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अरबों डॉलर लेकर भारत पहुंचीं दुनिया की टेक कंपनियां, डेटा सेंटर की रेस में सात शहर बने नया अड्डाव्यापार
2 घंटे पहले· 2

अरबों डॉलर लेकर भारत पहुंचीं दुनिया की टेक कंपनियां, डेटा सेंटर की रेस में सात शहर बने नया अड्डा

सिर्फ छह महीनों में भारत के सात बड़े शहर मेगा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का केंद्र बन गए हैं, जहां गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा से लेकर रिलायंस और अदानी तक अरबों डॉलर लगा रहे हैं। इसे अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि जियो डेटा पॉलिटिक्स का नया दौर कहा जा रहा है।

अमित पटेलअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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भारत और जापान के बीच गुरुवार को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई अहम समझौतों पर मुहर लगी, और इनमें से एक सीधे तौर पर देश में डेटा सेंटर लगाने से जुड़ा है। लेकिन यह कोई अकेली या पहली घटना नहीं है। बीते कुछ महीनों में दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियां या तो भारत में डेटा सेंटर लगाने की दिलचस्पी दिखा चुकी हैं या फिर उन पर काम भी शुरू कर चुकी हैं। पिछले छह महीनों में भारत इन सेंटर्स का सेंटर पॉइंट बनकर उभरा है। साफ शब्दों में कहें तो हिंदुस्तान अब दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों के लिए डेटा सेंटर का नया ठिकाना बन गया है।

गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, मेटा, एनटीटी डेटा, रिलायंस, अदानी और कई दूसरी कंपनियां यहां अरबों डॉलर झोंक रही हैं। सिर्फ छह महीनों के भीतर देश के कम से कम सात बड़े शहर मेगा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के केंद्र बन चुके हैं। जानकार इसे अब महज निवेश नहीं, बल्कि जियो डेटा पॉलिटिक्स का नया दौर बता रहे हैं।

आखिर डेटा सेंटर पर इतनी होड़ क्यों?

कुछ साल पहले तक तेल, गैस और बंदरगाह किसी भी देश की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत माने जाते थे। अब उनकी जगह डेटा ने ले ली है। AI मॉडल जितना ज्यादा डेटा प्रोसेस करेंगे, उतने ही बेहतर बनते जाएंगे। यही वजह है कि दुनिया की हर बड़ी टेक कंपनी ऐसे देशों की तलाश में है जहां बड़े पैमाने पर डेटा स्टोर और प्रोसेस किया जा सके। यहीं से जियो डेटा पॉलिटिक्स की कहानी शुरू होती है। इसका मतलब है कि अब देशों के बीच मुकाबला सिर्फ जमीन या समुद्री रास्तों का नहीं, बल्कि डेटा का भी होगा। जिस देश के पास जितना ज्यादा डेटा, जितनी ज्यादा कंप्यूटिंग पावर और जितने ज्यादा डेटा सेंटर होंगे, वही भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा पकड़ रखेगा।

भारत ही सबसे बड़ी पसंद क्यों बना?

सबसे पहली वजह है आबादी का डिजिटल होना। भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है। करोड़ों लोग हर दिन UPI, सोशल मीडिया, ई कॉमर्स, वीडियो स्ट्रीमिंग और तमाम डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे हर सेकंड भारी मात्रा में डेटा बनता है, और यही कच्चा माल AI कंपनियों को सबसे ज्यादा चाहिए।

दूसरी बड़ी वजह डेटा लोकलाइजेशन है। भारत के नियम लगातार इस दिशा में बढ़ रहे हैं कि भारतीय नागरिकों का संवेदनशील डेटा देश की सीमा के भीतर ही रखा जाए। इसका सीधा मतलब है कि विदेशी कंपनियों को भारत में ही डेटा सेंटर खड़े करने होंगे।

इसके अलावा यहां जमीन और निर्माण की लागत अमेरिका और यूरोप के मुकाबले काफी कम है। सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही है, जिससे इन सेंटर्स को ग्रीन बिजली मिल सकती है। मुंबई, चेन्नई और विशाखापत्तनम जैसे शहरों तक अंतरराष्ट्रीय समुद्री इंटरनेट केबल सीधे पहुंचती है, जिससे दुनिया भर के नेटवर्क से तेज कनेक्टिविटी बनती है।

सात शहरों में गढ़ा जा रहा नया डिजिटल भारत

इस वक्त देश के सात बड़े शहर डेटा सेंटर निवेश का केंद्र बने हुए हैं।

मुंबई और नवी मुंबई अब भी भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर हब हैं। यहां अमेजन वेब सर्विसेज (AWS), माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, STT GDC, नेक्स्ट्रा (Nxtra) और कई दूसरी कंपनियां अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रही हैं।

चेन्नई समुद्री केबल नेटवर्क के दम पर तेजी से उभर रहा है। यहां कई हाइपरस्केल डेटा सेंटर चालू हैं और नए प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है।

हैदराबाद में जापान की एनटीटी डेटा (NTT DATA) अपना सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट तैयार कर रही है। कंपनी करीब 400 मेगावाट क्षमता वाले क्लस्टर पर काम कर रही है।

विशाखापत्तनम में गूगल करीब 6 अरब डॉलर के निवेश के साथ बड़ा AI और डेटा सेंटर हब विकसित करने की तैयारी में है।

जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज और मेटा मिलकर देश के सबसे बड़े AI डेटा सेंटरों में से एक पर काम कर रहे हैं। यहां ग्रीन एनर्जी के साथ समुद्री पानी से कूलिंग की व्यवस्था तैयार हो रही है।

नोएडा और बेंगलुरु में भी कई बड़े क्लाउड और डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का विस्तार चल रहा है। इन शहरों में घरेलू और विदेशी, दोनों तरह की कंपनियां पैसा लगा रही हैं।

चीन के मुकाबले भारत पर ज्यादा भरोसा क्यों?

डेटा सेंटर्स के लिए भारत को अब चीन से ज्यादा भरोसेमंद माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह जियो डेटा पॉलिटिक्स और ग्लोबल सप्लाई चेन में आया बदलाव है। अमेरिका और यूरोप की कई बड़ी टेक कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता घटाना चाहती हैं। चीन में बढ़ता सरकारी नियंत्रण, डेटा एक्सेस को लेकर सख्त नियम, अमेरिका और चीन के बीच तनाव और विदेशी कंपनियों के लिए बढ़ता रेगुलेटरी जोखिम, इन सबने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी तरफ भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार, डेटा लोकलाइजेशन की नीति, मजबूत आईटी टैलेंट, सस्ती जमीन और सरकार की प्रोत्साहन योजनाएं कंपनियों को ज्यादा भरोसा देती हैं। यही वजह है कि वैश्विक कंपनियां अब चीन के बजाय भारत में अपने बड़े डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर लगा रही हैं।

किसने कितना बड़ा दांव लगाया?

गूगल ने भारत में AI इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए बड़े निवेश का ऐलान किया है। कंपनी विशाखापत्तनम, नवी मुंबई और दिल्ली NCR इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

माइक्रोसॉफ्ट अपने क्लाउड नेटवर्क का लगातार विस्तार कर रही है और भारत को अपने सबसे बड़े AI बाजारों में शामिल कर चुकी है।

अमेजन वेब सर्विसेज ने मुंबई रीजन की क्षमता बढ़ाई है और आने वाले सालों में अरबों डॉलर निवेश करने की योजना पहले ही घोषित कर चुकी है।

जापान की एनटीटी डेटा भारत के सबसे बड़े AI डेटा सेंटर क्लस्टर में निवेश कर रही है।

इनके अलावा STT GDC, कंट्रोल एस (CtrlS), नेक्स्ट्रा और अदानीकनेक्स (AdaniConnex) जैसी भारतीय और वैश्विक कंपनियां भी देशभर में हाइपरस्केल डेटा सेंटर खड़े कर रही हैं।

यह समझना जरूरी है कि डेटा सेंटर सिर्फ सर्वर रखने की इमारत भर नहीं होते। इनके साथ हजारों करोड़ रुपये का निवेश आता है, और निर्माण, बिजली से लेकर फाइबर नेटवर्क तक की पूरी व्यवस्था इनके इर्द गिर्द खड़ी होती है।

इसका आप पर असर

  • नौकरियों पर: डेटा सेंटर और उनके साथ जुड़े निर्माण, बिजली और फाइबर नेटवर्क में अरबों डॉलर का निवेश आने से आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में रोजगार के नए मौके बन सकते हैं।
  • आम यूजर पर: देश के भीतर डेटा सेंटर बढ़ने से भारतीय यूजर्स के लिए इंटरनेट सेवाएं और AI आधारित ऐप्स तेज और ज्यादा भरोसेमंद हो सकती हैं, और संवेदनशील डेटा देश की सीमा के भीतर रहने की संभावना बढ़ती है।

सवाल-जवाब

पिछले छह महीनों में भारत के कितने शहर डेटा सेंटर निवेश का केंद्र बने हैं?
देश के कम से कम सात बड़े शहर मेगा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के केंद्र बन चुके हैं, जिनमें मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, विशाखापत्तनम, जामनगर, नोएडा और बेंगलुरु शामिल हैं।
जामनगर में कौन सी कंपनियां मिलकर डेटा सेंटर बना रही हैं?
जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज और मेटा मिलकर देश के सबसे बड़े AI डेटा सेंटरों में से एक पर काम कर रहे हैं, जहां ग्रीन एनर्जी और समुद्री पानी से कूलिंग की व्यवस्था तैयार हो रही है।
विशाखापत्तनम में गूगल कितना निवेश करने की तैयारी में है?
गूगल विशाखापत्तनम में करीब 6 अरब डॉलर के निवेश के साथ बड़ा AI और डेटा सेंटर हब विकसित करने की तैयारी में है।
हैदराबाद में एनटीटी डेटा किस क्षमता के क्लस्टर पर काम कर रही है?
जापान की एनटीटी डेटा हैदराबाद में करीब 400 मेगावाट क्षमता वाले AI डेटा सेंटर क्लस्टर पर काम कर रही है, जो उसका सबसे बड़ा ऐसा प्रोजेक्ट है।
डेटा सेंटर के लिए भारत को चीन से ज्यादा भरोसेमंद क्यों माना जा रहा है?
चीन में बढ़ते सरकारी नियंत्रण, डेटा एक्सेस के सख्त नियम, अमेरिका चीन तनाव और रेगुलेटरी जोखिम के मुकाबले भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, बढ़ता डिजिटल बाजार, डेटा लोकलाइजेशन नीति, आईटी टैलेंट, सस्ती जमीन और सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं कंपनियों को ज्यादा भरोसा देती हैं।
जियो डेटा पॉलिटिक्स का क्या मतलब है?
इसका मतलब है कि अब देशों के बीच मुकाबला सिर्फ जमीन या समुद्री रास्तों का नहीं, बल्कि डेटा का भी है, और जिस देश के पास ज्यादा डेटा, कंप्यूटिंग पावर और डेटा सेंटर होंगे वही डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर डालेगा।
भारत डेटा सेंटर के लिए इतना आकर्षक क्यों है?
भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा इंटरनेट यूजर बेस है, डेटा लोकलाइजेशन के नियम बढ़ रहे हैं, जमीन और निर्माण की लागत कम है, ग्रीन बिजली उपलब्ध है और मुंबई, चेन्नई तथा विशाखापत्तनम तक समुद्री इंटरनेट केबल सीधे पहुंचती है।
अमित पटेल
लेखक के बारे मेंअमित पटेलबिज़नेस संवाददाता दिल्ली
विशेषज्ञताबिज़नेस समाचार, वित्तीय बाज़ार, शेयर बाज़ार विश्लेषण, कॉर्पोरेट मामले, स्टार्टअप, उद्यमिता, आर्थिक रुझान, टेक्नोलॉजी बिज़नेस, निवेश, वैश्विक अर्थव्यवस्था

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, स्टार्टअप, तकनीक और आर्थिक रुझानों को कवर करते हैं। वे आधुनिक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले कारोबार और उद्योगों की ख़बरें, बाज़ार विश्लेषण और अंतर्दृष्टि देते हैं।

अमित पटेल एक बिज़नेस संवाददाता हैं जो वैश्विक बाज़ार, वित्त, उद्यमिता, तकनीक और आर्थिक घटनाक्रमों को कवर करते हैं। वे ब्रेकिंग बिज़नेस न्यूज़, कॉर्पोरेट रणनीतियों, शेयर बाज़ार के रुझानों, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने वाले औद्योगिक नवाचारों पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, स्पष्टता और गहन विश्लेषण पर ज़ोर देते हुए अमित पाठकों को जटिल कारोबारी विषयों और उनके वास्तविक असर को समझने में मदद करते हैं। उनकी कवरेज वित्तीय बाज़ार, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, उभरते उद्योगों, आर्थिक नीति, निवेश रुझानों और डिजिटल बदलाव तक फैली है।

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