अमेठी जिले का जगदीशपुर क्षेत्र एक बड़ा औद्योगिक हब माना जाता है, जहां देश और दुनिया से व्यापारी व उद्यमी अपने कारोबार के सिलसिले में आते हैं। इस इलाके की रीढ़ कहे जाने वाले लोहिया पुल का निर्माण साल 1984 में किया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव और बढ़ते समय के साथ यह बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। इस पुल के लंबे समय से खराब हाल में होने के कारण दूसरे राज्यों से आने वाले मालवाहकों और व्यापारियों को अपने कारखानों तक पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ता है। अब इस बदहाल पुल के पुनर्निर्माण की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं, जिसे उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीसीडा द्वारा पूरा कराया जाएगा। इस नई विकास परियोजना के धरातल पर उतरने से न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि यहां संचालित होने वाली प्रमुख औद्योगिक कंपनियां भी विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ सकेंगी और क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
चार दशकों से बदहाली का शिकार है यह पुल
स्थानीय लघु उद्योग भारती के आंकड़ों के अनुसार, इस पुल को साल 1984 में इस मुख्य उद्देश्य से बनवाया गया था कि यह इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास में सहायक सिद्ध होगा और स्थानीय उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीता और इस औद्योगिक क्षेत्र में निवेश तथा बड़े कारखानों की संख्या में बढ़ोतरी हुई, इस पुल पर भारी वाहनों का दबाव भी लगातार बढ़ता गया। स्थिति यह हो गई कि अब इस जर्जर और कमजोर ढांचे से बड़े मालवाहक वाहनों का गुजरना पूरी तरह असुरक्षित हो चुका है। अब इस पुराने ढांचे को हटाकर इसके पुनर्निर्माण पर लगभग 2 करोड़ से 2.5 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस महत्वपूर्ण सड़क मार्ग के दोबारा तैयार होने से आवागमन सुगम होगा, जिससे लगभग 10 किलोमीटर की लंबी दूरी कम हो जाएगी और सीधे तौर पर करीब 2 लाख की आबादी को इसका लाभ मिलेगा।
व्यापारियों और चालकों को रोजाना उठानी पड़ती है भारी परेशानी
औद्योगिक क्षेत्र के इस जर्जर पुल की वजह से बाहर से आने वाले कारोबारियों और माल ढुलाई करने वाले चालकों को आए दिन गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बिहार से आए एक उद्यमी राकेश कुमार ने इस बारे में अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि कई बार सामान लेकर आने वाले वाहन इस पुल और आसपास के खराब रास्तों पर अनियंत्रित होकर पलट जाते हैं। यह पुल अब इतना जर्जर हो चुका है कि हर वक्त यह डर सताता रहता है कि यहां कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। एक अन्य स्थानीय उद्यमी श्याम कुमार गुप्ता ने अपनी मुश्किलों का जिक्र करते हुए बताया कि कारखानों तक माल लाने और ले जाने के दौरान उन्हें रोजाना परिवहन संबंधी तमाम बाधाओं से जूझना पड़ता है। खराब रास्तों के कारण उन्हें लगभग 9 से 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, और कई बार अनजान चालक रास्ता भटककर भटक जाते हैं, जिससे उनका बहुमूल्य समय और ईंधन का पैसा दोनों बर्बाद होता है। व्यापारियों का मानना है कि इस पुल के नए सिरे से बन जाने के बाद व्यापार करना बेहद आसान हो जाएगा और इलाके के तमाम लोगों को राहत मिलेगी।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई रफ्तार
लघु उद्योग भारती से जुड़े अभियंता संजय सिंह ने इस परियोजना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस जर्जर पुल की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए शासन स्तर पर कई बार पत्राचार करना पड़ा था। उन्होंने याद दिलाया कि आज से कई वर्ष पहले यहां सेक्टर 13 और 14 को आपस में जोड़ते हुए एक नए औद्योगिक क्षेत्र को विकसित किया गया था, लेकिन इस पुल के लंबे समय से जर्जर होने के कारण बाहर से आने वाले उद्यमियों, व्यापारियों और स्थानीय आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इस पुल के बन जाने से लोगों को अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी, जिससे उनके समय की बचत होगी और वाहनों में खर्च होने वाला अतिरिक्त ईंधन भी बचेगा। अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि इस बुनियादी सुविधा के दुरुस्त होने से अमेठी के औद्योगिक विकास को एक नई रफ्तार और मजबूती मिलेगी।
















