अमेठी की पारंपरिक दस्तकारी और स्थानीय उद्यम अब सिर्फ क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं। जिले के हुनरमंद कारीगरों और नए दौर के उद्यमियों के उत्पाद अब राज्य स्तर से निकलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं। बड़े व्यापारिक आयोजनों और प्रदर्शनियों के जरिए यहां के हुनर को सीधा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।
मूंज शिल्प से लेकर खादी वस्त्रों तक का जलवा
एक जिला एक उत्पाद योजना के अंतर्गत अमेठी के मूंज उत्पादों ने व्यापक स्तर पर खरीदारों का ध्यान खींचा है। मूंज घास से तैयार की जाने वाली कलाकृतियों में भवानी प्रसाद निषाद के बनाए सामान प्रमुख आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनके संग्रह में कलात्मक डलिया, मजबूत टोकरियां, कुर्सी, मेज, पायदान, झबिया, रोटी रखने के डिब्बे, पेन बॉक्स और आकर्षक फोटो फ्रेम शामिल हैं। पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ होने की वजह से इन हस्तनिर्मित उत्पादों को शहरों में काफी पसंद किया जा रहा है।
शिल्प कला के साथ-साथ जिले का टेक्सटाइल और लेदर कारोबार भी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। कपड़ा निर्माण के क्षेत्र में उद्यमी बेंचू खान द्वारा तैयार किए गए स्वदेशी कपड़ों को प्रदर्शनियों में विशेष स्थान मिला है। इसके अतिरिक्त स्थानीय लेदर उद्योग और एक जनपद एक व्यंजन पहल के जरिए तैयार खान-पान के उत्पादों को भी बड़े आयोजनों में प्रदर्शित किया गया है। इन विविध क्षेत्रों के जुड़ने से जिले के कारीगरों को न केवल आर्थिक संबल मिल रहा है, बल्कि उन्हें एक सम्मानित उद्यमी के तौर पर पहचान भी हासिल हो रही है।
कारीगरों के जीवन में आया आर्थिक बदलाव
व्यापार मेले में भाग लेने वाले मूंज शिल्पकार भवानी प्रसाद निषाद बताते हैं कि सरकारी प्रोत्साहन और सहायता मिलने के बाद उनके काम का दायरा काफी बढ़ गया है। उनके इस उपक्रम और स्वयं सहायता समूह से वर्तमान में 300 से अधिक लोग सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं और आजीविका कमा रहे हैं। उनके द्वारा तैयार सामान की आपूर्ति अब पूरे उत्तर प्रदेश के विभिन्न बाजारों में हो रही है, जिससे उनके समूह के सदस्यों को लगातार काम और नियमित पारिश्रमिक मिल पा रहा है।
इसी तरह युवाओं में भी अपने दम पर उद्यम स्थापित करने की ललक देखी जा रही है। युवा उद्यमी तनिष्क शुक्ला बाजार की ताजा मांग के अनुरूप अपने उत्पाद तैयार कर रहे हैं। उनका मानना है कि उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखकर काम करने से कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। पहले उनके उत्पाद सिर्फ राज्य के भीतर बिकते थे, लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और ऑफलाइन वितरण नेटवर्क के माध्यम से उनके सामान की बिक्री पूरे भारत में होने लगी है। इस व्यवसाय से वे हर महीने आसानी से 30 से 40 हजार रुपये की आमदनी कर रहे हैं।
प्रशासनिक सहयोग और स्वरोजगार के लिए अनुदान योजना
जिला उद्योग केंद्र भी स्थानीय कामगारों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। जिला उपायुक्त उद्योग अभय कुमार सुमन का कहना है कि व्यापार प्रदर्शनियों के माध्यम से कारीगरों के उत्पादों की ब्रांडिंग की जा रही है ताकि उनकी बिक्री में इजाफा हो सके। प्रशासन का प्राथमिक उद्देश्य अमेठी के हुनर को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करना और अधिक से अधिक लोगों को सम्मानजनक रोजगार से जोड़ना है।
जिले में नया स्वरोजगार या सूक्ष्म उद्योग शुरू करने के इच्छुक नागरिकों के लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। इच्छुक व्यक्ति 5 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट पर 25 प्रतिशत अनुदान प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना का लाभ 18 वर्ष से लेकर 50 वर्ष की आयु का कोई भी व्यक्ति उठा सकता है। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवेदक के पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और उद्यम पंजीकरण का फार्म होना अनिवार्य है। इस अनुदान की मदद से युवा और दस्तकार अपनी छोटी विनिर्माण इकाई अथवा सेवा व्यवसाय की शुरुआत कर सकते हैं।


















