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ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की 98 हजार करोड़ रुपये की पूंजी अटकी, इन्वेंट्री सुधारने से मिल सकती है बड़ी राहतव्यापार
5 सित॰ 2026, 11:54 pm (34 मिनट पहले)· 2

ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की 98 हजार करोड़ रुपये की पूंजी अटकी, इन्वेंट्री सुधारने से मिल सकती है बड़ी राहत

वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप की एक हालिया रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारतीय ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री के करीब 98 हजार करोड़ रुपये इन्वेंट्री में फंसे हुए हैं। बेहतर प्रबंधन और कार्यशील पूंजी के सही इस्तेमाल से इनमें से बड़ी रकम को बाहर निकाला जा सकता है।

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर को मजबूती देने वाले ऑटो कंपोनेंट उद्योग के सामने एक बड़ा वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। इस सेक्टर की भारी-भरकम पूंजी अलग-अलग स्तरों पर अटकी हुई है। वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि वाहन कलपुर्जा निर्माताओं की लगभग 98,000 करोड़ रुपये की राशि माल के भंडार में बुरी तरह फंसी हुई है। यदि कंपनियां अपनी इन्वेंट्री और सप्लाई चेन का प्रबंधन बेहतर तरीके से करें, तो इस अटकी हुई रकम में से 29,000 से 39,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है।

छोटे उद्योगों को मिल सकती है ऑक्सीजन

रिपोर्ट में इस बात पर भी रोशनी डाली गई है कि यदि कार्यशील पूंजी को मुक्त कराया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा छोटे स्तर के व्यवसायों को मिलेगा। इस संभावित रूप से मुक्त होने वाली राशि में से करीब 4,000 से 5,600 करोड़ रुपये सीधे तौर पर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों यानी एमएसएमई क्षेत्र के हिस्से आ सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि देश के कुल वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं में एमएसएमई की हिस्सेदारी लगभग 80 फीसदी है। वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट जिसका शीर्षक द ब्रोकन फ्लाईव्हील बिल्डिंग ए फ्यूचर रेडी ऑटोमोटिव सप्लाई इकोसिस्टम है, उसके मुताबिक जो कंपनियां मांग और खपत के आधार पर माल खत्म होने के बाद दोबारा आपूर्ति करती हैं, वे आमतौर पर अपनी इन्वेंट्री में अटकी पूंजी को 30 से 40 फीसदी तक घटाने में सफल हो जाती हैं।

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उत्पादकता बढ़ाने और कारोबार विस्तार की अपार संभावनाएं

यह पूरा अध्ययन उद्योग जगत के 21 वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत और उनके अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। इस रिसर्च में यह अनुमान भी लगाया गया है कि देश के ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में एमएसएमई कंपनियों का कुल कारोबार लगभग 2.4 से 2.9 लाख करोड़ रुपये के आसपास है। यदि इस क्षेत्र की उत्पादकता में 30 फीसदी तक का सुधार कर लिया जाए, तो हर साल 74,000 से 88,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त कारोबार हासिल किया जा सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि घरेलू कंपनियां मेक इन इंडिया और पीएलआई जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी उत्पादन क्षमता को और अधिक व्यापक बना सकती हैं।

निवेश की रफ्तार और क्षमता से जुड़ी चुनौतियां

भारतीय कलपुर्जा विनिर्माता संघ यानी एसीएमए के सहयोग से किए गए इस सर्वे में एक और अहम बात सामने आई है। इसके मुताबिक, 95 फीसदी उद्योगपतियों का ऐसा मानना है कि एमएसएमई इकाइयां भविष्य की जरूरतों और विकास के लिए जरूरी क्षमताओं में पर्याप्त गति से निवेश नहीं कर पा रही हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि देश के कारखाने औसतन 75 से 85 फीसदी क्षमता पर ही काम कर रहे हैं, जबकि सर्वे में शामिल 91 प्रतिशत लोगों ने क्षमता के इस पूरे ढांचे को एक बड़ी और गंभीर चुनौती के रूप में स्वीकार किया है।

प्रबंध साझेदार की दो टूक राय

वेक्टर कंसल्टिंग ग्रुप के प्रबंध साझेदार रवींद्र पाटकी ने इस स्थिति पर बात करते हुए कहा कि अवसर केवल उत्पादन क्षमता को बढ़ाने तक सीमित नहीं है। भारतीय कंपनियों के पास पहले से ही जो क्षमता मौजूद है, उसके एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल उत्पादन के लिए पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परिचालन में फंसी पूंजी को बाहर निकालना, मौजूदा बिजनेस मॉडल की आर्थिक सेहत में सुधार करना और फिर उस अतिरिक्त धन को नई क्षमताएं विकसित करने में लगाना ही यह तय करेगा कि आगे चलकर भारतीय सप्लायर वैश्विक वाहन उद्योग की मूल्य शृंखला में किस पायदान पर खड़े होंगे।

सवाल-जवाब

ऑटो कलपुर्जा उद्योग की कितनी राशि माल के भंडार में फंसी है?
इस उद्योग की लगभग 98,000 करोड़ रुपये की पूंजी माल के भंडार में फंसी हुई है।
बेहतर प्रबंधन से कितनी पूंजी को मुक्त किया जा सकता है?
इन्वेंट्री और सप्लाई चेन का बेहतर प्रबंधन करके इसमें से 29,000 से 39,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी को बाहर निकाला जा सकता है।
एमएसएमई क्षेत्र से कितनी पूंजी मुक्त होने की संभावना है?
संभावित रूप से मुक्त होने वाली कार्यशील पूंजी में से 4,000 से 5,600 करोड़ रुपये तक का हिस्सा एमएसएमई क्षेत्र से हो सकता है।
वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं में एमएसएमई की हिस्सेदारी कितनी है?
देश के वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं में एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है।
यह अध्ययन किस संस्था के सहयोग से कराया गया है?
यह अध्ययन भारतीय कलपुर्जा विनिर्माता संघ यानी एसीएमए के सहयोग से कराया गया है।
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