के पर्दे पर अपनी अदाकारी और सुंदरता से करोड़ों दर्शकों का दिल जीतने वाली बॉलीवुड की पहली लेडी सुपरस्टार श्रीदेवी की पर्दे की चमक के पीछे कई कड़े संघर्ष और शारीरिक कुर्बानियां छिपी थीं। भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अद्वितीय मुकाम हासिल करने वाली इस दिग्गज अदाकारा ने पर्दे पर किरदारों की मांग के अनुसार खुद को ढालने के लिए कई बार अपने स्वास्थ्य तक को दांव पर लगा दिया था। वर्ष 1991 के दौर का ऐसा ही एक दर्दनाक वाकया सामने आया, जब एक निर्देशक की मांग पूरी करने के चक्कर में उन्होंने अपनी थाली से पूरी तरह नमक हटा दिया था। इस अस्वाभाविक और बेहद सख्त फैसले का नतीजा यह हुआ कि एक फिल्म के सेट पर वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं और उन्हें बेहद गंभीर शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ा।
बहुभाषी सिनेमा में श्रीदेवी का सफर और 'क्षण क्षणम' की मांग
श्रीदेवी का अभिनय संसार केवल हिंदी सिनेमा तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा में अपनी अदाकारी का लोहा बहुत पहले ही मनवा लिया था। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने के बाद उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया और वहां 'हिम्मतवाला', 'सदमा', 'मिस्टर इंडिया', 'चांदनी', 'चालबाज' और 'लम्हे' जैसी यादगार फिल्मों के जरिए सुपरस्टार का ऐतिहासिक दर्जा हासिल किया। जब उनका स्टारडम चरम पर था, उसी दौर में 1991 में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म 'क्षण क्षणम' की शूटिंग चल रही थी। इस चर्चित फिल्म का निर्देशन राम गोपाल वर्मा कर रहे थे और इसमें श्रीदेवी के साथ मुख्य अभिनेता के रूप में वेंकटेश नजर आए थे। यह फिल्म आज भी उनके पूरे करियर की सबसे खास और यादगार कृतियों में शुमार की जाती है।
सख्त डाइट और नमक छोड़ने का खौफनाक फैसला
फिल्म निर्देशक पंकज पराशर ने एक पुराने साक्षात्कार में इस दौर से जुड़ी घटनाओं का विस्तार से उल्लेख किया था। उनके अनुसार, 'क्षण क्षणम' के निर्माण के दौरान श्रीदेवी के ऊपर अपना शारीरिक वजन तेजी से घटाने का बहुत गहरा दबाव था। निर्देशक राम गोपाल वर्मा चाहते थे कि श्रीदेवी फिल्म के दृश्यों में एक बेहद विशिष्ट और छरहरे रूप में दिखाई दें। अपने काम के प्रति अत्यधिक समर्पित होने के कारण श्रीदेवी ने इस रचनात्मक मांग को बहुत गंभीरता से अपने ऊपर ले लिया। पर्दे पर दर्शकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए उन्होंने भोजन के मामले में ऐसी कठोर पाबंदियां लागू कीं, जिसमें उन्होंने खाने से नमक का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। वह अपनी शारीरिक बनावट में रत्ती भर भी ढिलाई नहीं बरतना चाहती थीं, लेकिन इस अनियंत्रित परहेज ने उनके शरीर की आंतरिक प्रणाली को बुरी तरह प्रभावित करना शुरू कर दिया।
सोडियम की कमी और सेट पर हुआ भीषण हादसा
भोजन में लंबे समय तक नमक बिल्कुल न होने के कारण उनके शरीर में आवश्यक सोडियम की भारी किल्लत हो गई, जिसके परिणामस्वरूप उनका रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर अचानक अत्यधिक नीचे गिर गया। लगातार भूखे पेट रहने और गिरते ब्लड प्रेशर की वजह से उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। इसी शारीरिक कमजोरी के बीच जब वह पंकज पराशर के निर्देशन में बन रही फिल्म 'मेरी बीवी का जवाब नहीं' के सेट पर शूटिंग पूरी कर रही थीं, तभी उन्हें भयानक चक्कर आया और वह फर्श पर बेसुध होकर गिर पड़ीं। गिरते वक्त उनका चेहरा और सिर पास में ही रखी एक मजबूत मेज से बड़ी जोर से टकराया। इस भयानक टक्कर के कारण उनके चेहरे पर गंभीर घाव हो गए और उनका एक दांत भी टूट गया। अचानक हुए इस हादसे से सेट पर काम कर रहे तमाम लोग बुरी तरह सहम गए। श्रीदेवी लगभग 20 मिनट तक पूरी तरह अचेत रहीं और उन्हें होश में लाने के प्रयास किए जाते रहे।
हादसे का फिल्म पर असर और बाद की मुश्किलें
इस गंभीर चोट और टूटे दांत के कारण श्रीदेवी को डॉक्टरों की सलाह पर लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा। अभिनेत्री के अचानक लंबे अवकाश पर जाने से फिल्म 'मेरी बीवी का जवाब नहीं' का संपूर्ण निर्माण चक्र पूरी तरह गड़बड़ा गया और परियोजना अधर में लटक गई। पंकज पराशर के अनुसार, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद फिल्म की पूरी योजना पटरी से उतर गई। आगे चलकर फिल्म को धन उपलब्ध कराने वाले फाइनेंसर पीछे हट गए और निर्माता का असामयिक निधन भी हो गया, जिसके बाद खुद पंकज पराशर ने भी उस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली। कई वर्षों तक अटके रहने के बाद आखिरकार 2004 में बिना किसी अंतिम क्लाइमेक्स के ही इस अधूरी फिल्म को सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया गया था।
बोनी कपूर का खुलासा और लो ब्लड प्रेशर की समस्या
श्रीदेवी के निजी जीवन में भी इस आदत का असर लंबे समय तक देखा गया। उनके पति और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता बोनी कपूर ने भी एक साक्षात्कार में इस बात की पुष्टि की थी कि श्रीदेवी पर्दे पर बेहतरीन दिखने के जुनून में अक्सर भूखी रहा करती थीं और अपने भोजन में नमक लेने से बचती थीं। बोनी कपूर के अनुसार, विवाह संपन्न होने के बाद भी कम रक्तचाप की गंभीर समस्या के चलते उन्हें कई अवसरों पर अचानक अंधेरा छा जाने और बेहोश होने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता था। स्क्रीन पर त्रुटिहीन दिखने की इसी अनवरत चाह ने उनके स्वास्थ्य पर जीवन भर गहरा असर डाला।



















