पश्चिम एशिया में सैन्य संघर्ष तेज़, अमेरिका ने ईरान के रक्षा नेटवर्क और नौसैनिक ठिकानों पर किया हमलाराशिफल 2 सितंबर 2026: मंगल और चंद्रमा के गोचर से आज इन राशियों पर होगी धन वर्षा, जानें सभी 12 राशियों का हालवनडे क्रिकेट में बतौर कप्तान सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड आज भी वीरेंद्र सहवाग के नाम दर्जजगुआर लैंड रोवर ने 542 हॉर्सपावर और जबरदस्त ऑफ-रोड क्षमता के साथ पेश की नई रेंज रोवर इलेक्ट्रिकभगवान श्रीकृष्ण के पौराणिक रहस्यों पर आधारित फिल्म 'कार्तिकेय 2' की ब्लॉकबस्टर कहानी, 15 करोड़ के बजट में जुटाए 120 करोड़ रुपये से अधिकयूएस ओपन: लोरेन्ज़ो मुसेटी ने ऑर्थर फेरी को सीधे सेटों में हराकर किया बाहरअमेरिकी डॉलर और चीनी युआन में उतार-चढ़ाव के बीच सीमित दायरे में कारोबार के संकेत, यूरो और सोना भी दबाव मेंमिडिल ईस्ट में सैन्य संघर्ष गहराने से अमेरिकी डॉलर मजबूत, जीडीपी आंकड़ों से पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावटबंगाल की खाड़ी के नए तंत्र से राजस्थान में फिर लौटेगा मानसून, कोटा और जयपुर संभाग में तेज बारिश की चेतावनीअतिवृष्टि से रौद्र रूप में नदियां और ठप हुए मार्ग, नैनीताल व देहरादून सहित 6 क्षेत्रों हेतु रेड अलर्ट, 2 सितंबर को शिक्षण संस्थान बंद
रूस के सस्ते कच्चे तेल से भारत ने दुनिया की रिफाइनरियों को पीछे छोड़ा, 2030 तक बनेगा सबसे बड़ा फ्यूल हबव्यापार
18 जुल॰ 2026, 11:22 pm (45 दिन पहले)· 2

रूस के सस्ते कच्चे तेल से भारत ने दुनिया की रिफाइनरियों को पीछे छोड़ा, 2030 तक बनेगा सबसे बड़ा फ्यूल हब

पश्चिम एशिया में जंग के बीच भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर दुनिया को बेच रहा है, जिससे जुलाई 2026 में एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 14 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है और 2030 तक भारत के दुनिया का सबसे बड़ा फ्यूल हब बनने की तैयारी है।

पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग की वजह से अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े देश हर दिन यह सोचकर परेशान हैं कि पेट्रोल का दाम अगली सुबह कहां पहुंचेगा, लेकिन ठीक इसी दौर में भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है, यहां 140 करोड़ की आबादी को किफायती ईंधन भी मिल रहा है और साथ ही देश दुनिया भर को तेल बेचकर अरबों डॉलर की कमाई भी कर रहा है। इस वैश्विक उथल-पुथल में भी भारत की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है, और अब सरकार ने साल 2030 तक ऐसी रणनीति तैयार कर ली है कि आने वाले वक्त में तेल की किसी भी वैश्विक किल्लत के बीच दुनिया को भारत की तरफ ही देखना पड़ेगा।

सस्ता कच्चा तेल खरीदो, महंगा फ्यूल बेचो, यही है भारत का दांव

इस कामयाबी के पीछे कोई जटिल फॉर्मूला नहीं, बल्कि एक सीधा-सादा कारोबारी नजरिया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सूझबूझ से अमल में लाया है। पश्चिमी देशों की पाबंदियों की परवाह किए बिना भारत ने रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदना जारी रखा। इसके बाद देश की बड़ी रिफाइनरियों ने इसी सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस करके पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल में तब्दील किया और उसे उन देशों को बेचना शुरू किया, जहां मांग भी सबसे ज्यादा है और मुनाफा भी सबसे बेहतर मिल रहा है। यही रणनीति अब आंकड़ों में साफ नजर आ रही है, जो बताते हैं कि भारत ग्लोबल फ्यूल मार्केट पर किस तरह पकड़ बना चुका है।

ये भी पढ़ें

जुलाई 2026 के आंकड़े जो दुनिया को हैरान कर रहे हैं

चालू महीने यानी जुलाई 2026 में भारत हर दिन औसतन 14 लाख बैरल रिफाइंड फ्यूल विदेशों को भेज रहा है, और यह रिकॉर्ड आंकड़ा दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों को भी हैरान करने के लिए काफी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह निर्यात मई 2026 के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है, यानी सिर्फ दो महीनों के भीतर भारत ने अपनी निर्यात क्षमता को लगभग डेढ़ गुना कर लिया।

अफ्रीका बना भारत के डीजल कारोबार का नया गढ़

भारत किस सोच-समझकर योजना के साथ काम कर रहा है, इसकी एक बानगी अफ्रीका महाद्वीप के आंकड़ों में मिलती है। अप्रैल 2026 में भारत अफ्रीका को अपने कुल डीजल निर्यात का सिर्फ 32 प्रतिशत हिस्सा भेज रहा था, लेकिन अगले ही महीने यानी मई 2026 में यह हिस्सेदारी सीधे 80 प्रतिशत तक पहुंच गई। मतलब साफ है, जहां भी सबसे ज्यादा मार्जिन दिखा, भारत ने तुरंत अपना माल वहीं भेजना शुरू कर दिया।

जब दुनिया भर की रिफाइनरियां ठप पड़ीं, तो रूसी कंपनियों ने भारत का रुख किया

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहीं लड़ाइयों ने वैश्विक स्तर पर तेल शोधन के ढांचे को बुरी तरह हिला दिया है। इन जंगों में हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों ने मिडिल ईस्ट के साथ-साथ यूरोप की भी कई बड़ी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाया है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल, जेट फ्यूल और गैसोलीन की भारी किल्लत पैदा हो गई है। भारत की रिफाइनरियों ने इसी मौके को बखूबी भुनाया। इसका नतीजा यह निकला कि रूस की कई बड़ी तेल कंपनियां खुद अपना कच्चा तेल प्रोसेस कराने के लिए भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच गईं। रूस के पास कच्चा तेल तो प्रचुर मात्रा में है, लेकिन रिफाइनिंग क्षमता की कमी और पाबंदियों की वजह से वह इसे सीधे बेच नहीं पा रहा, और इसी अंतर का सीधा फायदा अब भारत को मिल रहा है। भारत अब एक भरोसेमंद केंद्र बन चुका है, जहां तेल पहुंचता है, वहीं उसे साफ किया जाता है और वहीं से दुनिया भर के वाहनों तक पहुंचाया जाता है।

2030 का मास्टरप्लान: भारत बनने जा रहा है दुनिया का सबसे बड़ा फ्यूल हब

भारत सिर्फ आज के मुनाफे पर नजर नहीं टिकाए हुए है, बल्कि सरकार की योजना आने वाले सालों के बड़े वैश्विक बाजार को साधने की है। बीते पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि रिफाइनिंग सेक्टर में भारत का निवेश 23 प्रतिशत तक बढ़ चुका है। पुरानी रिफाइनरियों को आधुनिक बनाया जा रहा है, जबकि कुछ की क्षमता लगभग दोगुनी करने पर काम चल रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी आईईए के अनुमान के मुताबिक, भारत की रिफाइनिंग क्षमता 2030 तक 15 प्रतिशत और बढ़ सकती है। मतलब यह कि भविष्य में भी जब भी वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की किल्लत खड़ी होगी, दुनिया के पास भारत की तरफ रुख करने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा।

सवाल-जवाब

जुलाई 2026 में भारत हर दिन कितना रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट कर रहा है?
भारत जुलाई 2026 में हर दिन औसतन रिकॉर्ड 14 लाख बैरल रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट कर रहा है।
यह एक्सपोर्ट मई 2026 के मुकाबले कितना बढ़ा है?
यह मई 2026 के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत ज्यादा है।
अफ्रीका को भारत का डीजल निर्यात कितना बढ़ा?
अप्रैल 2026 में यह हिस्सा सिर्फ 32 प्रतिशत था, जो मई 2026 में बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया।
भारत सस्ता कच्चा तेल कहां से खरीद रहा है?
भारत पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की परवाह किए बिना रूस से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीद रहा है।
रूसी तेल कंपनियां भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क क्यों कर रही हैं?
जंगों की वजह से मिडिल ईस्ट और यूरोप की रिफाइनरियां प्रभावित होने के बाद रूस अपनी सीमित रिफाइनिंग क्षमता और पाबंदियों के चलते तेल खुद प्रोसेस नहीं कर पा रहा, इसलिए वह भारतीय रिफाइनरियों की मदद ले रहा है।
भारत के रिफाइनिंग सेक्टर में निवेश कितना बढ़ा है?
पिछले पांच सालों में भारत के रिफाइनिंग सेक्टर में निवेश 23 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।
2030 तक भारत की रिफाइनिंग क्षमता को लेकर क्या अनुमान है?
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मुताबिक भारत की रिफाइनिंग क्षमता 2030 तक 15 प्रतिशत और बढ़ सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR