अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दो बड़े संकटों के बीच भारत की राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन किया गया। एक ओर जहां अमेरिकी प्रशासन द्वारा नए व्यापार शुल्क यानी टैरिफ लागू करने से वैश्विक आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हुई है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य संघर्ष ने दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरी चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव के कारण कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। इस संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय स्थिति के बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सदस्य देशों और वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए एक नया आर्थिक ढांचा तैयार करने का आह्वान किया है।
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। इस संकटपूर्ण माहौल में व्यापारिक और आर्थिक प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करना आवश्यक हो गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने वाले किसी भी झटके का सामना मजबूती से किया जा सके।
वैश्विक अनिश्चितता और अर्थव्यवस्था पर पड़ता प्रभाव
ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक ढांचा बड़े बदलावों से होकर गुजर रहा है। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता आज के वैश्विक माहौल की मुख्य पहचान बन चुकी हैं। भू-राजनीतिक टकरावों, स्वास्थ्य संकटों और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के सामने गंभीर व्यवधान पैदा किए हैं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण और तकनीकी विकास ने उत्पादकता और आर्थिक विस्तार के कई नए रास्ते भी खोले हैं। विदेश मंत्री के अनुसार, जोखिम और अवसर दोनों का दायरा अब पहले से कहीं अधिक व्यापक हो चुका है। ऐसे में विभिन्न देशों और व्यावसायिक घरानों के लिए बदलती परिस्थितियों का पहले से अनुमान लगाना, उनके अनुरूप ढलना और त्वरित निर्णय लेना बेहद जरूरी हो गया है।
लचीली और नई ऊर्जा प्रणाली का निर्माण
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर जोर देते हुए विदेश मंत्री ने एक ऐसी टिकाऊ और मजबूत ऊर्जा प्रणाली विकसित करने की वकालत की, जो किसी भी प्रकार के वैश्विक व्यवधान को सहन कर सके। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों के संदर्भ में यह प्रस्ताव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि भावी ऊर्जा ढांचा ऐसा होना चाहिए जो ऊर्जा संक्रमण की चुनौतियों का सामना करने के साथ-साथ प्रत्येक देश की स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुकूल हो सके।
जयशंकर ने कहा कि भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, पारदर्शी व्यापार और निवेश नीतियां, स्थिर व्यावसायिक माहौल और विविध वाणिज्यिक संबंध ही किसी भी अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकाल सकते हैं। जब तक आपूर्ति श्रृंखलाएं सुरक्षित और पारदर्शी नहीं होंगी, तब तक वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाना संभव नहीं होगा।
आर्थिक सहयोग और आत्मनिर्भरता पर जोर
ब्रिक्स संगठन के भीतर वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस सहयोग का मुख्य उद्देश्य कंपनियों को नए साझेदार तलाशने, नए बाजारों तक पहुंच बनाने और आपूर्ति नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद करना होना चाहिए। सदस्य देशों को अपनी-अपनी क्षमताओं को व्यावहारिक और व्यावसायिक साझेदारी में बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि अधिक आर्थिक गतिविधियों और मजबूत आर्थिक सुरक्षा का सीधा अर्थ अधिक आत्मनिर्भरता हासिल करना है। ब्रिक्स का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार करना होना चाहिए, जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक झटकों को सोखने की क्षमता रखता हो। इसके साथ ही, यह व्यवस्था सभी देशों को वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़े रखेगी और उन्हें प्रतिस्पर्धी भी बनाए रखेगी।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत का योगदान
भारत की क्षमताओं का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत विशाल और तेजी से बढ़ते बाजार, बढ़ती विनिर्माण क्षमताओं, दक्ष कार्यबल, व्यापक डिजिटल अनुभव और एक गतिशील नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के साथ ब्रिक्स में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। भारत का उद्यमशील आधार अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को नई दिशा देने में सक्षम है।
संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम का सबसे बड़ा योगदान यही होगा कि वह संगठन के आगामी चरण के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी व्यापारिक खाका दुनिया के सामने रखे, जिससे आने वाले समय में आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।



















